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Bhiwani News: हार की टीस मिटाने के लिए साल भर बहाया पसीना, रिंग में उतरते ही बरसाए पंच
Thu, 23 Mar 2023 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 23 Mar 2023 11:56 PM IST
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कोच के साथ मुक्केबाज नीतू घनघस।
भिवानी। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में मुक्केबाज नीतू घनघस ने 48 किलोग्राम भारवर्ग में देश के लिए पहला सिल्वर पदक पक्का किया। उन्होंने कजाकिस्तान की मुक्केबाज को 5-2 के अंतर से हराकर फाइनल मैच में प्रवेश किया है। नीतू ने हार की टीस मिटाने के लिए सालभर पसीना बहाया। मुक्केबाज की मेहनत रंग लाई और रिंग में उतरते ही पंच बरसाकर सभी को हतप्रभ कर दिया।
गांव धनाना की बेटी मुक्केबाज नीतू ने पिछले साल तुर्की में हुई महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लिया था, जिसमें उनका मुकाबला कजाकिस्तान की अलुआ बाल्किबेलोवा के साथ हुआ था। क्वार्टर फाइनल में ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार की टीस को मिटाने के लिए मुक्केबाज नीतू घनघस ने सालभर रिंग में पसीना बहाया। किस्मत ऐसी हुई थी कि उनका इस बार सेमीफाइनल में मुकाबला कजाकिस्तान की मुक्केबाज के साथ हुआ। नीतू ने एकाग्रता के साथ मैच खेला और उन्हें 5-2 के अंतर से हराकर देश के लिए पहला सिल्वर पदक पक्का किया। अब स्वर्ण पदक के लिए उनका मुकाबला शनिवार को मंगोलिया की मुक्केबाज के साथ होगा। नीतू का हौसला बढ़ाने के लिए द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच जगदीश सिंह, पिता जयभगवान घनघस, ताऊ कृष्ण, रणबीर सिंह, भाई अक्षित भी मैच दिखने पहुंचे।
वर्ष 2012 में किया था मुक्केबाजी का सफर शुरू
मुक्केबाज नीतू के पिता जयभगवान ने बताया कि वे विधानसभा में नौकरी करते हैं। नीतू ने वर्ष 2012 में भिवानी में कोच जगदीश के पास ट्रेनिंग शुरू की थी। इसके बाद वह निरंतर मेहनत करती रही है। आज इस मुकाम पर पहुंची है। नीतू फिलहाल चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय से एमपीएड की पढ़ाई कर रही है। उनका छोटा भाई अक्षित कुमार शूटिंग का खिलाड़ी है, जिसने हाल ही में नेशनल स्तर पर भाग लिया था।
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मुक्केबाज नीतू ने देश के लिए पहला सिल्वर पदक पक्का किया है, जोकि अन्य खिलाड़ियों के हौसले को बुलंद करने वाला साबित होगा। नीतू होनहार खिलाड़ी है और वह अब फाइनल मैच में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करेंगी।
- अधिवक्ता राजनारायण पंघाल, प्रवक्ता, हरियाणा बॉक्सिंग संघ।
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गांव धनाना की बेटी मुक्केबाज नीतू ने पिछले साल तुर्की में हुई महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लिया था, जिसमें उनका मुकाबला कजाकिस्तान की अलुआ बाल्किबेलोवा के साथ हुआ था। क्वार्टर फाइनल में ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार की टीस को मिटाने के लिए मुक्केबाज नीतू घनघस ने सालभर रिंग में पसीना बहाया। किस्मत ऐसी हुई थी कि उनका इस बार सेमीफाइनल में मुकाबला कजाकिस्तान की मुक्केबाज के साथ हुआ। नीतू ने एकाग्रता के साथ मैच खेला और उन्हें 5-2 के अंतर से हराकर देश के लिए पहला सिल्वर पदक पक्का किया। अब स्वर्ण पदक के लिए उनका मुकाबला शनिवार को मंगोलिया की मुक्केबाज के साथ होगा। नीतू का हौसला बढ़ाने के लिए द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच जगदीश सिंह, पिता जयभगवान घनघस, ताऊ कृष्ण, रणबीर सिंह, भाई अक्षित भी मैच दिखने पहुंचे।
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वर्ष 2012 में किया था मुक्केबाजी का सफर शुरू
मुक्केबाज नीतू के पिता जयभगवान ने बताया कि वे विधानसभा में नौकरी करते हैं। नीतू ने वर्ष 2012 में भिवानी में कोच जगदीश के पास ट्रेनिंग शुरू की थी। इसके बाद वह निरंतर मेहनत करती रही है। आज इस मुकाम पर पहुंची है। नीतू फिलहाल चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय से एमपीएड की पढ़ाई कर रही है। उनका छोटा भाई अक्षित कुमार शूटिंग का खिलाड़ी है, जिसने हाल ही में नेशनल स्तर पर भाग लिया था।
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मुक्केबाज नीतू ने देश के लिए पहला सिल्वर पदक पक्का किया है, जोकि अन्य खिलाड़ियों के हौसले को बुलंद करने वाला साबित होगा। नीतू होनहार खिलाड़ी है और वह अब फाइनल मैच में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करेंगी।
- अधिवक्ता राजनारायण पंघाल, प्रवक्ता, हरियाणा बॉक्सिंग संघ।