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लापरवाही बढ़ा रही टीबी, हर रोज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं 80 मरीज
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जिला क्षय रोग केंद्र। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : Bhiwani
टीबी मरीजों की लापरवाही दिन-ब दिन नए टीबी मरीज पैदा कर रही है। हालात ये हैं कि औसतन हर रोज 80 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। लापरवाही ये कि समय पर जांच नहीं करवाई जाती है और बीमारी का पता नं होने के कारण टीबी मरीज अपने थूक से अनेक लोगों में टीबी की बीमारी बांट चुका होता है। फिलहाल 1205 मरीज सामान्य अस्पताल से तो बाकी मरीज अन्य अस्पतालों से इलाज ले रहे है। टीबी मरीजों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों में इलाज लेने वाले मरीजों को भी एक्स-रे और सीबीनीट की जांच नि:शुल्क दी जा रही है।
जिला सामान्य अस्पताल के क्षय रोग विभाग में वर्ष 2019 से 1205 मरीज टीबी का उपचार करवा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है टीबी पीड़ितों में ज्यादातर ऐसे गंभीर केस सामने आ रहे हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें टीबी है। ज्यादातर बुखार, खांसी, शूगर के मरीज सामान्य ओपीडी में चेकअप के लिए आते हैं। चिकित्सक चेकअप के दौरान उनमें टीबी के लक्षण होने पर टीबी विभाग में जांच के लिए भेजते हैं। जांच के बाद उन्हें टीबी का पता लगता है।
जिला सामान्य अस्पताल के टीबी विभाग में रोजाना 80 मरीज चेकअप के लिए आते हैं। वर्ष 2019 में जिला सामान्य अस्पताल के क्षयरोग विभाग द्वारा 14,546 मरीजों के सैंपल लिए गए जिनमें से 1205 मरीज टीबी पॉजिटिव पाए। अभी 1205 मरीज जिला सामान्य अस्पताल से टीबी का उपचार करवा रहे हैं। ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैट युक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो भी टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता हैं।
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पहले जांच के लिए लगाने पड़ते थे पीजीआई के चक्कर
जिला सामान्य अस्पताल में टीबी ग्रस्त मरीजों के एक्स-रे, सीबीनीट टेस्ट, बलगम जांच नि:शुल्क की जाती है। इससे पहले मरीजों को पीजीआई रोहतक जाना पड़ता था। जिले भर में टीबी की जांच के 13 केंद्र है। जिला सामान्य अस्पताल में एक्स-रे, सीबीनीट टेस्ट उन मरीजों के भी फ्री में किए जाते हैं जो प्राइवेट अस्पताल में उपचार करवा रहे है। ये टेस्ट बाहर प्राइवेट लैब में करीब तीन हजार रुपये में किए जाते है। टीबी पीड़ितों को गंभीर हालत होने पर एमडीआर की दवाई दी जाती है।
थूक से निकलते हैं विषाणु, मिट्टी में दबाना जरूरी : टीबी मरीज के थूक से विषाणु निकलते हैं जो सांस के साथ अन्य लोगों के शरीर में प्रवेश करते हैं। इस पर रोकथाम के लिए जरूरत है कि टीबी मरीज अपने मुंह पर कपड़ा या रूमाल रखे। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में न थूके। जहां थूके उस पर मिट्टी डाल दे ताकि विषाणु न फैल सके।
टीबी (क्षय रोग) के लक्षण-
1. लगातार तीन हफ्तों से खांसी का आना।
2. खांसी के साथ खून आना।
3. अचानक बुखार का आना व ठंड लगना।
4. वजन का कम होना व ज्यादा थकान महसूस होना।
5. छाती में दर्द और सांस का फूलना।
जिले भर में सार्वजनिक और निजी सेक्टर से टीबी के पॉजिटिव पाए गए मरीज
वर्ष सार्वजनिक सेक्टर निजी सेक्टर
2013 1954 428
2014 1917 924
2015 2272 586
2016 2386 658
2017 2185 861
2018 2620 862
2019 2157 920
नोट: यह आंकड़े टीबी विभाग द्वारा प्राप्त हैं।
जिले भर में टीबी ग्रस्त मरीजों को समय समय पर टीबी की जांच कर उन्हें जागरूक किया जाता है। स्कूल, कॉलेज व अन्य जगहों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे है। लोगों को सात दिन से ज्यादा खांसी होने पर उन्हें टीबी की जांच की सलाह भी दी जाती है। जिला सामान्य अस्पताल में करीब 1205 टीबी के मरीज उपचार ले रहे है। टीबी रोग का उपचार जितना जल्दी शुरू होगा उतनी जल्दी ही रोग से निदान मिलेगा।
- डॉ. सुमन विश्वकर्मा, डिप्टी सीएमओ, सिविल अस्पताल, भिवानी
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जिला सामान्य अस्पताल के क्षय रोग विभाग में वर्ष 2019 से 1205 मरीज टीबी का उपचार करवा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है टीबी पीड़ितों में ज्यादातर ऐसे गंभीर केस सामने आ रहे हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें टीबी है। ज्यादातर बुखार, खांसी, शूगर के मरीज सामान्य ओपीडी में चेकअप के लिए आते हैं। चिकित्सक चेकअप के दौरान उनमें टीबी के लक्षण होने पर टीबी विभाग में जांच के लिए भेजते हैं। जांच के बाद उन्हें टीबी का पता लगता है।
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जिला सामान्य अस्पताल के टीबी विभाग में रोजाना 80 मरीज चेकअप के लिए आते हैं। वर्ष 2019 में जिला सामान्य अस्पताल के क्षयरोग विभाग द्वारा 14,546 मरीजों के सैंपल लिए गए जिनमें से 1205 मरीज टीबी पॉजिटिव पाए। अभी 1205 मरीज जिला सामान्य अस्पताल से टीबी का उपचार करवा रहे हैं। ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैट युक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो भी टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता हैं।
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पहले जांच के लिए लगाने पड़ते थे पीजीआई के चक्कर
जिला सामान्य अस्पताल में टीबी ग्रस्त मरीजों के एक्स-रे, सीबीनीट टेस्ट, बलगम जांच नि:शुल्क की जाती है। इससे पहले मरीजों को पीजीआई रोहतक जाना पड़ता था। जिले भर में टीबी की जांच के 13 केंद्र है। जिला सामान्य अस्पताल में एक्स-रे, सीबीनीट टेस्ट उन मरीजों के भी फ्री में किए जाते हैं जो प्राइवेट अस्पताल में उपचार करवा रहे है। ये टेस्ट बाहर प्राइवेट लैब में करीब तीन हजार रुपये में किए जाते है। टीबी पीड़ितों को गंभीर हालत होने पर एमडीआर की दवाई दी जाती है।
थूक से निकलते हैं विषाणु, मिट्टी में दबाना जरूरी : टीबी मरीज के थूक से विषाणु निकलते हैं जो सांस के साथ अन्य लोगों के शरीर में प्रवेश करते हैं। इस पर रोकथाम के लिए जरूरत है कि टीबी मरीज अपने मुंह पर कपड़ा या रूमाल रखे। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में न थूके। जहां थूके उस पर मिट्टी डाल दे ताकि विषाणु न फैल सके।
टीबी (क्षय रोग) के लक्षण-
1. लगातार तीन हफ्तों से खांसी का आना।
2. खांसी के साथ खून आना।
3. अचानक बुखार का आना व ठंड लगना।
4. वजन का कम होना व ज्यादा थकान महसूस होना।
5. छाती में दर्द और सांस का फूलना।
जिले भर में सार्वजनिक और निजी सेक्टर से टीबी के पॉजिटिव पाए गए मरीज
वर्ष सार्वजनिक सेक्टर निजी सेक्टर
2013 1954 428
2014 1917 924
2015 2272 586
2016 2386 658
2017 2185 861
2018 2620 862
2019 2157 920
नोट: यह आंकड़े टीबी विभाग द्वारा प्राप्त हैं।
जिले भर में टीबी ग्रस्त मरीजों को समय समय पर टीबी की जांच कर उन्हें जागरूक किया जाता है। स्कूल, कॉलेज व अन्य जगहों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे है। लोगों को सात दिन से ज्यादा खांसी होने पर उन्हें टीबी की जांच की सलाह भी दी जाती है। जिला सामान्य अस्पताल में करीब 1205 टीबी के मरीज उपचार ले रहे है। टीबी रोग का उपचार जितना जल्दी शुरू होगा उतनी जल्दी ही रोग से निदान मिलेगा।
- डॉ. सुमन विश्वकर्मा, डिप्टी सीएमओ, सिविल अस्पताल, भिवानी