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Bhiwani News: रंगों की रीत बची... पर बदल गई होली की प्रीत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 12:44 AM IST
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The tradition of colors remains... but the love of Holi has changed.
चांग। रंग और भाईचारे का प्रतीक मानी जाने वाली होली की परंपरा आज भी निभाई जा रही है लेकिन समय के साथ इसका माहौल काफी बदल गया है। पहले गांवों में उत्साह और सामूहिकता के साथ खेली जाने वाली कोरड़ा होली अब यादों तक सिमट गई है जबकि इसका दायरा भी घरों की चहारदीवारी तक सीमित होता जा रहा है। बढ़ते हुड़दंग और नशे के कारण पर्व की मूल भावना पर असर साफ दिखाई दे रहा है।
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पहले लोग हल्दी, गुलाब और नीम के पत्तों से बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करते थे। ये रंग त्वचा के लिए सुरक्षित होने के साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक नहीं होते थे। गांव और शहरों में बच्चे व ग्रामीण होलिका दहन की तैयारी करीब एक महीने पहले शुरू कर देते थे। लकड़ी व अन्य सामग्री जुटाने को लेकर बच्चों में होड़ रहती थी, लेकिन अब ऐसी उत्सुकता कम होती जा रही है।
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परिवार के साथ होता था होली पूजन

वर्षों पहले संयुक्त परिवार एक साथ एकत्र होकर होली पूजन के लिए जाते थे लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इस परंपरा से दूर होते जा रहे हैं। गांवों में आपसी भाईचारे की कमी के कारण एक ही गांव में तीन से चार स्थानों पर होलिका दहन किया जाने लगा है। पहले होली के दिन गांव के लोग टोलियां बनाकर भाभियों को गुलाल लगाने जाते थे लेकिन अब युवा पीढ़ी भी इन परंपराओं से दूरी बना रही है।
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नशे का चलन बढ़ा

होली पर ठंडाई और भांग का आनंद लेने की परंपरा की जगह अब शराब और अन्य नशों ने ले ली है। पहले घरों के दरवाजे पर रंग की बाल्टी और कोरड़ा रखा होता था जबकि अब कई युवा शराब के साथ होली की शुरुआत करते हैं। नशे के कारण भाईचारे के प्रतीक इस पर्व पर अशोभनीय घटनाएं बढ़ने लगी हैं।





मेरी शादी को करीब 10 साल हो गए हैं जिसमें से एक बार कोरड़े के साथ होली खेली है। होली पर्व को सभी मनमुटाव भुलाकर भाईचारे के साथ खेलना चाहिए। होली रिश्तों की मजबूती का भी त्योहार है, इसलिए पूरे परिवार को मिलकर त्योहार की खुशियां साझा करनी चाहिएं। -सोनिया।





युवा पीढ़ी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं धीरे-धीरे होली की परंपरा से दूर होती जा रही हैं। आपसी संतुलन बनाकर होली खेलें ताकि होली का रंग फीका न पड़े। इस दिन कुछ लोग आपसी रंजिश भी निकालते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। त्योहार आपसी भाईचारे को मजबूत करने और परिवार में परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ रहने का सुनहरा मौका है। -पूनम तंवर।






होली की परंपरा तो निभाई जा रही है मगर माहौल बदल गया है। लोग आपसी दुश्मनी निकालने के लिए होली का इंतजार करते हैं। लोक संस्कृति को जीवंत रखने के लिए आपसी भाईचारे व प्राकृतिक रंगों के साथ होली खेलनी चाहिए। -ज्योति ग्रेवाल।
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