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Bhiwani News: गोशाला में गायों की सेवा कर पुण्य कमाने के साथ ले रहे सेहत का लाभ
Mon, 29 May 2023 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 29 May 2023 01:03 AM IST
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अलख गोशाला में गायों के लिए दलिया तैयार कर खिलाने ले जाते स्वयंसेवक।
बहल (भिवानी)। श्री अलख गोशाला में कर्मचारियों की कमी से जब व्यवस्था बिगड़ती दिखी तो बहल के समाजसेवी लोग आगे आ गए। इन लोगों ने कर्मचारियों की संख्या में इजाफा कर गोशाला पर खर्च बढ़ाने के बजाय गोसेवा का काम खुद अपने हाथों में ले लिया। सुबह दो घंटे गोशाला में गोसेवा करने के लिए करीब 50 से ज्यादा समाजसेवी लोग इस टीम में शामिल हो चुके हैं। इससे लोगों को गोसेवा कर पुण्य मिल रहा है तो शारीरिक कार्य कर उनकी सेहत भी सुधर रही है।
गोशाला में जाने वाले इन लोगों में अधिकतर व्यवसायी हैं जो अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हैं। टीम के लोग सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही गोशाला पहुंचने शुरू हो जाते हैं। टीम में शामिल इन लोगों ने समूह बनाकर अपना-अपना काम बांट रखा है। कुछ रात भर गायों के विश्राम करने के बाद एकत्रित गोबर, गोमूत्र उठाते हैं तो कुछ लोग गायों के चारे के लिए बनाई गई खोर को साफ करने में लग जाते हैं। वहीं, अन्य लोग प्रतिदिन लगने वाली सवामणी के साथ तूड़ा मिलाकर उसे साइकिल रिक्शा में रखे ड्रामों में भरकर गायों को खिलाने के काम में जुट जाते हैं। डेढ़ से दो घंटे के काम में ये गोसेवक गोशाला में मौजूद करीब 750 गायों के लिए साफ-सफाई से लेकर उनको चारा खिलाने तक का काम पूरा कर जाते हैं। संवाद
अब गोसेवा बनी दिनचर्या का हिस्सा
गोशाला पहुंचने वाले गोसेवकों की एक खासियत यह है कि वो टीम वर्क करते हैं। एक दिन अगर कुछ गोसेवक नहीं आ पाते हैं तो दूसरी टीम उनको दिए कामों को पूरा करती है। गोसेवा के लिए जाने वाले अधिकतर लोग बहल बाजार में व्यवसायी हैं। गोसेवा से पहले इनमें से अधिकतर लोग घर से मॉर्निंग वॉक के लिए जाते थे। अब गोसेवा के लिए इन लोगों ने मॉर्निंग वॉक की जगह गोसेवा को अपना लिया है। लोगों को कहना है कि गोशाला में काम करते हुए उनकी फिजिकल एक्टिविटी भी हो जाती है और गो सेवा भी हो जाती है।
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टीम संदीप के नाम से बनी है पहचान, एक के बाद जुड़े 50 लोग
गोशाला में वैसे तो समाजसेवी लोग पहले भी जाते रहे हैं। पर, एक टीम के तौर पर काम करने का बीड़ा व्यवसायी संदीप लाखलाण ने उठाया। उन्होंने पहले खुद गोसेवा की शुरुआत की और बाद में एक के बाद एक लोगों को जोड़कर एक टीम बनाई। अब टीम संदीप में करीब 50 लोग जुड़ चुके हैं जो सुबह दो घंटा घर का जरूरी काम छोड़कर भी गोशाला जाते हैं। टीम संदीप में शामिल पवन नूनसर, मंदीप गोस्वामी, शिव गोस्वामी, विकास सोनी, राजेश सिंघल, सुरेश नांधावाला, राजकुमार सेरला, विनोद नूनसर, विनोद सुरपुरिया, संजय चैहडिय़ा, कुलदीप लाखलाण सहित अन्य लोग शामिल हैं जो गोसेवा को अपनी दिनचर्या में शामिल कर चुके हैं। टीम संदीप के सदस्य गोशाला में हर दिन सवामणी लगाते हैं। पिछले महीने इस टीम द्वारा 48 सवामणी लगाई गईं थीं।
मांगी मदद, 55 लाख रुपये वार्षिक सदस्य से जुटाए
चारे के दामों में हुई वृद्धि से पिछली साल गोशाला का बजट गड़बड़ा गया था। स्थानीय लोगों के सहयोग के बाद भी व्यवस्था सही नहीं हो सकी। इस पर गोशाला संचालकों ने एक मुहिम के तहत प्रदेश के अलावा अप्रवासी बहलवासियों से दूसरे प्रदेशों में जाकर मदद मांगी। टीम में शामिल गजानंद अग्रवाल, जयकुमार शर्मा, डॉ. जितेन्द्र वैद्य, मुन्ना तिवारी, कैलाश गोयनका, अनिल नांधा ने दिल्ली, विशाखापट्टनम, बंगलुरू, बड़ोदरा, गुवाहाटी, बनारस, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई सहित अन्य शहरों में व्यवसाय के लिए गए अप्रवासी बहलवासियों से गोसेवा के लिए सहयोग मांगा। इन लोगों से भरपूर सहयोग मिला और करीब 55 लाख रुपये बतौर वार्षिक सदस्य की प्राप्ति हुई। इन दानवीरों के सहयोग से करीब 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के गोशाला के बजट में काफी सहूलियत हो सकी।
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गोशाला में जाने वाले इन लोगों में अधिकतर व्यवसायी हैं जो अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हैं। टीम के लोग सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही गोशाला पहुंचने शुरू हो जाते हैं। टीम में शामिल इन लोगों ने समूह बनाकर अपना-अपना काम बांट रखा है। कुछ रात भर गायों के विश्राम करने के बाद एकत्रित गोबर, गोमूत्र उठाते हैं तो कुछ लोग गायों के चारे के लिए बनाई गई खोर को साफ करने में लग जाते हैं। वहीं, अन्य लोग प्रतिदिन लगने वाली सवामणी के साथ तूड़ा मिलाकर उसे साइकिल रिक्शा में रखे ड्रामों में भरकर गायों को खिलाने के काम में जुट जाते हैं। डेढ़ से दो घंटे के काम में ये गोसेवक गोशाला में मौजूद करीब 750 गायों के लिए साफ-सफाई से लेकर उनको चारा खिलाने तक का काम पूरा कर जाते हैं। संवाद
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अब गोसेवा बनी दिनचर्या का हिस्सा
गोशाला पहुंचने वाले गोसेवकों की एक खासियत यह है कि वो टीम वर्क करते हैं। एक दिन अगर कुछ गोसेवक नहीं आ पाते हैं तो दूसरी टीम उनको दिए कामों को पूरा करती है। गोसेवा के लिए जाने वाले अधिकतर लोग बहल बाजार में व्यवसायी हैं। गोसेवा से पहले इनमें से अधिकतर लोग घर से मॉर्निंग वॉक के लिए जाते थे। अब गोसेवा के लिए इन लोगों ने मॉर्निंग वॉक की जगह गोसेवा को अपना लिया है। लोगों को कहना है कि गोशाला में काम करते हुए उनकी फिजिकल एक्टिविटी भी हो जाती है और गो सेवा भी हो जाती है।
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टीम संदीप के नाम से बनी है पहचान, एक के बाद जुड़े 50 लोग
गोशाला में वैसे तो समाजसेवी लोग पहले भी जाते रहे हैं। पर, एक टीम के तौर पर काम करने का बीड़ा व्यवसायी संदीप लाखलाण ने उठाया। उन्होंने पहले खुद गोसेवा की शुरुआत की और बाद में एक के बाद एक लोगों को जोड़कर एक टीम बनाई। अब टीम संदीप में करीब 50 लोग जुड़ चुके हैं जो सुबह दो घंटा घर का जरूरी काम छोड़कर भी गोशाला जाते हैं। टीम संदीप में शामिल पवन नूनसर, मंदीप गोस्वामी, शिव गोस्वामी, विकास सोनी, राजेश सिंघल, सुरेश नांधावाला, राजकुमार सेरला, विनोद नूनसर, विनोद सुरपुरिया, संजय चैहडिय़ा, कुलदीप लाखलाण सहित अन्य लोग शामिल हैं जो गोसेवा को अपनी दिनचर्या में शामिल कर चुके हैं। टीम संदीप के सदस्य गोशाला में हर दिन सवामणी लगाते हैं। पिछले महीने इस टीम द्वारा 48 सवामणी लगाई गईं थीं।
मांगी मदद, 55 लाख रुपये वार्षिक सदस्य से जुटाए
चारे के दामों में हुई वृद्धि से पिछली साल गोशाला का बजट गड़बड़ा गया था। स्थानीय लोगों के सहयोग के बाद भी व्यवस्था सही नहीं हो सकी। इस पर गोशाला संचालकों ने एक मुहिम के तहत प्रदेश के अलावा अप्रवासी बहलवासियों से दूसरे प्रदेशों में जाकर मदद मांगी। टीम में शामिल गजानंद अग्रवाल, जयकुमार शर्मा, डॉ. जितेन्द्र वैद्य, मुन्ना तिवारी, कैलाश गोयनका, अनिल नांधा ने दिल्ली, विशाखापट्टनम, बंगलुरू, बड़ोदरा, गुवाहाटी, बनारस, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई सहित अन्य शहरों में व्यवसाय के लिए गए अप्रवासी बहलवासियों से गोसेवा के लिए सहयोग मांगा। इन लोगों से भरपूर सहयोग मिला और करीब 55 लाख रुपये बतौर वार्षिक सदस्य की प्राप्ति हुई। इन दानवीरों के सहयोग से करीब 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के गोशाला के बजट में काफी सहूलियत हो सकी।