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Bhiwani News: कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ
Thu, 18 Apr 2024 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 18 Apr 2024 12:19 AM IST
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हनुमान जोहड़ी मंदिर में यज्ञ में आहुति देते चरणदास महाराज व अन्य।
भिवानी। लिबर्टी सिनेमा रोड स्थित कुंगड़ियां मंदिर में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में अनेक महिलाओं ने भाग लिया। सात दिवसीय कथा में आचार्य विनय मिश्र कथा का वाचन करेंगे।
पहले दिन कथा का वाचन करते हुए आचार्य विनय मिश्र ने कहा कि हिंदू रीति के अनुसार जब भी कोई पूजा की जाती है तो उसमें कलश की स्थापना करना अनिवार्य है। क्योंकि जल से भरे कलश को मानव शरीर का प्रतीक माना जाता है। कलश को शांति का संदेश वाहक भी माना जाता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मानव जीवन में एक जन्म नहीं, अपितु हमारे कई जन्मों के पापों का नाश होने के साथ ही हमारे शुभ कर्मों का उदय भी होता है। कथा सुनने मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। देवर्षि नारद ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया तथा प्रेत योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। विनय मिश्र ने कहा कि कथा के श्रवण से जीव के सभी पाप मिट जाते हैं। इस अवसर पर आचार्य रमेश मिश्र, वेद मिश्रा, मनोज मिश्रा, मुकेश जांगड़ा, इंद्रेज मौजूद रहे। संवाद
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पहले दिन कथा का वाचन करते हुए आचार्य विनय मिश्र ने कहा कि हिंदू रीति के अनुसार जब भी कोई पूजा की जाती है तो उसमें कलश की स्थापना करना अनिवार्य है। क्योंकि जल से भरे कलश को मानव शरीर का प्रतीक माना जाता है। कलश को शांति का संदेश वाहक भी माना जाता है।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मानव जीवन में एक जन्म नहीं, अपितु हमारे कई जन्मों के पापों का नाश होने के साथ ही हमारे शुभ कर्मों का उदय भी होता है। कथा सुनने मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। देवर्षि नारद ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया तथा प्रेत योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। विनय मिश्र ने कहा कि कथा के श्रवण से जीव के सभी पाप मिट जाते हैं। इस अवसर पर आचार्य रमेश मिश्र, वेद मिश्रा, मनोज मिश्रा, मुकेश जांगड़ा, इंद्रेज मौजूद रहे। संवाद
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