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Bhiwani News: बढ़ रही पीसीओडी मरीजों की संख्या
Tue, 31 Dec 2024 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 31 Dec 2024 02:09 AM IST
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भिवानी के नागरिक अस्पताल में महिला मरीजों के स्वाथ्य की जांच करतीं महिला चिकित्सक।
भिवानी। शहर के जिला नागरिक अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में पॉली सिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली और खान पान 18 से 35 आयु वर्ग की महिलाओं को पीसीओडी से प्रभावित कर शिकार बना रहा है। ये समस्या अविवाहित लड़कियों में ज्यादा देखी जा रही है।
जिला नागरिक अस्पताल में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पारूल और डॉ. रीटा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 100 से 120 महिलाएं जांच करवाने आ रहीं हैं। इनमें गर्भवती, पीसीओएस, पीसीओडी और थॉयराइड की मरीज अधिक होती हैं। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली की वजह से महिलाओं में पीसीओडी की समस्या आम होती जा रही है। ओपीडी में रोजाना पीसीओडी से प्रभावित 15 महिला मरीज पहुंच रहीं हैं। पीसीओडी की समस्या 18 से 35 आयु वर्ग की महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। अविवाहित लड़कियों में इस बीमारी के प्रति कई तरह के सवाल और भय भी रहते हैं। डॉ. पारूल ने बताया कि ये बीमारी बदलती जीवनशैली, खानपान की वजह और मानसिक तनाव से होती है।
इसमें डरने की जरूरत नहीं है। इसका इलाज संभव है। समय पर इलाज शुरू करवा कर समय से इस समस्या का निदान किया जा सकता है। पीसीओडी से प्रभावित महिलाएं दवा लेकर, नियमित योग कर और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर इस परेशानी से निजात पा सकतीं हैं। पीसीओडी का इलाज सिस्ट (गांठ) के आकार और इस समस्या से प्रभावित महिला अपनी जीवनशैली में कितना बदलाव कर पाती है आदि तथ्यों पर निर्भर करता है। अगर समस्या लंबे समय से चल रही है तो एक से दो महीने में इस समस्या का इलाज किया जा सकता है लेकिन अगर समस्या का समय से इलाज शुरू कर दिया जाए तो एक से दो सप्ताह में इलाज संभव है।
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जिला नागरिक अस्पताल में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पारूल और डॉ. रीटा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 100 से 120 महिलाएं जांच करवाने आ रहीं हैं। इनमें गर्भवती, पीसीओएस, पीसीओडी और थॉयराइड की मरीज अधिक होती हैं। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली की वजह से महिलाओं में पीसीओडी की समस्या आम होती जा रही है। ओपीडी में रोजाना पीसीओडी से प्रभावित 15 महिला मरीज पहुंच रहीं हैं। पीसीओडी की समस्या 18 से 35 आयु वर्ग की महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। अविवाहित लड़कियों में इस बीमारी के प्रति कई तरह के सवाल और भय भी रहते हैं। डॉ. पारूल ने बताया कि ये बीमारी बदलती जीवनशैली, खानपान की वजह और मानसिक तनाव से होती है।
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इसमें डरने की जरूरत नहीं है। इसका इलाज संभव है। समय पर इलाज शुरू करवा कर समय से इस समस्या का निदान किया जा सकता है। पीसीओडी से प्रभावित महिलाएं दवा लेकर, नियमित योग कर और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर इस परेशानी से निजात पा सकतीं हैं। पीसीओडी का इलाज सिस्ट (गांठ) के आकार और इस समस्या से प्रभावित महिला अपनी जीवनशैली में कितना बदलाव कर पाती है आदि तथ्यों पर निर्भर करता है। अगर समस्या लंबे समय से चल रही है तो एक से दो महीने में इस समस्या का इलाज किया जा सकता है लेकिन अगर समस्या का समय से इलाज शुरू कर दिया जाए तो एक से दो सप्ताह में इलाज संभव है।

-फोटो 54 : चंडीगढ़ नाइट रन में भाग लेते बीआरजी के धावक। स्रोत ग्रुप
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