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Bhiwani News: फिर चहकेगी चिड़िया, टॉवर पर बनेंगे सैकड़ों कृत्रिम घरौंदे
Mon, 20 Mar 2023 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 20 Mar 2023 12:51 AM IST
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वन्य प्राणी विभाग के कैरू स्थित चिंकरा प्रजनन केंद्र में बनाया गया बर्ड टॉवर।
भिवानी। अब चिड़ियाघर वास्तव में चिड़िया बचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाएगा। इसके तहत भिवानी जिले में पांच बर्ड टॉवर लगवाए जाएंगे। जिनमें चिड़िया के लिए सैकड़ों घरौंदे (कृत्रिम आवास) होंगे। जहां चिड़िया की पूरी कॉलोनी ही बसाई जा सकेगी। इतना ही नहीं पक्षियों के दाना-पानी के लिए चार प्लेटफार्म भी बनाए जाएंगे। इसके लिए वन्य प्राणी विभाग ने ग्राम पंचायतों से भी पंचायती भूमि और गोशालाओं के अलावा किसी भी ऐसी जगह पर टॉवर लगवाने के लिए सुझाव मांगे हैं, जहां इन पक्षियों को आसानी से रहने और दाना-पानी का इंतजाम हो सके।
ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते शहरी दायरे और प्रदूषण की वजह से गौरैया के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। यही वजह है कि उसकी प्रजाति भी अब विलुप्ति के कगार पर है। हालांकि गौरैया बदलते परिवेश में भी काफी हद तक खुद को ढाल रही है, लेकिन फिर भी लगातार पर्यावरण में बदलाव आ रहा है। जिससे बढ़ रहे तापमान में छोटी चिड़िया के प्राकृतिक आवास नहीं होने पर उसकी प्रजाति की संख्या पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि कुछ संगठन भी गौरैया बचाने के अथक प्रयासों में जुटे हैं, लेकिन अब वन्य प्राणी विभाग भी चिड़ियाघरों में चिड़िया के वजूद को बचाने के लिए सार्थक कदम उठा रहा है।
कैरू चिंकारा प्रजनन केंद्र परिसर में लगाए बर्ड टॉवर
वन्य प्राणी विभाग के कैरू स्थित चिंकारा प्रजनन केंद्र में विभाग ने अपने खर्च पर बर्ड टॉवर लगाए हैं। करीब 25 फुट ऊंचाई तक के इन टॉवरों में करीब 500 पक्षियों के लिए कृत्रिम आवास बने हैं। जिसमें गौरैया की विभिन्न प्रजातियों के लिए भी कृत्रिम आवास बने हैं। कैरू की बणी में हालांकि गौरैया के लिए काफी प्राकृतिक आवास भी बने हैं, लेकिन ये आवास अब खत्म होते जा रहे हैं। इसका असर गौरैया की प्रजाति पर भी पड़ रहा है। उसे बचाने के लिए इस तरह के कदम बहुत जरूरी हो गए हैं।
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कालुवास और पालुवास में बने बर्ड प्लेटफार्म
गांव कालुवास और पालुवास में वन्य प्राणी विभाग ने बर्ड प्लेटफार्म बनाए हैं। एक प्लेटफार्म पर करीब 24 हजार रुपये का खर्च आया है। वहीं बर्ड टॉवर पर करीब ढाई लाख रुपये तक का खर्च आएगा। इसके अलावा इस साल चार बर्ड प्लेटफार्म और बनाए जाएंगे। जिसकी जगह का चयन अभी विभाग द्वारा किया जाएगा। इसी तरह बर्ड टॉवर भी पांच लगाए जाएंगे। ये टॉवर ग्राम पंचायतों के अनुरोध या फिर किसी सामाजिक संस्था के अनुरोध पर गोशाला या फिर अन्य सुलभ जगह पर लगाए जाएंगे। जिसका खर्च वन्य प्राणी विभाग खुद उठाएगा।
हर घर में हो चिड़ियों का छोटा सा घरौंदा
कुछ सामाजिक संस्थाएं घरों में दीवारों पर गौरैया के लिए छोटे घोंसले यात्री कृत्रिम घरौंदे भी तैयार कराकर लोगों में बांट रही है। ताकि वे अपने घरों में चिड़ियों का छोटा सा घरौंदा बसा सकें। घरों से चिड़ियों की चहचहाहट बनाए रखने का ये सराहनीय प्रयास है।
वन्य प्राणी विभाग की ओर से जिले में पांच वर्ड टॉवर की डिमांड भेजी है, जबकि चार बर्ड प्लेटफार्म भी बनाए जाएंगे। कैरू चिंकारा प्रजनन केंद्र में पहले से ही बर्ड टॉवर लगा है। इसमें गौरैया व अन्य पक्षियों की प्रजातियों को कृत्रिम आवास मुहैया कराया जा रहा है। इसी तरह प्लेटफार्म बनाकर पक्षियों के लिए दाना-पानी का प्रबंध भी करा रहे हैं। इसमें ग्राम पंचायत व अन्य संस्थानों की जगहों पर भी टॉवर लगाने के लिए जगह चिह्नित की जाएंगी। जिसका खर्च विभाग खुद उठाएगा।
-परमजीत सिंह, इंचार्ज चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल लघु चिड़ियाघर भिवानी।
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ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते शहरी दायरे और प्रदूषण की वजह से गौरैया के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। यही वजह है कि उसकी प्रजाति भी अब विलुप्ति के कगार पर है। हालांकि गौरैया बदलते परिवेश में भी काफी हद तक खुद को ढाल रही है, लेकिन फिर भी लगातार पर्यावरण में बदलाव आ रहा है। जिससे बढ़ रहे तापमान में छोटी चिड़िया के प्राकृतिक आवास नहीं होने पर उसकी प्रजाति की संख्या पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि कुछ संगठन भी गौरैया बचाने के अथक प्रयासों में जुटे हैं, लेकिन अब वन्य प्राणी विभाग भी चिड़ियाघरों में चिड़िया के वजूद को बचाने के लिए सार्थक कदम उठा रहा है।
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कैरू चिंकारा प्रजनन केंद्र परिसर में लगाए बर्ड टॉवर
वन्य प्राणी विभाग के कैरू स्थित चिंकारा प्रजनन केंद्र में विभाग ने अपने खर्च पर बर्ड टॉवर लगाए हैं। करीब 25 फुट ऊंचाई तक के इन टॉवरों में करीब 500 पक्षियों के लिए कृत्रिम आवास बने हैं। जिसमें गौरैया की विभिन्न प्रजातियों के लिए भी कृत्रिम आवास बने हैं। कैरू की बणी में हालांकि गौरैया के लिए काफी प्राकृतिक आवास भी बने हैं, लेकिन ये आवास अब खत्म होते जा रहे हैं। इसका असर गौरैया की प्रजाति पर भी पड़ रहा है। उसे बचाने के लिए इस तरह के कदम बहुत जरूरी हो गए हैं।
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कालुवास और पालुवास में बने बर्ड प्लेटफार्म
गांव कालुवास और पालुवास में वन्य प्राणी विभाग ने बर्ड प्लेटफार्म बनाए हैं। एक प्लेटफार्म पर करीब 24 हजार रुपये का खर्च आया है। वहीं बर्ड टॉवर पर करीब ढाई लाख रुपये तक का खर्च आएगा। इसके अलावा इस साल चार बर्ड प्लेटफार्म और बनाए जाएंगे। जिसकी जगह का चयन अभी विभाग द्वारा किया जाएगा। इसी तरह बर्ड टॉवर भी पांच लगाए जाएंगे। ये टॉवर ग्राम पंचायतों के अनुरोध या फिर किसी सामाजिक संस्था के अनुरोध पर गोशाला या फिर अन्य सुलभ जगह पर लगाए जाएंगे। जिसका खर्च वन्य प्राणी विभाग खुद उठाएगा।
हर घर में हो चिड़ियों का छोटा सा घरौंदा
कुछ सामाजिक संस्थाएं घरों में दीवारों पर गौरैया के लिए छोटे घोंसले यात्री कृत्रिम घरौंदे भी तैयार कराकर लोगों में बांट रही है। ताकि वे अपने घरों में चिड़ियों का छोटा सा घरौंदा बसा सकें। घरों से चिड़ियों की चहचहाहट बनाए रखने का ये सराहनीय प्रयास है।
वन्य प्राणी विभाग की ओर से जिले में पांच वर्ड टॉवर की डिमांड भेजी है, जबकि चार बर्ड प्लेटफार्म भी बनाए जाएंगे। कैरू चिंकारा प्रजनन केंद्र में पहले से ही बर्ड टॉवर लगा है। इसमें गौरैया व अन्य पक्षियों की प्रजातियों को कृत्रिम आवास मुहैया कराया जा रहा है। इसी तरह प्लेटफार्म बनाकर पक्षियों के लिए दाना-पानी का प्रबंध भी करा रहे हैं। इसमें ग्राम पंचायत व अन्य संस्थानों की जगहों पर भी टॉवर लगाने के लिए जगह चिह्नित की जाएंगी। जिसका खर्च विभाग खुद उठाएगा।
-परमजीत सिंह, इंचार्ज चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल लघु चिड़ियाघर भिवानी।