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Bhiwani News: खंडहर हुए भवन, स्टाफ की कमी में बीमार हुई स्वास्थ्य सेवा
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भिवानी। जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत काफी दयनीय है। बालमा और सूई पीएचसी का भवन काफी जर्जर हाल हो गया है। यहां अधिकतर कमरों की दीवारों में दरारें आई हुई है और बारिश के सीजन में छतों से पानी टपकता है। यहां न तो मरीजों की जांच के लिए मशीन है और न ही पर्याप्त चिकित्सक व पैरा मेडिकल स्टाफ है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत ऐसी है कि यहां सिर्फ गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी ही हो पा रहा है। वो भी अगर गंभीर मामला आता है तो उसे हायर सेंटर रेफर कर देते हैं।
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीज को उपचार के लिए नागरिक अस्तपाल, पीजीआईएमएस रोहतक या फिर निजी अस्पतालों में अपनी जेब कटवानी पड़ रही है। इन दिनों दवाइयां की कमी तो हर स्वास्थ्य केंद्र पर है, जिसके कारण मरीजों को मेडिकल स्टोर पर अपनी जेब कटवानी पड़ रही है। जिले की 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों ने 49 स्वीकृत पद हैं, जिसमें ने 17 चिकित्सकों के पद खाली हैं। वहीं स्टाफ नर्स के भी 50 में से 12 पद खाली हैं। इसकी वजह से अन्य स्टाफ पर कार्य का भार आया हुआ है। पीएचसी पर रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की तो दूर की तो है यहां तो दंत रोग चिकित्सक भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को नागरिक अस्पताल में जाना मजबूरी बन गया है।
मशीन नहीं होने के कारण जांच भी अटकी
पीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग ने लैब बनाई हुई है। इसमें पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण जांच भी अटक जाती है। पीएचसी पर फार्मासिस्ट के दो-दो पद हैं मगर अधिकतर में ये पद खाली है। ऐसे में यहां सिर्फ यूरिन की ही जांच हो पाती है। सीबीसी और अन्य जांच करवाने के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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एंबुलेंस की कमी, सीएचसी पर निर्भर सेवाएं
जिले में फिलहाल 26 एंबुलेंस है। इनमें से पांच नागरिक अस्पताल और आठ सीएचसी एंबुलेंस में हैं। पीएचसी में महज चार बेसिक स्पॉट एंबुलेंस हैं। बाकी नौ अटल जननी एंबुलेंस हैं। ऐसे में सड़क हादसे में अगर कोई घायल या फिर बीमार से ग्रस्त मरीज आता है और उसे नागरिक अस्पताल भिवानी में रेफर करना है तो यहां कोई एंबुलेंस नहीं है। ऐसे मरीजों के लिए नागरिक अस्पताल भिवानी और सीएचसी से ही एंबुलेंस आएंगी। वहीं रात के समय में तो अटल जननी एंबुलेंसों पर भी चालक नहीं है।
खांसी-जुकाम की दवाइयां का भी टोटा
अधिकतर पीएचसी पर भी दवाइयों का टोटा है। इन केंद्रों पर जीवन रक्षक दवा जिसमें खांसी, जुकाम गैस, बीपी, कफ सिरप, एंटी एलर्जी क्रीम, मानसिक रोग, आंखों व कान की दवाइयां शामिल है। ऐसे में मरीजों को जांच के बाद दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ रहा है, जहां वे 500 से 700 रुपये चुका रहे है। वहीं पीएचसी में फार्मासिस्टों का भी टोटा है, जिसके कारण दवा वितरण का कार्य स्टाफ नर्स संभाल रही है।
ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों में स्टाफ की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
एमओ 49 32 17
स्टाफ नस 50 38 12
लैब टेक्नीशियन 37 16 21
चालक 15 09 06
एमपीएचडब्ल्यू फीमेल 151 145 06
जिले की पीएचसी में चिकित्सकों की स्थिति
पीएचसी स्वीकृत पद चिकित्सक रिक्त पद
जमालपुर 07 02 05
बामला 02 02 00
खरक कलां 02 01 01
नंदगांव 02 01 01
दिनोद 02 02 00
जूई 02 01 01
ढाणी माहूं 02 01 01
तालू 02 02 00
अलखपुरा 02 02 00
सूई 02 01 01
चांग 02 02 00
बड़वा 02 01 01
गुरेरा 02 02 00
लीलस 02 02 00
झुप्पा कलां 02 01 01
सोहसरा 02 02 00
बहल 02 02 00
नकीपुर 02 01 01
ढिगावा 02 01 01
बिरण 02 02 00
संडवा 02 00 02
बुसान 02 01 01
पीएचसी में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए सीएचसी से चिकित्सकों व अन्य स्टाफ की डपुटेशन पर ड्यूटी लगाई हुई है। स्टाफ की कमी के लिए निदेशालय को कई बार पत्र लिख चुके है। जब तक नया स्टाफ नहीं आता इसी स्टाफ की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई हुई है।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन।
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चिकित्सकों की कमी के कारण मरीज को उपचार के लिए नागरिक अस्तपाल, पीजीआईएमएस रोहतक या फिर निजी अस्पतालों में अपनी जेब कटवानी पड़ रही है। इन दिनों दवाइयां की कमी तो हर स्वास्थ्य केंद्र पर है, जिसके कारण मरीजों को मेडिकल स्टोर पर अपनी जेब कटवानी पड़ रही है। जिले की 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों ने 49 स्वीकृत पद हैं, जिसमें ने 17 चिकित्सकों के पद खाली हैं। वहीं स्टाफ नर्स के भी 50 में से 12 पद खाली हैं। इसकी वजह से अन्य स्टाफ पर कार्य का भार आया हुआ है। पीएचसी पर रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की तो दूर की तो है यहां तो दंत रोग चिकित्सक भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को नागरिक अस्पताल में जाना मजबूरी बन गया है।
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मशीन नहीं होने के कारण जांच भी अटकी
पीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग ने लैब बनाई हुई है। इसमें पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण जांच भी अटक जाती है। पीएचसी पर फार्मासिस्ट के दो-दो पद हैं मगर अधिकतर में ये पद खाली है। ऐसे में यहां सिर्फ यूरिन की ही जांच हो पाती है। सीबीसी और अन्य जांच करवाने के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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एंबुलेंस की कमी, सीएचसी पर निर्भर सेवाएं
जिले में फिलहाल 26 एंबुलेंस है। इनमें से पांच नागरिक अस्पताल और आठ सीएचसी एंबुलेंस में हैं। पीएचसी में महज चार बेसिक स्पॉट एंबुलेंस हैं। बाकी नौ अटल जननी एंबुलेंस हैं। ऐसे में सड़क हादसे में अगर कोई घायल या फिर बीमार से ग्रस्त मरीज आता है और उसे नागरिक अस्पताल भिवानी में रेफर करना है तो यहां कोई एंबुलेंस नहीं है। ऐसे मरीजों के लिए नागरिक अस्पताल भिवानी और सीएचसी से ही एंबुलेंस आएंगी। वहीं रात के समय में तो अटल जननी एंबुलेंसों पर भी चालक नहीं है।
खांसी-जुकाम की दवाइयां का भी टोटा
अधिकतर पीएचसी पर भी दवाइयों का टोटा है। इन केंद्रों पर जीवन रक्षक दवा जिसमें खांसी, जुकाम गैस, बीपी, कफ सिरप, एंटी एलर्जी क्रीम, मानसिक रोग, आंखों व कान की दवाइयां शामिल है। ऐसे में मरीजों को जांच के बाद दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ रहा है, जहां वे 500 से 700 रुपये चुका रहे है। वहीं पीएचसी में फार्मासिस्टों का भी टोटा है, जिसके कारण दवा वितरण का कार्य स्टाफ नर्स संभाल रही है।
ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों में स्टाफ की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
एमओ 49 32 17
स्टाफ नस 50 38 12
लैब टेक्नीशियन 37 16 21
चालक 15 09 06
एमपीएचडब्ल्यू फीमेल 151 145 06
जिले की पीएचसी में चिकित्सकों की स्थिति
पीएचसी स्वीकृत पद चिकित्सक रिक्त पद
जमालपुर 07 02 05
बामला 02 02 00
खरक कलां 02 01 01
नंदगांव 02 01 01
दिनोद 02 02 00
जूई 02 01 01
ढाणी माहूं 02 01 01
तालू 02 02 00
अलखपुरा 02 02 00
सूई 02 01 01
चांग 02 02 00
बड़वा 02 01 01
गुरेरा 02 02 00
लीलस 02 02 00
झुप्पा कलां 02 01 01
सोहसरा 02 02 00
बहल 02 02 00
नकीपुर 02 01 01
ढिगावा 02 01 01
बिरण 02 02 00
संडवा 02 00 02
बुसान 02 01 01
पीएचसी में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए सीएचसी से चिकित्सकों व अन्य स्टाफ की डपुटेशन पर ड्यूटी लगाई हुई है। स्टाफ की कमी के लिए निदेशालय को कई बार पत्र लिख चुके है। जब तक नया स्टाफ नहीं आता इसी स्टाफ की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई हुई है।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन।