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Bhiwani News: अब एक मार्च तक थमा रहेगा जिले में 136 ईंट भट्ठों की चिमनियों का धुआं, विकास परियोजनाओं पर निर्माण सामग्री का संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:34 AM IST
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Smoke from the chimneys of 136 brick kilns in the district will now remain silent until March 1st, and development projects are facing a shortage of construction materials.
गांव प्रेमनगर के समीप ईंट भट्ठा।
भिवानी। जिले के 136 पंजीकृत ईंट भट्ठों की चिमनियों का धुआं अब एक मार्च तक थमा रहेगा जिससे विकास परियोजनाओं पर निर्माण सामग्री का संकट पैदा हो गया है। हालांकि शुक्रवार को ग्रेप चार की पाबंदी हटने के बाद 20 दिन बाद फिर से तोशाम में खनन कार्य शुरू हुआ और बंद पड़ी विकास योजनाओं पर भी काम फिर से शुरू हुआ।
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जिले में 30 जून से ही जिग-जेग प्रणाली से संचालित होने वाले ईंट भट्ठे बंद थे जिससे प्रवासी मजदूर परिवारों के काम पर संकट गहरा गया। दी भिवानी ब्रिक किलन एसोसिएशन ने राजस्थान की तर्ज पर जनवरी से ईंट भट्ठों के संचालन की मांग उठाई है। पिछले साल का ईंटों का स्टॉक भी लगभग खत्म हो चुका है जिसके कारण ईंटों का रेट प्रति हजार साढ़े सात हजार रुपये से अधिक हो गया है।
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भिवानी जिले में खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से 136 ईंट भट्ठे पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से हर साल केवल 106 भट्ठों का ही संचालन संभव होता है। एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 30 जून को भट्ठे बंद कर दिए थे जिन्हें अब एक मार्च से संचालन की अनुमति दी गई है। दिसंबर से हवा में प्रदूषण का स्तर असंतुलित बना रहता है और अब तक लगभग तीन बार ग्रेप चार का चरण लागू हो चुके है। ग्रेप चार के दौरान खनन, विकास परियोजनाओं और भवन निर्माण संबंधी सभी गतिविधियां बंद कर दी जाती हैं।
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विकास परियोजनाओं में अधिकांश काम कंक्रीट मिश्रण से हो रहा है जिसमें ईंटों का बहुत कम प्रयोग है जबकि निजी भवन निर्माण में सीधे ईंटों से ही निर्माण होता है। ऐसे में ईंटों का रेट साढ़े सात हजार रुपये प्रति हजार तक पहुंच गया है जिससे आमजन के लिए घर बनाना महंगा हो गया है।

ग्रेप की पाबंदी हटने से फिर चालू हुआ खनन, निर्माण सामग्री के भाव 400 रुपये नीचे आए
तोशाम। शुक्रवार देर शाम ग्रेप चार की पाबंदी हटते ही करीब 20 दिन से बंद पड़े खानक और खरकड़ी सोहान पहाड़ियों में खनन कार्य फिर शुरू हो गया। एचएसआईआईडीसी की ओर से पत्थर की लोडिंग भी शुरू कर दी गई। खानक में खनन शुरू होने से भवन निर्माण सामग्री के रेट में प्रति टन 400 रुपये की कमी आई। अगले एक-दो दिन में भवन सामग्री का भाव करीब 700 रुपये प्रति टन तक पहुंच जाएगा। इससे आमजन और सरकारी विकास कार्यों दोनों को लाभ होगा। 14 दिसंबर को ग्रेप चार लगने के बाद पहाड़ियों में खनन कार्य बंद हो गया था जिससे क्रशर इकाइयां भी बंद हो गई थीं। खानक पहाड़ी में खनन शुरू होने से करीब 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। 20 दिन से खनन बंद होने के कारण लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा था और घर खर्च भी नहीं चल पा रहा था। भवन सामग्री के भाव पहले 1200 रुपये प्रति टन थे जो अब 800 रुपये प्रति टन रह गए हैं। एचएसआईआईडीसी के मैनेजर रविन्द्र जाखड़ ने बताया कि ग्रेप चार हटने के साथ ही खनन कार्य शुरू कर दिया गया है।

ईंटों का पुराना स्टॉक खत्म, जनवरी से भट्ठे संचालन की मांग: वेदप्रकाश अग्रवाल
जिले में वर्तमान में केवल 106 ईंट भट्ठों पर उत्पादन हो रहा है। 30 जून से भट्ठे बंद हैं। वेदप्रकाश अग्रवाल, संरक्षक दी ब्रिक किलन एसोसिएशन भिवानी ने कहा कि
हमारी मांग है कि राजस्थान की तर्ज पर जनवरी से भट्ठों का संचालन करने अनुमति दी जाए। केवल चार महीने ही उत्पादन संभव है लेकिन पूरे साल माइनिंग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का शुल्क लागू रहता है। एक भट्ठे पर करीब डेढ़ सौ मजदूरों को रोजगार मिलता है। लंबे समय तक कच्ची ईंटें बाहर रहती हैं और बारिश में खराब होती हैं। सरकार को इस पर भरपाई की दिशा में कदम उठाने चाहिए।



भिवानी में एक मार्च से ईंट भट्ठे संचालित किए जाएंगे। फिलहाल इन्हें एनजीटी के आदेशों से 30 जून से बंद किया गया था। ईंटों के उत्पादन के लिए चार माह की अवधि तक ही संचालन की अनुमति मिलेगी। भिवानी एनसीआर क्षेत्र में आता है इसलिए भट्ठों का संचालन एनजीटी की हिदायतों के अनुसार ही होगा। -प्रदीप कौशिक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, भिवानी
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