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हमारी बिल्डिंग से महज कुछ दूरी पर क्रैश हुआ था फ्लाइट, ताउम्र याद रहेगा हादसा : सुमित
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सुमित के बहल पहुंचने पर खुशी से पुचकारते हुए पिता अनूप व माता मुकेश। संवाद
- फोटो : Bhiwani
रुपेश मित्तल
बहल (भिवानी)। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गया बहल का विद्यार्थी सुमित कुमार सोमवार को घर आ गया। सुमित ने जब आपबीती सुनाई तो सबके रोंगटे खड़े हो गए। सुमित ने बताया कि 26 फरवरी के दिन का वह मंजर हमेशा याद रहेगा, जब हमारी बिल्डिंग से महज कुछ दूरी पर फ्लाइट क्रैश हुआ था। जिंदगी बचेगी या नहीं, इस बात की कोई गारंटी नहीं थी।
यूक्रेन से लौटकर आए सुमित ने बताया कि फ्लाइट क्रैश होने बाद जान बचाने का एक ही रास्ता था कि किसी बंकर में चले जाएं। डर के मारे कंपकंपाते हुए एक बंकर में भूखे, प्यासे करीब 5 घंटे बिताए। पता चला कि रोमानिया बॉर्डर के लिए एक बस आई है तो किसी तरह से फिर बिल्डिंग में पहुंचे और जल्दी में सामान पैक कर बस से बॉर्डर के लिए निकल लिए तो कुछ राहत मिली।
यहां भी एक एक सांस गिन गिन कर आ रही थी। यूक्रेन के इवानो शहर से करीब 400 किमी दूर तक बस का सफर किया और फिर करीब 15 किमी पैदल चलकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। यहां भी लगातार हो रही फायरिंग के बीच करीब 19 घंटे भय के माहौल में बिताए। बॉर्डर पर जितनी देर रुके, इस दौरान करीब 15 बार फायरिंग हुई और हर बार यह लग रहा था कि पता नहीं जिंदगी बचेगी भी या नहीं। आखिर बॉर्डर क्रॉस के दौरान इमिग्रेशन और जरूरी चेकिंग के बाद उनको रोमानिया एयरपोर्ट के लिए बस मिली। करीब 500 किमी की दूरी के बाद जब वे रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट पहुंचे तो यह लगा कि फिर से जीवनदान मिल गया है। 27 फरवरी की रात को करीब 12:30 बजे दिल्ली के लिए फ्लाइट मिली और दिल्ली आने के बाद सोमवार सुबह करीब 9 बजे बहल घर पहुंचे। बहल के सुमित कुमार खुडानिया ने जब वहां का वाकया बताया तो पिता अनूप कुमार, माता मुकेश, भाई बालकिशन की आंखों में खुशी की चमक थी कि किन विषम परिस्थितियों में उनका अपना सुरक्षित घर आ गया है।
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एकता भी पहुंची घर
सुमित ने बताया कि वह वर्ष 2019 से यूक्रेन के इवानो में फ्रेंक इव्सक शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। सुमित के अलावा ओबरा की एकता श्योराण भी घर पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा ढाबड़ी के रवि, भादरा के विनीत श्योराण, हिसार के विकास के अलावा राजगढ़ शहर के विद्यार्थी भी बॉर्डर क्रॉस कर चुके हैं।
बॉर्डर के पास वाले यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी को निकाला जा रहा है पहले
सुमित ने बताया कि यूक्रेन में यूक्रेनियन को पहले निकाला जा रहा है। यूक्रेन के अलावा दूसरे देशों से आए उन्हीं विद्यार्थियों को पहले निकाला जा रहा है जो बॉर्डर के साथ लगता है। अब तक केवल दो या तीन यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को ही पहले निकाला गया है। अब भी भारत के करीब 15000 से ज्यादा विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। सुमित ने बताया कि केवल महिलाओं और बच्चों को ही वहां से निकालने में प्राथमिकता दी जा रही है। यूक्रेन वासी यह चाहते हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो, लेकिन युद्ध की विभीषिका को नहीं झेलना चाहते हैं। (संवाद)
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बहल (भिवानी)। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गया बहल का विद्यार्थी सुमित कुमार सोमवार को घर आ गया। सुमित ने जब आपबीती सुनाई तो सबके रोंगटे खड़े हो गए। सुमित ने बताया कि 26 फरवरी के दिन का वह मंजर हमेशा याद रहेगा, जब हमारी बिल्डिंग से महज कुछ दूरी पर फ्लाइट क्रैश हुआ था। जिंदगी बचेगी या नहीं, इस बात की कोई गारंटी नहीं थी।
यूक्रेन से लौटकर आए सुमित ने बताया कि फ्लाइट क्रैश होने बाद जान बचाने का एक ही रास्ता था कि किसी बंकर में चले जाएं। डर के मारे कंपकंपाते हुए एक बंकर में भूखे, प्यासे करीब 5 घंटे बिताए। पता चला कि रोमानिया बॉर्डर के लिए एक बस आई है तो किसी तरह से फिर बिल्डिंग में पहुंचे और जल्दी में सामान पैक कर बस से बॉर्डर के लिए निकल लिए तो कुछ राहत मिली।
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यहां भी एक एक सांस गिन गिन कर आ रही थी। यूक्रेन के इवानो शहर से करीब 400 किमी दूर तक बस का सफर किया और फिर करीब 15 किमी पैदल चलकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। यहां भी लगातार हो रही फायरिंग के बीच करीब 19 घंटे भय के माहौल में बिताए। बॉर्डर पर जितनी देर रुके, इस दौरान करीब 15 बार फायरिंग हुई और हर बार यह लग रहा था कि पता नहीं जिंदगी बचेगी भी या नहीं। आखिर बॉर्डर क्रॉस के दौरान इमिग्रेशन और जरूरी चेकिंग के बाद उनको रोमानिया एयरपोर्ट के लिए बस मिली। करीब 500 किमी की दूरी के बाद जब वे रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट पहुंचे तो यह लगा कि फिर से जीवनदान मिल गया है। 27 फरवरी की रात को करीब 12:30 बजे दिल्ली के लिए फ्लाइट मिली और दिल्ली आने के बाद सोमवार सुबह करीब 9 बजे बहल घर पहुंचे। बहल के सुमित कुमार खुडानिया ने जब वहां का वाकया बताया तो पिता अनूप कुमार, माता मुकेश, भाई बालकिशन की आंखों में खुशी की चमक थी कि किन विषम परिस्थितियों में उनका अपना सुरक्षित घर आ गया है।
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एकता भी पहुंची घर
सुमित ने बताया कि वह वर्ष 2019 से यूक्रेन के इवानो में फ्रेंक इव्सक शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। सुमित के अलावा ओबरा की एकता श्योराण भी घर पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा ढाबड़ी के रवि, भादरा के विनीत श्योराण, हिसार के विकास के अलावा राजगढ़ शहर के विद्यार्थी भी बॉर्डर क्रॉस कर चुके हैं।
बॉर्डर के पास वाले यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी को निकाला जा रहा है पहले
सुमित ने बताया कि यूक्रेन में यूक्रेनियन को पहले निकाला जा रहा है। यूक्रेन के अलावा दूसरे देशों से आए उन्हीं विद्यार्थियों को पहले निकाला जा रहा है जो बॉर्डर के साथ लगता है। अब तक केवल दो या तीन यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को ही पहले निकाला गया है। अब भी भारत के करीब 15000 से ज्यादा विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। सुमित ने बताया कि केवल महिलाओं और बच्चों को ही वहां से निकालने में प्राथमिकता दी जा रही है। यूक्रेन वासी यह चाहते हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो, लेकिन युद्ध की विभीषिका को नहीं झेलना चाहते हैं। (संवाद)