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खाकी पर दाग: मुठभेड़ में चरखी दादरी पुलिस तलब
भिवानी
Updated Sat, 10 May 2014 01:14 AM IST
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सात साल पहले हुए दो युवकों के एनकाउंटर में चरखी दादरी पुलिस फंसती नजर आ रही है। पुलिस ने गांव पिचौपा कलां में दो युवकों को मुठभेड़ में मार गिराया था। अदालत ने चरखी दादरी पुलिस को 12 मई को तलब किया है। इस मामले में शुक्रवार को चरखी दादरी पुलिस की पेशी थी लेकिन पुलिस ने अगली तिथि तक का समय मांगा है।
गौरतलब है कि गांव लोहरवाड़ा निवासी मुकेश कुमार और संदीप पर मार्च 2007 में हांसी निवासी दो व्यापारियों की गोली मार कर हत्या करने का आरोप था। पुलिस महानिदेशक रंजीव दलाल ने तत्कालीन एसटीएफ प्रभारी एएसपी अशोक श्योराण को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
21 जुलाई 2007 को गांव पिचौपा कलां में मुकेश और संदीप का एनकाउंटर कर दिया गया था। घटना के बाद एएसपी अशोक श्योराण की सर्विस रिवॉल्वर भी गायब हो गई थी जो बाद में दिल्ली के एक पुलिस अधिकारी की हत्या में प्रयुक्त हुई थी। इसके बाद से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया था।
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न्याय दिलवाने के लिए चरखी दादरी के गांव लोहरवाड़ा निवासी शांति देवी ने चरखी दादरी न्यायालय में याचिका दायर कर तत्कालीन एसटीएफ टीम प्रभारी एएसपी अशोक श्योराण पर फर्जी एनकाउंटर में बेटे मुकेश और उसके साथी संदीप की हत्या का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि संदीप और मुकेश को एसटीएफ टीम ने जिंदा पकड़ा और बाद में पिचौपा कलां के समीप खेतों में ले जाकर उनकी हत्या कर दी थी। उस समय चरखी दादरी न्यायालय के तत्कालीन जज ने इस मामले की जांच कर बाढड़ा थाना प्रभारी को तत्कालीन एएसपी और हरियाणा एसटीएफ प्रभारी अशोक श्योराण और रिटायर्ड डीएसपी रामकिशन, डीएसपी रामअवतार गुर्जर के खिलाफ धारा 302, 120 बी के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। लेकिन करीब छह माह बाद भी नामजद किसी पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
डीएसपी से मिले पीड़ित
इस मामले में कार्रवाई को लेकर गांव लोहरवाड़ा निवासी शांति देवी शुक्रवार को डीएसपी कार्यालय पहुंची। डीएसपी से मिलने के बाद शांति देवी व उनके परिजन दोबारा चरखी दादरी न्यायालय के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुए तथा अदालत में दोबारा याचिका दायर की। अदालत ने चरखी दादरी पुलिस को न्यायालय में 12 मई सोमवार को पेश होने को कहा है।
क्या कहते हैं डीएसपी
चरखी दादरी के डीएसपी रमेश कुमार का कहना है कि पुलिस पिचौपा कलां घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि दोनों युवकों का मर्डर हुआ था या मुठभेड़ के दौरान मौत हुई थी।
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गौरतलब है कि गांव लोहरवाड़ा निवासी मुकेश कुमार और संदीप पर मार्च 2007 में हांसी निवासी दो व्यापारियों की गोली मार कर हत्या करने का आरोप था। पुलिस महानिदेशक रंजीव दलाल ने तत्कालीन एसटीएफ प्रभारी एएसपी अशोक श्योराण को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
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21 जुलाई 2007 को गांव पिचौपा कलां में मुकेश और संदीप का एनकाउंटर कर दिया गया था। घटना के बाद एएसपी अशोक श्योराण की सर्विस रिवॉल्वर भी गायब हो गई थी जो बाद में दिल्ली के एक पुलिस अधिकारी की हत्या में प्रयुक्त हुई थी। इसके बाद से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया था।
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न्याय दिलवाने के लिए चरखी दादरी के गांव लोहरवाड़ा निवासी शांति देवी ने चरखी दादरी न्यायालय में याचिका दायर कर तत्कालीन एसटीएफ टीम प्रभारी एएसपी अशोक श्योराण पर फर्जी एनकाउंटर में बेटे मुकेश और उसके साथी संदीप की हत्या का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि संदीप और मुकेश को एसटीएफ टीम ने जिंदा पकड़ा और बाद में पिचौपा कलां के समीप खेतों में ले जाकर उनकी हत्या कर दी थी। उस समय चरखी दादरी न्यायालय के तत्कालीन जज ने इस मामले की जांच कर बाढड़ा थाना प्रभारी को तत्कालीन एएसपी और हरियाणा एसटीएफ प्रभारी अशोक श्योराण और रिटायर्ड डीएसपी रामकिशन, डीएसपी रामअवतार गुर्जर के खिलाफ धारा 302, 120 बी के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। लेकिन करीब छह माह बाद भी नामजद किसी पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
डीएसपी से मिले पीड़ित
इस मामले में कार्रवाई को लेकर गांव लोहरवाड़ा निवासी शांति देवी शुक्रवार को डीएसपी कार्यालय पहुंची। डीएसपी से मिलने के बाद शांति देवी व उनके परिजन दोबारा चरखी दादरी न्यायालय के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुए तथा अदालत में दोबारा याचिका दायर की। अदालत ने चरखी दादरी पुलिस को न्यायालय में 12 मई सोमवार को पेश होने को कहा है।
क्या कहते हैं डीएसपी
चरखी दादरी के डीएसपी रमेश कुमार का कहना है कि पुलिस पिचौपा कलां घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि दोनों युवकों का मर्डर हुआ था या मुठभेड़ के दौरान मौत हुई थी।