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Bhiwani News: कारगिल युद्ध में अदम्य साहस दिखाया, पर भ्रष्ट व्यवस्था के आगे लाचार

Fri, 19 Jul 2024 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 19 Jul 2024 02:22 AM IST
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Showed indomitable courage in Kargil war, but helpless in front of corrupt system
भिवानी। पूरा देश 26 जुलाई को 1999 के कारगिल युद्ध की रजत जयंती मनाएगा, लेकिन इसी युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देने वाला दिव्यांग पूर्व सैनिक अपनी पुश्तैनी जमीन पाने के लिए भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लिए लड़ रहा है।
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भिवानी जिले के गांव तिगड़ाना निवासी 16 ग्रेनेडियर यूनिट के पूर्व लांस नायक अशोक कुमार कारगिल युद्ध में घायल होने के बाद दिव्यांग हो गए थे। युद्ध के दौरान अशोक गोलियां लगने से जख्मी होने के बावजूद 36 घंटे तक लड़े और 26 जुलाई 1999 को टाइगर हिल से आगे 5363 सैडल रिज पर विजय पताका फहराई थी। उनके पिता धर्मपाल सिंह भी 16 ग्रेनेडियर से सेवानिवृत्त हुए थे। अशोक के पिता दो भाई थे और दोनों ही आर्मी में थे, जिन्होंने 1965 और 1971 की लड़ाई लड़ी। अशोक के दो भाई राजेश कुमार व तेज सिंह भी आर्मी में हैं। अशोक कुमार ने बताया कि उनका पूरा परिवार देश सेवा में लगा है। गांव डूमा (हरिनगर) जिला गुरुग्राम में उनकी पुश्तैनी जमीनों पर भूमाफिया ने कब्जा कर अवैध रूप से निर्माण किया हुआ है।
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उनकी पुश्तैनी जमीन के विरासत के इंतकाल भी दर्ज हुए थे, जिन्हें भूमाफिया ने मिलीभगत कर 12 जुलाई 2007 को खारिज कराकर अवैध व गैरकानूनी ढंग से निर्माण कार्य कर बिना सीएलयू के कॉलेज चलाए जा रहे हैं। इसकी शिकायत तहसीलदार से लेकर राष्ट्रपति तक करने व लंबी लड़ाई लड़ने के बाद सब रजिस्ट्रार फर्रुखनगर ने 26 अगस्त 2019 को आदेश पारित कर भूमाफिया द्वारा की जा रही अवैध खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी थी। उस आदेश के खिलाफ भूमाफिया न्यायालय में गए, लेकिन सब रजिस्ट्रार के आदेश को सही पाया गया। अशोक ने बताया कि आरोपियों ने उनकी पुश्तैनी भूमि का गलत तरीके से इंतकाल कराने का भी प्रयास किया, लेकिन सब रजिस्ट्रार कार्यालय ने इन्कार कर दिया। इसके बावजूद आज तक उन्हें पुश्तैनी जमीन नहीं मिल पाई है।
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