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Bhiwani News: सड़कों पर बेसहारा गोवंश, हादसों के खतरे से निजात की मांग
Fri, 09 Oct 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:22 AM IST
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उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने जाते सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश सैनी व अन्य।
- फोटो : 1
भिवानी। शहर की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश से यातायात बाधित होने के साथ हादसों का खतरा बढ़ रहा है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर गोवंश की सुरक्षा और उचित प्रबंधन की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश सैनी, विश्वकर्मा शिक्षा एवं जन कल्याण समिति के प्रधान एडवोकेट राजेश जांगड़ा, पर्यटन विकास मंच के संस्थापक राजेश गारनपूरा और ढाणा नरसान के नंबरदार राजेंद्र ने कहा कि मुख्य मार्गों, चौराहों और बाजारों में गाय-सांड़ खुले में घूमते और सड़कों पर बैठे रहते हैं। इससे यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
प्रतिनिधियों ने बताया कि कई बार सड़क किनारे गोवंश को कच्चा, बासी, तला या अनुपयुक्त भोजन डाल दिया जाता है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और प्रतिवर्ष अनेक गोवंश की मौत हो जाती है। सुरेश सैनी ने कहा कि गोसेवा आस्था के साथ जिम्मेदारी भी है इसलिए इसके लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने मांग की कि अमावस्या और अन्य धार्मिक अवसरों पर प्रशासन निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर स्वच्छ और उचित आहार की व्यवस्था करे।
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बेसहारा, घायल और बीमार गोवंश के लिए विशेष बचाव व उपचार व्यवस्था, हेल्पलाइन नंबर तथा प्रमुख मार्गों से पशुओं को गोशालाओं या आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। संगठनों ने खुले में पशु छोड़ने वाले पशुपालकों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी की। साथ ही अमावस्या पर विशेष निगरानी दल गठित कर लोगों को जागरूक करने तथा नगर प्रशासन, पशुपालन विभाग, पुलिस, गोशालाओं और सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग उठाई।
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सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश सैनी, विश्वकर्मा शिक्षा एवं जन कल्याण समिति के प्रधान एडवोकेट राजेश जांगड़ा, पर्यटन विकास मंच के संस्थापक राजेश गारनपूरा और ढाणा नरसान के नंबरदार राजेंद्र ने कहा कि मुख्य मार्गों, चौराहों और बाजारों में गाय-सांड़ खुले में घूमते और सड़कों पर बैठे रहते हैं। इससे यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
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प्रतिनिधियों ने बताया कि कई बार सड़क किनारे गोवंश को कच्चा, बासी, तला या अनुपयुक्त भोजन डाल दिया जाता है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और प्रतिवर्ष अनेक गोवंश की मौत हो जाती है। सुरेश सैनी ने कहा कि गोसेवा आस्था के साथ जिम्मेदारी भी है इसलिए इसके लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने मांग की कि अमावस्या और अन्य धार्मिक अवसरों पर प्रशासन निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर स्वच्छ और उचित आहार की व्यवस्था करे।
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बेसहारा, घायल और बीमार गोवंश के लिए विशेष बचाव व उपचार व्यवस्था, हेल्पलाइन नंबर तथा प्रमुख मार्गों से पशुओं को गोशालाओं या आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। संगठनों ने खुले में पशु छोड़ने वाले पशुपालकों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी की। साथ ही अमावस्या पर विशेष निगरानी दल गठित कर लोगों को जागरूक करने तथा नगर प्रशासन, पशुपालन विभाग, पुलिस, गोशालाओं और सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग उठाई।