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सवारियां ड्राइवर से कह रहीं थी धीरे चलो, फिर भी तेज गति से दौड़ा रहा था और ले ली चार लोगों की जान
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नागरिक अस्पताल में घायलों का हाल जानने पहुंचे उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य और पुलिस अधीक्षक अजीत सि?
- फोटो : Bhiwani
भिवानी/बवानीखेड़ा। हांसी मांर्ग पर जाटू लोहारी के पास गुरुवार देर शाम हुए भयंकर एक्सीडेंट में चार लोगों की मौत हो गई तो कई घायल्। इतनी बड़ी दुर्घटना होने और जानकारी मिलने के बाद भी अस्पताल प्रशासन घायलों के लिए व्यवस्था तक नहीं बना पाया। घायल जब अस्पताल में आने शुरू हुए तो अस्पताल में दूसरे मरीजों के साथ आए लोग घायलों को अंदर ले जाते हुए नजर आए।
वहीं बस में सवार उत्तरप्रदेश के प्रयागराज निवासी संतोष, बनवारी, अजय और शंकर जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी आंखों में हादसे के खौफ का मंजर साफ दिखाई दे रहा था। हाथ जोड़कर वे सिर्फ इतना ही कह रहे थे कि साहब आज हमें कुछ हो जाता तो हमारे बच्चे और परिवार मोतियों की तरह बिखर जाते। उन्होंने बतायचा कि वे बस वाले को बार-बार कहते रहे भैया थोड़ी स्पीड कम कर लो, मगर उसके सिर पर जल्दी पहुंचाने का भूत इस कदर सवार था कि उसने हर किसी की बात को सुनते हुए भी अनसुना कर दिया। साहब थोड़ी सी जल्दबाजी न जाने कितने लोगों के लिए जिंदगी भर का गम बन गया है।
निजी वाहनों से घायलों को पहुंचाया अस्पताल
निजी वाहनों और एंबुलेंस में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया गया। हर कोई घायलों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। एक्सीडेंट कितना बुरा था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेसीबी की सहायता से बस की छत को उखाड़ा गया, तब जाकर घायलों को बाहर निकाला जा सका। गांव जाटू लोहारी में जैसे ही एक्सीडेंट का पता चला तो हर कोई घायलों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। ग्रामीणों ने वाहनों को रुकवाकर घायलों को अस्पताल की तरफ रवाना किया। एक्सीडेंट जिस स्थान पर हुआ वहां पर जमीन पर पड़े कटे हुए हाथ एक्सीडेंट की भयावहता को दर्शा रहे थे। बस में सवारी ज्यादा होने के चलते लोग एक दूसरे के ऊपर गिर गए और जब लोगों ने घायलों को निकलना शुरू किया तो एक दूसरे के साथ जो बस में सवार थे वो उन्हें ढूूंढने में जुट गए।
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चार लोगों का बना आखिरी सफर
गुरुवार को थके हारे लोगों की बस में जब थोड़ी सी झपकी लगी थी और जब उनकी आंख खुली तो खुद को अस्पताल में भर्ती पाया। बस में सफर करने वाले चार लोगों का इस बात का थोड़ा सा भी इल्म नहीं था कि उनके लिए यह सफर आखिरी सफर होने वाला है। अगर उन्हें पता होता तो शायद वो प्राइवेट बस में सफर ही नहीं करते। अस्पताल में रोते-बिलखते परिजनों को देख हर किसी का दिल पसीज गया।
डीसी-एसपी पहुंचे तब बनाई अस्पताल में व्यवस्था
घटना की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य और एसपी अजीत सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने चिकित्सकों से जानकारी जुटाई। उसके बाद इमरजेंसी में उपचार करवा रहे घायलों से बातचीत की। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों पर हमेशा गैरमानवता का आरोप लगता रहा है। ऐसा ही मंजर वीरवार रात नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भी देखने को मिला। न घायलों के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था थी और न ही उन्हें अंदर ले जाने के लिए कोई सहारा देने वाला स्वास्थ्य कर्मी दिखाई दिया। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही पर तंज तो कसे साथ ही घायलों को अंदर पहुंचाने का काम भी उन्होंने किया। जब उपायुक्त और एसपी नागरिक अस्पताल में पहुंचे तो कुंभकर्णी नींद में सोए अधिकारियों की आंखें खुली और व्यवस्था बनाने में जुट गए।
काम से घर लौटते हैं आखिरी बस में लोग
यह बस भिवानी से हांसी जाने वाली अंतिम बस थी। अंतिम बस होने के चलते और घर पहुंचने के लिए इस बस में हर रोज भारी भीड़ रहती है। गुरुवार को भी बस में लगभग 70 लोग सवार थे। कई लोगों को बस में बैठने के लिए जगह भी नहीं मिल रही थी। किसी के हाथ में बच्चों के लिए खाने का सामान था तो किसी पास रसोई का सामान। किसी के घर में चूल्हा जलने का इंतजार हो रहा था तो किसी के घर में पापा के साथ बैठकर खाना-खाने के लिए बच्चे राह देख रहे थे।
किसी की कलाई तो किसी अंगुली कटी
तीन दिन पहले जिस हाथ पर बहन ने राखी बांधकर अपनी रक्षा का वादा लिया था, भयानक हादसे में उसी कलाई को छीन लिया। बस पलटने पर अंदर बैठी सवारियां एक-दूसरे पर गिर गईं। बस से निकलती चीखें सुनकर मौके पर पहुंचे हर किसी का दिल पसीज गया। जब तक जेसीबी ने मौके पर पहुंच कर बस की छत को नहीं उखाड़ा तब तक ग्रामीण और राहगीर हर संभव प्रयास करते रहे कि घायलों को बाहर निकाला जाए, लेकिन बस इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी कि हर कोशिश नाकामयाब रही।
फर्श पर बैठे नजर आए घायल
अस्पताल में सुविधाओं की कमी तब भी नजर आई, जब घायलों को अस्पताल में बेड ही नहीं मिले। खून से लथपथ लोग बेड की जगह नीचे फर्श पर बैठे नजर आए। न उनका उपचार करने वाला वहां कोई था और न ही किसी तीमारदार को भी अंदर जाने दिया जा रहा था।
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वहीं बस में सवार उत्तरप्रदेश के प्रयागराज निवासी संतोष, बनवारी, अजय और शंकर जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी आंखों में हादसे के खौफ का मंजर साफ दिखाई दे रहा था। हाथ जोड़कर वे सिर्फ इतना ही कह रहे थे कि साहब आज हमें कुछ हो जाता तो हमारे बच्चे और परिवार मोतियों की तरह बिखर जाते। उन्होंने बतायचा कि वे बस वाले को बार-बार कहते रहे भैया थोड़ी स्पीड कम कर लो, मगर उसके सिर पर जल्दी पहुंचाने का भूत इस कदर सवार था कि उसने हर किसी की बात को सुनते हुए भी अनसुना कर दिया। साहब थोड़ी सी जल्दबाजी न जाने कितने लोगों के लिए जिंदगी भर का गम बन गया है।
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निजी वाहनों से घायलों को पहुंचाया अस्पताल
निजी वाहनों और एंबुलेंस में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया गया। हर कोई घायलों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। एक्सीडेंट कितना बुरा था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेसीबी की सहायता से बस की छत को उखाड़ा गया, तब जाकर घायलों को बाहर निकाला जा सका। गांव जाटू लोहारी में जैसे ही एक्सीडेंट का पता चला तो हर कोई घायलों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। ग्रामीणों ने वाहनों को रुकवाकर घायलों को अस्पताल की तरफ रवाना किया। एक्सीडेंट जिस स्थान पर हुआ वहां पर जमीन पर पड़े कटे हुए हाथ एक्सीडेंट की भयावहता को दर्शा रहे थे। बस में सवारी ज्यादा होने के चलते लोग एक दूसरे के ऊपर गिर गए और जब लोगों ने घायलों को निकलना शुरू किया तो एक दूसरे के साथ जो बस में सवार थे वो उन्हें ढूूंढने में जुट गए।
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चार लोगों का बना आखिरी सफर
गुरुवार को थके हारे लोगों की बस में जब थोड़ी सी झपकी लगी थी और जब उनकी आंख खुली तो खुद को अस्पताल में भर्ती पाया। बस में सफर करने वाले चार लोगों का इस बात का थोड़ा सा भी इल्म नहीं था कि उनके लिए यह सफर आखिरी सफर होने वाला है। अगर उन्हें पता होता तो शायद वो प्राइवेट बस में सफर ही नहीं करते। अस्पताल में रोते-बिलखते परिजनों को देख हर किसी का दिल पसीज गया।
डीसी-एसपी पहुंचे तब बनाई अस्पताल में व्यवस्था
घटना की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य और एसपी अजीत सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने चिकित्सकों से जानकारी जुटाई। उसके बाद इमरजेंसी में उपचार करवा रहे घायलों से बातचीत की। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों पर हमेशा गैरमानवता का आरोप लगता रहा है। ऐसा ही मंजर वीरवार रात नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भी देखने को मिला। न घायलों के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था थी और न ही उन्हें अंदर ले जाने के लिए कोई सहारा देने वाला स्वास्थ्य कर्मी दिखाई दिया। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही पर तंज तो कसे साथ ही घायलों को अंदर पहुंचाने का काम भी उन्होंने किया। जब उपायुक्त और एसपी नागरिक अस्पताल में पहुंचे तो कुंभकर्णी नींद में सोए अधिकारियों की आंखें खुली और व्यवस्था बनाने में जुट गए।
काम से घर लौटते हैं आखिरी बस में लोग
यह बस भिवानी से हांसी जाने वाली अंतिम बस थी। अंतिम बस होने के चलते और घर पहुंचने के लिए इस बस में हर रोज भारी भीड़ रहती है। गुरुवार को भी बस में लगभग 70 लोग सवार थे। कई लोगों को बस में बैठने के लिए जगह भी नहीं मिल रही थी। किसी के हाथ में बच्चों के लिए खाने का सामान था तो किसी पास रसोई का सामान। किसी के घर में चूल्हा जलने का इंतजार हो रहा था तो किसी के घर में पापा के साथ बैठकर खाना-खाने के लिए बच्चे राह देख रहे थे।
किसी की कलाई तो किसी अंगुली कटी
तीन दिन पहले जिस हाथ पर बहन ने राखी बांधकर अपनी रक्षा का वादा लिया था, भयानक हादसे में उसी कलाई को छीन लिया। बस पलटने पर अंदर बैठी सवारियां एक-दूसरे पर गिर गईं। बस से निकलती चीखें सुनकर मौके पर पहुंचे हर किसी का दिल पसीज गया। जब तक जेसीबी ने मौके पर पहुंच कर बस की छत को नहीं उखाड़ा तब तक ग्रामीण और राहगीर हर संभव प्रयास करते रहे कि घायलों को बाहर निकाला जाए, लेकिन बस इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी कि हर कोशिश नाकामयाब रही।
फर्श पर बैठे नजर आए घायल
अस्पताल में सुविधाओं की कमी तब भी नजर आई, जब घायलों को अस्पताल में बेड ही नहीं मिले। खून से लथपथ लोग बेड की जगह नीचे फर्श पर बैठे नजर आए। न उनका उपचार करने वाला वहां कोई था और न ही किसी तीमारदार को भी अंदर जाने दिया जा रहा था।

नागरिक अस्पताल में विलाप करते परिजन।- फोटो : Bhiwani

सड़क हादसे के दौरान एक यात्री की सड़क पर कटी पड़ी हथेली।- फोटो : Hisar

हादसे के बाद पलटी बस और मौके पर मौजूद भीड़।- फोटो : Bhiwani