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Bhiwani News: निर्मल भैणी जाटान और ठाकरान गांव में पटरी से उतरी सफाई व्यवस्था
Tue, 05 Nov 2024 03:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 05 Nov 2024 03:53 AM IST
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बवानीखेड़ा क्षेत्र के भैणी गांव की गली में फैला पानी।
बवानीखेड़ा। निर्मल गांव भैणी जाटान और ठाकरान में सरकारी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांव के पशु चिकित्सालय की चहारदीवारी टूटी है।
गांव में जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने जलघर बनाया है लेकिन सुंदर ब्रांच में पानी की कमी के कारण टैंक अक्सर सूखे रहते हैं। इस कारण स्वच्छ पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को खेतों में लगे नलकूप और हैंडपंप से पीने का पानी लाना पड़ रहा है।
गांव में दो पंचायतें हैं। एक जाटान और दूसरी ठाकरान। इनमें लगभग 8,000 की आबादी है। इन गांवों में सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीण रमेश, सुरेश, पवन, अशोक, लीला, जोगिंदर ने बताया कि गांव में अधिकतर नालियां टूटी पड़ी हैं। सड़कों का हाल बहुत बुरा है। सफाई व्यवस्था भी चरमराई है। कहने के लिए तो उनका गांव निर्मल घोषित हो चुका है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वह जनप्रतिनिधियों से सिंचाई के लिए सुंदर ब्रांच का पानी को नियमित रूप से चलवाने की मांग रखेंगे। उन्नत बीजों और खाद के लिए दूसरे गांवों के लोगों पर आश्रित होना पड़ रहा है। किसानों को खाद, बीज भी नजदीकी गांव कुंगड़ से लेकर आना पड़ता है। गांव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भी है। इसमें सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं। गांव में एक स्टेडियम भी बना है, लेकिन इसमें सुविधा न के बराबर हैं।
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ग्रामीणों ने स्थानीय स्टेडियम में बच्चों की सुविधा के लिए कोच और खेल सामान की भी मांग की है ताकि उनके गांव के बच्चे अच्छी कोचिंग लेकर अपने गांव और राज्य का नाम रोशन कर सकें। गांव में सरकारी अस्पताल की भी कोई सुविधा नहीं है। चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें दूसरे गांव में जाना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने अपने गांव में ही पीएचसी खुलवाने की मांग की है।
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गांव में जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने जलघर बनाया है लेकिन सुंदर ब्रांच में पानी की कमी के कारण टैंक अक्सर सूखे रहते हैं। इस कारण स्वच्छ पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को खेतों में लगे नलकूप और हैंडपंप से पीने का पानी लाना पड़ रहा है।
गांव में दो पंचायतें हैं। एक जाटान और दूसरी ठाकरान। इनमें लगभग 8,000 की आबादी है। इन गांवों में सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीण रमेश, सुरेश, पवन, अशोक, लीला, जोगिंदर ने बताया कि गांव में अधिकतर नालियां टूटी पड़ी हैं। सड़कों का हाल बहुत बुरा है। सफाई व्यवस्था भी चरमराई है। कहने के लिए तो उनका गांव निर्मल घोषित हो चुका है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि वह जनप्रतिनिधियों से सिंचाई के लिए सुंदर ब्रांच का पानी को नियमित रूप से चलवाने की मांग रखेंगे। उन्नत बीजों और खाद के लिए दूसरे गांवों के लोगों पर आश्रित होना पड़ रहा है। किसानों को खाद, बीज भी नजदीकी गांव कुंगड़ से लेकर आना पड़ता है। गांव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भी है। इसमें सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं। गांव में एक स्टेडियम भी बना है, लेकिन इसमें सुविधा न के बराबर हैं।
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ग्रामीणों ने स्थानीय स्टेडियम में बच्चों की सुविधा के लिए कोच और खेल सामान की भी मांग की है ताकि उनके गांव के बच्चे अच्छी कोचिंग लेकर अपने गांव और राज्य का नाम रोशन कर सकें। गांव में सरकारी अस्पताल की भी कोई सुविधा नहीं है। चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें दूसरे गांव में जाना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने अपने गांव में ही पीएचसी खुलवाने की मांग की है।