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Bhiwani News: भिवानी शहर के 75 फीसदी होटलों और रेस्टोरेंट में नहीं सूखा-गीला कचरा निस्तारण प्रबंध के लिए कोई प्रबंध
Sun, 22 Sep 2024 05:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 22 Sep 2024 05:46 AM IST
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भिवानी। शहर और आसपास के इलाकों में 75 फीसदी होटल, रेस्टोरेंट और विवाद उत्सव स्थलों के अंदर अब भी सूखा और गीला कचरा प्रबंधन के मानक पूरे नहीं हैं। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद संबंधित संस्थानों को नोटिस थमा चुका है। बावजूद इसके अभी तक कोई प्रबंध नहीं हैं। जबकि एनजीटी के आदेशों और नगर परिषद की हिदायतों के अनुसार इन सभी श्रेणी के संस्थानों के अंदर परिसर में ही सूखा और गीला कचरा प्रबंधन के सख्त आदेश हैं।
शहरी दायरे में ठोस-तरल कचरा प्रबंधन के साथ वाहन पार्किंग व्यवस्था सहित अन्य शर्तें पूरी नहीं करने वाले होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और विवाह उत्सव स्थलों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त रुख अपना रहा है। भिवानी में करीब 26 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से नोटिस भी जारी किए गए थे। लेकिन इसके बाद चुनिंदा होटलों को छोड़कर सभी में कोई प्रबंध नहीं है। इन होटलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद की अलग-अलग निरीक्षण टीमों ने मानकों में कई खामियां भी दर्ज की थीं, जिन्हें जल्द पूरा करने की हिदायतें भी दी थी।
अब हालत ये है कि होटल और रेस्टोरेंट में निकलने वाला सूखा और गीला कचरा बाहर भेजा जा रहा है। जबकि इस कचरे का अंदर ही निस्तारण अनिवार्य है। ऐसे हालातों में एक बार फिर नगर परिषद मानकों को लेकर सख्त रुख अख्तियार करने जा रही है। शहर में करीब डेढ़ सौ से अधिक संस्थान इस दायरे में आते हैं। लेकिन इसमें से करीब 35 संस्थानों ने ही आधे अधूरे मानक ही पूरे किए हैं। जबकि 75 फीसदी के पास तो कोई भी मानक पूरा नहीं हो रहा है।
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एनजीटी की गाइडलाइन
एनजीटी ने होटलों के साथ विवाह उत्सव स्थलों को भी इस दायरे में रखा है। इसके तहत होटल में महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय होना जरूरी है। होटल की छत से बारिश के पानी का भंडारण करने की व्यवस्था अनिवार्य है। कार्य स्थल पर ही ठोस व तरल कचरा प्रबंधन होना चाहिए, वाहन पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। यदि होटल और रेस्टोरेंट में जनरेटर का इस्तेमाल हो रहा है तो उस पर साइलेंसर लगा होना चाहिए, जिससे वह हवा प्रदूषण न फैला सके। पानी को ट्रीट कर जमीन में छोड़े जाने के प्रबंध जरूरी किए गए हैं। इसके अलावा भी रसोई व इसके आसपास कई तरह की गाइडलाइन एनजीटी ने जारी की हैं, जिनका पूरा करना जरूरी है।
होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे व विवाह उत्सव स्थलों में ठोस व तरल कचरा प्रबंधन, पार्किंग और सोलर सिस्टम सहित एनजीटी की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के सभी मानक पूरे किए जाने अनिवार्य हैं। जिन होटलों और रेस्टोरेंट में मानक अभी पूरे नहीं हैं, उन्हें नगर परिषद की तरफ से मोहलत दी गई है। इनको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी एनओसी लेना अनिवार्य है। ऐसे में नगर परिषद की स्वच्छ भारत मिशन की टीमें जागरूक भी कर रही हैं ताकि समय रहते अपने मानक पूरे करें। -भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन, नगर परिषद भिवानी।
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शहरी दायरे में ठोस-तरल कचरा प्रबंधन के साथ वाहन पार्किंग व्यवस्था सहित अन्य शर्तें पूरी नहीं करने वाले होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और विवाह उत्सव स्थलों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त रुख अपना रहा है। भिवानी में करीब 26 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से नोटिस भी जारी किए गए थे। लेकिन इसके बाद चुनिंदा होटलों को छोड़कर सभी में कोई प्रबंध नहीं है। इन होटलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद की अलग-अलग निरीक्षण टीमों ने मानकों में कई खामियां भी दर्ज की थीं, जिन्हें जल्द पूरा करने की हिदायतें भी दी थी।
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अब हालत ये है कि होटल और रेस्टोरेंट में निकलने वाला सूखा और गीला कचरा बाहर भेजा जा रहा है। जबकि इस कचरे का अंदर ही निस्तारण अनिवार्य है। ऐसे हालातों में एक बार फिर नगर परिषद मानकों को लेकर सख्त रुख अख्तियार करने जा रही है। शहर में करीब डेढ़ सौ से अधिक संस्थान इस दायरे में आते हैं। लेकिन इसमें से करीब 35 संस्थानों ने ही आधे अधूरे मानक ही पूरे किए हैं। जबकि 75 फीसदी के पास तो कोई भी मानक पूरा नहीं हो रहा है।
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एनजीटी की गाइडलाइन
एनजीटी ने होटलों के साथ विवाह उत्सव स्थलों को भी इस दायरे में रखा है। इसके तहत होटल में महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय होना जरूरी है। होटल की छत से बारिश के पानी का भंडारण करने की व्यवस्था अनिवार्य है। कार्य स्थल पर ही ठोस व तरल कचरा प्रबंधन होना चाहिए, वाहन पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। यदि होटल और रेस्टोरेंट में जनरेटर का इस्तेमाल हो रहा है तो उस पर साइलेंसर लगा होना चाहिए, जिससे वह हवा प्रदूषण न फैला सके। पानी को ट्रीट कर जमीन में छोड़े जाने के प्रबंध जरूरी किए गए हैं। इसके अलावा भी रसोई व इसके आसपास कई तरह की गाइडलाइन एनजीटी ने जारी की हैं, जिनका पूरा करना जरूरी है।
होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे व विवाह उत्सव स्थलों में ठोस व तरल कचरा प्रबंधन, पार्किंग और सोलर सिस्टम सहित एनजीटी की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के सभी मानक पूरे किए जाने अनिवार्य हैं। जिन होटलों और रेस्टोरेंट में मानक अभी पूरे नहीं हैं, उन्हें नगर परिषद की तरफ से मोहलत दी गई है। इनको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी एनओसी लेना अनिवार्य है। ऐसे में नगर परिषद की स्वच्छ भारत मिशन की टीमें जागरूक भी कर रही हैं ताकि समय रहते अपने मानक पूरे करें। -भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन, नगर परिषद भिवानी।