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Bhiwani News: सांग में लीलो-चमन के अमर प्रेम पर झूमे दर्शक

Thu, 22 Jan 2026 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 22 Jan 2026 01:10 AM IST
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The audience danced to the eternal love of Lilo-Chaman in the song
गांव बापोड़ा में सांग का मंचन करते कलाकार।  - फोटो : 1
भिवानी। गांव बापोड़ा में आयोजित सात दिवसीय पंडित लख्मी चंद जयंती महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को सांग विधा के मंचन में लीलो-चमन के अमर प्रेम की कथा ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सुप्रसिद्ध सांगी कुलदीप उमरा और उनकी मंडली ने राय धनपत द्वारा रचित ऐतिहासिक सांग लीलो-चमन का प्रभावशाली मंचन किया, जिसे देखकर दर्शक लोक धुनों पर झूमते नजर आए।
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आयोजन समिति सदस्य विनोद प्रधान और मुकेश बापोड़ा ने बताया कि सांग के माध्यम से लाहौर के एक कॉलेज में पढ़ने वाली संपन्न परिवार की लीलो और साधारण परिवार के चमन के बीच पनपे प्रेम संबंधों की कहानी को जीवंत किया गया। कहानी में दर्शाया गया कि चमन अपनी गरीबी को लेकर आशंकित रहता है, लेकिन लीलो उसका हौसला बढ़ाते हुए कहती है कि जब तक वह उसके साथ है, उसे किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं, बस उसे नेक और ईमानदार बने रहना है।
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कथा में मोड़ तब आता है जब फीस न भर पाने के कारण चमन कॉलेज जाना बंद कर देता है। गरीबी इतनी हावी हो जाती है कि चमन के पिता बेटे की पढ़ाई रुकने के दुख में चोरी करने निकल पड़ते हैं। पकड़े जाने पर पिता को बचाने के लिए चमन खुद पर चोरी का आरोप ले लेता है। इसके बाद पूरे लाहौर में चमन के चोर होने की खबर फैल जाती है, जिससे लीलो को गहरा आघात पहुंचता है। इसके बाद कहानी कई रोमांचक उतार-चढ़ावों से गुजरती है, जिसे कलाकारों ने संवादों और रागनियों के माध्यम से बखूबी प्रस्तुत किया। चमन और लीलो के अलगाव व पुनर्मिलन के दृश्यों पर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत की गई रागनियां— साचम साच बता लीलो के खुशी मना री है, के बुझेगा चमन आज मेरे ब्यहा की तैयरी से और आज ते पीछे चमन मन मत कायल करिये, बोलना बतलावन की टाल करिये—ने माहौल को संगीतमय बना दिया। इन लोक गीतों के माध्यम से कलाकारों ने समाज को नेक और ईमानदार रहने का संदेश भी दिया। सांस्कृतिक संध्या में मुख्य रूप से जयप्रकाश थानेदार धारेडू और विनोद कुमार जेई मौजूद रहे।
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