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नई शिक्षा नीति का लक्ष्य विद्यार्थियों को साक्षर नहीं, शिक्षित और संस्कारयुक्त बनाना : डॉ. पवन कुमार

Tue, 06 Jan 2026 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Tue, 06 Jan 2026 01:27 AM IST
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The aim of the new education policy is not to make students literate, but to make them educated and cultured: Dr. Pawan Kumar
आकाशवाणी के हरियाणवी लोक मंच कार्यक्रम में बोर्ड अध्यक्ष ने शिक्षा नीति और परीक्षा प्रबंधों पर रखे विचार
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भिवानी। नई शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल साक्षर बनाना नहीं बल्कि उन्हें शिक्षित, संस्कारयुक्त और रोजगारपरक कौशल से युक्त बनाना है। यह बात हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने आकाशवाणी हिसार द्वारा सोमवार को प्रसारित लोकप्रिय कार्यक्रम हरियाणवी लोक मंच में विशेष चर्चा के दौरान कही।
डॉ. पवन कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक कौशल पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि नीति के तहत कक्षा तीसरी तक मातृभाषा में शिक्षा देने का प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि बच्चा अपने परिवेश और ज्ञान को सहज रूप से समझ सके और उसे बेहतर ढंग से आत्मसात कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि साक्षर होने और शिक्षित होने में बड़ा अंतर है। शिक्षा वही है जो व्यक्ति को सोचने, समस्याओं का विश्लेषण करने और समाज के लिए उपयोगी बनने में सक्षम बनाए। डॉ. पवन कुमार ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र निर्माण और जीवन कौशल का विकास होना चाहिए।
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आगामी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने को लेकर बोर्ड अध्यक्ष ने कड़े प्रबंधों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य कर दिए गए हैं और जिन स्कूलों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी उन्हें परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों की बाउंड्री वॉल कम से कम छह फीट ऊंची होना भी अनिवार्य किया गया है।
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डॉ. पवन कुमार ने बताया कि जीरो टालरेंस नीति के तहत नकल में संलिप्त पाए जाने वाले छात्रों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले स्टाफ के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को ईमानदारी और अनुशासन के लिए प्रेरित करें ताकि विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हों।

बोर्ड की कार्यप्रणाली में किए गए सुधारों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पवन कुमार ने कहा कि अब मार्कशीट या प्रमाणपत्रों में नाम, पिता का नाम, फोटो या हस्ताक्षर से संबंधित लिपिकीय त्रुटियों को ठीक करवाने की प्रक्रिया बेहद सरल कर दी गई है। पहले इसके लिए छात्रों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर बोर्ड स्तर पर ही सुलभ बना दी गई है। उन्होंने बताया कि छात्र बोर्ड की वेबसाइट और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर घर बैठे ही आवश्यक जानकारी और सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत हो रही है।
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