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स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पतालों में लगी विद्यार्थियों की भीड़
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स्कूल के प्रवेश द्वार पर छात्राओं की थर्मल स्क्रीनिंग करते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। कोविड-19 के चलते पिछले करीब 10 माह बाद छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी सरकार की अनुमति मिलने के बाद सोमवार को स्कूल पहुंचे। मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए विद्यार्थी स्कूलों की बजाय अस्पतालों में ज्यादा नजर आए।
जिला सामान्य अस्पताल में अलग से मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई थी और अलग से डेस्क भी लगाई गई थी। इसके बावजूद पहले दिन स्कूलों में सिर्फ 20 से 25 फीसदी विद्यार्थियों की ही उपस्थिति दर्ज हो पाई। स्कूलों में विद्यार्थियों को थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइज कराए जाने के बाद ही प्रवेश मिला। वहीं स्कूल पहुंचे अधिकांश विद्यार्थियों के पास मेडिकल सर्टिफिकेट भी नहीं थे, जिन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ा। अभिभावकों से अनुमति पत्र लेकर भी विद्यार्थी स्कूल आए।
कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से 18 मार्च से ही सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे। लगातार दस माह तक विद्यार्थियों को घर बैठे ही ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई, मगर ऑनलाइन पढ़ाई अधिकांश बच्चों को रास नहीं आई। पहले दिन बच्चों की उपस्थिति कम रहने का कारण उनका मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं बनना रहा। हालांकि जिला सामान्य अस्पताल में तीन चिकित्सकों को विद्यार्थियों के मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए ही काम पर लगाया गया था। इसके बावजूद जिला सामान्य अस्पताल में विद्यार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं। छोटे बच्चे काफी देर तक मेडिकल सर्टिफिकेट पाने के लिए लाइनों में खड़े रहे। विद्यार्थियों को दोपहर बाद तक मेडिकल सर्टिफिकेट मिले, लेकिन वे पहले दिन स्कूल नहीं जा पाए। शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पहले दिन केवल 50 से 70 बालिकाओं की ही उपस्थिति दर्ज हुई, जबकि यहां पर दाखिल विद्यार्थियों की संख्या करीब पांच सौ है। स्कूल पहुंचीं अधिकतर छात्राओं के पास न मेडिकल सर्टिफिकेट थे और न ही अभिभावकों के अनुमति पत्र। ऐसे में उन्हें प्रवेश नहीं मिला और निराश ही घर लौटीं।
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समय कम, कैसे पूरा होगा सिलेबस
स्कूल भले ही खुल गए हो, मगर अब शिक्षकों केस सामने अनेक चुनौतियां हैं। सबसे अहम कम समय में सिलेबस पूरा कराना। इसके अलावा कोविड-19 के संक्रमण का खतरा भी अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों का सिलेबस काफी कम किया गया है। विद्यार्थियों के सिलेबस का पैटर्न भी बदला गया है, जबकि घर पर बैठे ही पढ़ाई से जुड़ाव बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन होमवर्क भी कराया गया।
वर्जन
सभी स्कूलों में कक्षा छठी से आठवीं तक विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने की अनुमति शिक्षा विभाग द्वारा दी गई है। इसमें कोरोना संक्रमण बचाव के प्रबंध बहुत जरूरी हैं। प्रत्येक बच्चे को मेडिकल सर्टिफिकेट व अभिभावकों से अनुमति पत्र लाने के बाद ही प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा स्कूलों में सैनिटाइज व सामुदायिक दूरी बनाए रखने के भी विशेष प्रबंधों के निर्देश दिए हैं।
- अजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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जिला सामान्य अस्पताल में अलग से मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई थी और अलग से डेस्क भी लगाई गई थी। इसके बावजूद पहले दिन स्कूलों में सिर्फ 20 से 25 फीसदी विद्यार्थियों की ही उपस्थिति दर्ज हो पाई। स्कूलों में विद्यार्थियों को थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइज कराए जाने के बाद ही प्रवेश मिला। वहीं स्कूल पहुंचे अधिकांश विद्यार्थियों के पास मेडिकल सर्टिफिकेट भी नहीं थे, जिन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ा। अभिभावकों से अनुमति पत्र लेकर भी विद्यार्थी स्कूल आए।
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कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से 18 मार्च से ही सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे। लगातार दस माह तक विद्यार्थियों को घर बैठे ही ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई, मगर ऑनलाइन पढ़ाई अधिकांश बच्चों को रास नहीं आई। पहले दिन बच्चों की उपस्थिति कम रहने का कारण उनका मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं बनना रहा। हालांकि जिला सामान्य अस्पताल में तीन चिकित्सकों को विद्यार्थियों के मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए ही काम पर लगाया गया था। इसके बावजूद जिला सामान्य अस्पताल में विद्यार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं। छोटे बच्चे काफी देर तक मेडिकल सर्टिफिकेट पाने के लिए लाइनों में खड़े रहे। विद्यार्थियों को दोपहर बाद तक मेडिकल सर्टिफिकेट मिले, लेकिन वे पहले दिन स्कूल नहीं जा पाए। शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पहले दिन केवल 50 से 70 बालिकाओं की ही उपस्थिति दर्ज हुई, जबकि यहां पर दाखिल विद्यार्थियों की संख्या करीब पांच सौ है। स्कूल पहुंचीं अधिकतर छात्राओं के पास न मेडिकल सर्टिफिकेट थे और न ही अभिभावकों के अनुमति पत्र। ऐसे में उन्हें प्रवेश नहीं मिला और निराश ही घर लौटीं।
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समय कम, कैसे पूरा होगा सिलेबस
स्कूल भले ही खुल गए हो, मगर अब शिक्षकों केस सामने अनेक चुनौतियां हैं। सबसे अहम कम समय में सिलेबस पूरा कराना। इसके अलावा कोविड-19 के संक्रमण का खतरा भी अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों का सिलेबस काफी कम किया गया है। विद्यार्थियों के सिलेबस का पैटर्न भी बदला गया है, जबकि घर पर बैठे ही पढ़ाई से जुड़ाव बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन होमवर्क भी कराया गया।
वर्जन
सभी स्कूलों में कक्षा छठी से आठवीं तक विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने की अनुमति शिक्षा विभाग द्वारा दी गई है। इसमें कोरोना संक्रमण बचाव के प्रबंध बहुत जरूरी हैं। प्रत्येक बच्चे को मेडिकल सर्टिफिकेट व अभिभावकों से अनुमति पत्र लाने के बाद ही प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा स्कूलों में सैनिटाइज व सामुदायिक दूरी बनाए रखने के भी विशेष प्रबंधों के निर्देश दिए हैं।
- अजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।

स्कूली बच्चों की मेडिकल सर्टिफिकेट बनाते चिकित्सक। संवाद- फोटो : Bhiwani

मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए लाइन में लगे स्कूली बच्चे। संवाद- फोटो : Bhiwani