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Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Teacher on the street, 850 are private schools close

शिक्षक सड़क पर, 850 निजी स्कूल रहे बंद

Thu, 29 Oct 2015 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी Updated Thu, 29 Oct 2015 12:29 AM IST
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भिवानी। स्कूल बसों में हाई क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे लगाने, नियम 134ए के तहत 10 प्रतिशत की बजाए 25 प्रतिशत बच्चों को फ्री शिक्षा देने, स्कूली मान्यता के कड़े नियमों के विरोध में जिले के करीब 850 निजी स्कूलों पर बुधवार को ताला लटका रहा। स्कूल संचालकों व शिक्षकों ने सड़क  पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार को चेतावनी दी कि उनकी मांगे नहीं मानी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत निजी स्कूलों को दिए नए निर्देशों के विरोध में निजी स्कूल संचालकों ने हड़ताल की।
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सभी निजी स्कूल संचालक अपने स्कूलों को ताला जड़ विरोध पर उतरे। सबसे पहले केएम स्कूल में बैठक आयोजित कर संचालकों ने आगे की रणनीति तय की। यहां बैठक के बाद सभी ने प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला और हांसी गेट, पुराना बस स्टैंड, चिडिय़ाघर मोड़ होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां रोष प्रदर्शन के बाद उपायुक्त को सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि निजी स्कूल संचालकों व शिक्षकों को कमजोर न समझे। उनकी मांग नहीं मानी गई तो कड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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निजी स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा व प्रदेश महासचिव रामअवतार शर्मा ने कहा कि भाजपा नेताओं ने आश्वासन दिया था कि सरकार आते उनकी समस्याओं का हल किया जाएगा। घोषणा पत्र में भी समस्याओं को खत्म करने का वादा किया गया। अब सरकार बने एक साल हो गया। प्राइवेट स्कूलों की समस्याएं दूर करना तो दूर समस्याएं बढ़ती जा रही है। कांग्रेस के समय नियम 134 ए का 10 प्रतिशत कोटा किया था, लेकिन सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए इसे 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया। सरकार गरीब जनता को गुमराह कर रही है कि प्राइवेट स्कूल गरीबों को पढ़ाना नहीं चाहते। जबकि सच्चाई अलग है। उन्होंने मांग की कि गरीब परिवारों के बच्चों का पैसा 1500 रूपये मासिक प्रति विद्यार्थी बच्चों के खाते में आए। यूनियन नेताओं ने कहा कि टैक्स, सीसीटीवी कैमरों जैसी शर्तों, मान्यता नियमों के कारण ही शिक्षा महंगी हो रही है।
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ये भी है मांग
हाईकोर्ट ने बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए है मगर अधिकारी पांच हजार वाले कैमरों की बजाए 80 हजार वाले कैमरे लगाने पर जोर दे रहे हैं। महंगे कैमरे न लगाने की शर्त पर उनकी स्कूल बसों की पासिंग नहीं की जा रही। प्राइवेट स्कूलों पर पानी व बिजली के कमर्शियल रेट लिए जा रहे हैं। कमर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूला जा रहा है। मान्यता के नाम पर ऐसे नियम बना दिए गए हैं जिससे लाखों खर्च करने पर भी स्कूल मान्यता नहीं ले पा रहे।

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