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Bhiwani News: अनुमोदित हिंदी भारतीय अस्मिता एवं सांस्कृतिक विरासत की वाहक विषय पर हुई संगोष्ठी
Wed, 20 Mar 2024 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 20 Mar 2024 11:42 PM IST
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भिवानी में अतिथि को पुष्पगुछ देकर सम्मानित करते महाविद्यालय के स्टाफ सदस्य।
तोशाम। बनवारी लाल जिंदल सूईवाला महाविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसका विषय अनुमोदित हिंदी भारतीय अस्मिता एवं सांस्कृतिक विरासत की वाहक रहा। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के सहभागियों ने सहभागिता की।
संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य वक्ता महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. संजीव वर्मा ने किया। मंच का संचालन श्याम वशिष्ठ ने किया। मुख्य वक्ता डॉ. संजीव वर्मा ने कहा कि भारतीय भाषाओं की रूप संरचना अलग हो सकती है, लिपि अलग हो सकती है। लेकिन सभी भाषाओं की सामाजिक एवं जातीय चेतना एक ही है। प्रथम एवं द्वितीय सत्र में वक्ता प्रो. विश्वबंधु शर्मा, डॉ. विपिन गुप्ता, डॉ. सुनील शर्मा आदि वक्ताओं ने समवेत स्वर में भारतीय भाषाओं की एकात्मकता में हिंदी के सख्य भाव को स्वीकार किया। तृतीय सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. मधु मालती ने मौजूद सभी विद्वतजनों, प्रतिनिधि, शोधार्थी एवं विद्यार्थी से हिंदी भाषा में हस्ताक्षर करने का आह्वान किया। संगोष्ठी के संयोजक सचिव डॉ. महेंद्र सिंह ने विषय की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए संगोष्ठी में पधारे सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर महाविद्यालय से जसवंत सिंह, यशपाल महत्ता, डॉ. जोगेंद्र कुमार, अश्वनी कुमार, डॉ. गीतिका शर्मा, डॉ. सुरेश, श्यामवीर, संजय गुप्ता मौजूद रहे।
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संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य वक्ता महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. संजीव वर्मा ने किया। मंच का संचालन श्याम वशिष्ठ ने किया। मुख्य वक्ता डॉ. संजीव वर्मा ने कहा कि भारतीय भाषाओं की रूप संरचना अलग हो सकती है, लिपि अलग हो सकती है। लेकिन सभी भाषाओं की सामाजिक एवं जातीय चेतना एक ही है। प्रथम एवं द्वितीय सत्र में वक्ता प्रो. विश्वबंधु शर्मा, डॉ. विपिन गुप्ता, डॉ. सुनील शर्मा आदि वक्ताओं ने समवेत स्वर में भारतीय भाषाओं की एकात्मकता में हिंदी के सख्य भाव को स्वीकार किया। तृतीय सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. मधु मालती ने मौजूद सभी विद्वतजनों, प्रतिनिधि, शोधार्थी एवं विद्यार्थी से हिंदी भाषा में हस्ताक्षर करने का आह्वान किया। संगोष्ठी के संयोजक सचिव डॉ. महेंद्र सिंह ने विषय की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए संगोष्ठी में पधारे सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर महाविद्यालय से जसवंत सिंह, यशपाल महत्ता, डॉ. जोगेंद्र कुमार, अश्वनी कुमार, डॉ. गीतिका शर्मा, डॉ. सुरेश, श्यामवीर, संजय गुप्ता मौजूद रहे।
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