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Bhiwani News: डिजिटल रोशनी की चकाचौंध में मंद पड़ रही आंखों की चमक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 01:23 AM IST
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The glare of digital light dimming the eyes
मरीज के आंखों की जांच करते  डॉ हरजीत सिंह।
भिवानी। मोबाइल फोन और डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता प्रयोग अब लोगों की आंखों की ज्योति को धीमे-धीमे कमजोर कर रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों में सूखापन बढ़ रहा है जिससे ड्राई आइज, एलर्जी, पानी आना और जलन जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
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शहर के पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्थित नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 250 से 300 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बुजुर्गों के साथ युवाओं और बच्चों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। बुजुर्गों में जहां नजदीक और दूर की नजर का संतुलन बिगड़ना आम है वहीं युवाओं और बच्चों में सिरदर्द, आंखों में खुजली व पानी आना जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। चिकित्सक मरीजों को दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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ये हैं कारण
युवाओं में देर रात तक अंधेरे में मोबाइल चलाने की लत आंखों की रोशनी कम कर रही है। कोरोना काल के बाद ऑनलाइन पढ़ाई ने स्कूली बच्चों को भी स्क्रीन पर निर्भर बना दिया है। वहीं ऑफिसों में लंबे समय तक कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करने वाले कर्मचारी भी आंखों में सूखापन की समस्या झेल रहे हैं। यही सूखापन आगे चलकर खुजली और पानी आने में बदल जाता है। दीपावली के बाद बढ़े प्रदूषण ने भी आंखों की परेशानी को बढ़ाया है। हालांकि जिले का एक्यूआई दिल्ली की तुलना में अधिक खराब नहीं हुआ लेकिन इसका असर लोगों की आंखों पर दिख रहा है। मंगलवार को शहर का एक्यूआई स्तर 260 दर्ज किया गया।
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ऐसे करें बचाव :
आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें। डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक प्रयोग से बचें। लैपटॉप या कंप्यूटर पर कार्य करते समय हर एक घंटे बाद ब्रेक लें। जरूरत पड़ने पर चश्मा लगाएं। धूल-मिट्टी वाले स्थान पर अधिक देर तक न रुकें और आंखों में सूखापन महसूस होने पर तुरंत उपचार कराएं।

बच्चों को न डालें फोन की लत
कई अभिभावक बच्चों को शांत कराने के लिए मोबाइल फोन थमा देते हैं जिससे बचपन से ही उनमें फोन की लत लग जाती है। यह आदत आगे चलकर उनकी आंखों को नुकसान पहुंचा रही है। बच्चों में सिरदर्द, नजर कमजोर होना और छोटी उम्र में ही चश्मा लगने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

शहर दो जगह मिल रही है आंखों की ओपीडी की सुविधा :
शहर में आंखों के मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए दो राजकीय अस्पतालों में विशेष ओपीडी चलाई जा रही है। इनमें राजकीय जालान आंख अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 400 मरीज पहुंचते हैं जबकि पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज उपचार के लिए आते हैं।



मोबाइल फोन का अधिक प्रयोग करने से बचें। बिना कार्य के रील्स स्क्रोल करने की आदत छोड़ें। अगर आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी महसूस हो तो तुरंत नजदीकी नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। अपनी मर्जी से आंखों में दवा या घरेलू नुस्खे का प्रयोग न करें। - डॉ. हरजीत सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज भिवानी
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