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Bhiwani News: केंद्रीय टीम ने गांवों में परखे फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्र
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भिवानी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की टीम ने जिले के विभिन्न गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत अनुदान पर खरीदे गए कृषि यंत्रों के उपयोग का जायजा लिया। टीम ने किसानों से मशीनों की खरीद, उपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों की जानकारी लेकर योजना के क्रियान्वयन का आकलन किया।
टीम में केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, बुदनी (भोपाल) के कृषि अभियंता आशीष पटेल और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भोपाल के कृषि अभियंता तरुण कुमार शामिल रहे। सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ भी मौजूद रहे। टीम ने प्रेमनगर, तिगड़ाना, तालू, मुंढाल, पुर, जमालपुर, पपोसा, बोहल, रोहनात, बवानीखेड़ा, लोहारू, कैरू, दुल्हेड़ी, सरल, मिरान और बीरन सहित विभिन्न गांवों का दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान टीम ने किसानों से मशीनों की संख्या, खरीद, प्रति एकड़ उपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपनाए जा रहे तरीकों के बारे में जानकारी ली। मौके पर पाया गया कि किसान फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए सुपर सीडर का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं कुछ किसान ट्रैक्टर-चालित बेलर से फसल अवशेषों की गांठें बनाकर उनका उचित प्रबंधन कर रहे हैं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि सर्वेक्षण का उद्देश्य अनुदान पर उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों के वास्तविक उपयोग का आकलन करना और किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी जुटाना है।
किसानों से की अवशेष न जलाने की अपील
डॉ. राजेश सिहाग ने किसानों से फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से बचने और उपलब्ध कृषि यंत्रों की मदद से उनका उचित प्रबंधन करने का आग्रह किया। इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं के तहत मिले कृषि यंत्रों का अधिकाधिक उपयोग करने और फसल अवशेष जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने की अपील की ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
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टीम में केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, बुदनी (भोपाल) के कृषि अभियंता आशीष पटेल और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भोपाल के कृषि अभियंता तरुण कुमार शामिल रहे। सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ भी मौजूद रहे। टीम ने प्रेमनगर, तिगड़ाना, तालू, मुंढाल, पुर, जमालपुर, पपोसा, बोहल, रोहनात, बवानीखेड़ा, लोहारू, कैरू, दुल्हेड़ी, सरल, मिरान और बीरन सहित विभिन्न गांवों का दौरा किया।
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निरीक्षण के दौरान टीम ने किसानों से मशीनों की संख्या, खरीद, प्रति एकड़ उपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपनाए जा रहे तरीकों के बारे में जानकारी ली। मौके पर पाया गया कि किसान फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए सुपर सीडर का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं कुछ किसान ट्रैक्टर-चालित बेलर से फसल अवशेषों की गांठें बनाकर उनका उचित प्रबंधन कर रहे हैं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि सर्वेक्षण का उद्देश्य अनुदान पर उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों के वास्तविक उपयोग का आकलन करना और किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी जुटाना है।
किसानों से की अवशेष न जलाने की अपील
डॉ. राजेश सिहाग ने किसानों से फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से बचने और उपलब्ध कृषि यंत्रों की मदद से उनका उचित प्रबंधन करने का आग्रह किया। इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं के तहत मिले कृषि यंत्रों का अधिकाधिक उपयोग करने और फसल अवशेष जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने की अपील की ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।