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पड़ताल: बूस्टर की लाइन से पानी चोरी, धड़ल्ले से चल रहे शहर में 50 से अधिक आरओ सिस्टम, सेहत से खिलवाड़
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भिवानी। बूस्टर तक जाने वाली मुख्य लाइनों से पानी चोरी कर शहर के अंदर धड़ल्ले से आरओ प्लांट अधिकारियों की ठीक नाक तले चल रहे हैं। भूमिगत जल का भी अत्याधिक दोहन होने से पानी का स्वाद बिगड़ गया है। कैंपर सप्लायर लाखों का पानी बेच खूब चांदी कूट रहे हैं, लेकिन कैंपर सप्लायर पानी के साथ बीमारियां भी लोगों में मुफ्त बांट रहे हैं, शायद इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है। जनस्वास्थ्य विभाग खुद प्यास से जूझ रहे शहर वासियों को बूंद-बूंद जुटाकर आपूर्ति नियमित करने में पसीने-पसीने हो रहा है, जबकि कैंपर सप्लायर अवैध रूप से मुख्य पेयजल लाइनों से पानी चोरी कर बूंद बूंद चूस रहे हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि कैंपर में सप्लाई दिया जा रहा पानी जहरीली गैसों की प्रक्रिया से होकर गुजर रहा है, इसे पीने से लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ रहा हैं, इसकी न तो कोई जांच हो रही है न ही पानी के सैंपल लेने के लिए अधिकारियों ने अभी तक कोई सकारात्मक कदम उठाया है। ऐसे में लोगों की सेहत अपने ही हाल पर है।
भिवानी शहर में करीब 35 हजार से अधिक लोगों की आबादी कैंपर सप्लायरों द्वारा दिए जा रहे कैंपर के पानी पर ही निर्भर है। शहर की सभी बाजारों व मुख्य प्रतिष्ठानों और सरकारी कार्यालयों तक में कर्मचारी कैंपर से पानी पी रहे हैं। भीषण गर्मी में पूरा शहर जल संकट झेल रहा हैं, मगर कैंपर सेवा देने वालों की सप्लाई में कमी आने के बजाय इजाफा हुआ है। एक माह पहले कैंपरों की सप्लाई करीब 50 हजार थी जो अब बढ़कर 70 हजार तक हो गई है। यानी पानी का दोहन लगभग दोगुना हो गया है। कई आरओ प्लांट तो शहर की अंदरूनी हिस्सों की कॉलोनियों में चल रहे हैं। जबकि अधिकतर आरओ सिस्टम शहर की बाहरी कॉलोनियों में लगे हैं। लगातार कैंपरों की मांग पूरी करने के चक्कर मेें दिन-रात भूमिगत जल का दोहन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। जिस कारण जमीन से जहरीली गैसों और पानी को शुद्ध करने के नाम पर इस्तेमाल होने वाली खरतरनाक रसायन व गैसों का इस्तेमाल हो रहा है। जिसकी वजह से पानी का स्वाद और उसकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।
कैंपर में सप्लाई हो रहे पानी की जांच स्वास्थ्य विभाग के एमपीएचडब्ल्यू द्वारा कराई जा रही है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट जिला प्रशासन और पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों को भेजी जा रही है। अगर पानी का सैंपल फेल आ रहा है तो इसमें संबंधित विभाग ही कार्रवाई के लिए सक्षम है।
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-डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन भिवानी।
वर्जन
हमारे पास अधिकृत पेयजल कनेक्शन शहर में करीब 35 हजार हैं, लेकिन अनाधिकृत पेयजल कनेक्शन एक लाख का आंकड़ा पार कर चुके हैं। जिसकी वजह से पेयजल आपूर्ति में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। जिला प्रशासन के साथ मिलकर अनाधिकृत पेयजल कनेक्शनों के संबंध में जल्द ही विभाग कार्रवाई के लिए कदम उठाएगा।
-प्रवीण जांगड़ा, एसडीओ, शहरी पेयजल शाखा, पब्लिक हेल्थ विभाग भिवानी।
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भिवानी शहर में करीब 35 हजार से अधिक लोगों की आबादी कैंपर सप्लायरों द्वारा दिए जा रहे कैंपर के पानी पर ही निर्भर है। शहर की सभी बाजारों व मुख्य प्रतिष्ठानों और सरकारी कार्यालयों तक में कर्मचारी कैंपर से पानी पी रहे हैं। भीषण गर्मी में पूरा शहर जल संकट झेल रहा हैं, मगर कैंपर सेवा देने वालों की सप्लाई में कमी आने के बजाय इजाफा हुआ है। एक माह पहले कैंपरों की सप्लाई करीब 50 हजार थी जो अब बढ़कर 70 हजार तक हो गई है। यानी पानी का दोहन लगभग दोगुना हो गया है। कई आरओ प्लांट तो शहर की अंदरूनी हिस्सों की कॉलोनियों में चल रहे हैं। जबकि अधिकतर आरओ सिस्टम शहर की बाहरी कॉलोनियों में लगे हैं। लगातार कैंपरों की मांग पूरी करने के चक्कर मेें दिन-रात भूमिगत जल का दोहन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। जिस कारण जमीन से जहरीली गैसों और पानी को शुद्ध करने के नाम पर इस्तेमाल होने वाली खरतरनाक रसायन व गैसों का इस्तेमाल हो रहा है। जिसकी वजह से पानी का स्वाद और उसकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।
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कैंपर में सप्लाई हो रहे पानी की जांच स्वास्थ्य विभाग के एमपीएचडब्ल्यू द्वारा कराई जा रही है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट जिला प्रशासन और पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों को भेजी जा रही है। अगर पानी का सैंपल फेल आ रहा है तो इसमें संबंधित विभाग ही कार्रवाई के लिए सक्षम है।
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-डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन भिवानी।
वर्जन
हमारे पास अधिकृत पेयजल कनेक्शन शहर में करीब 35 हजार हैं, लेकिन अनाधिकृत पेयजल कनेक्शन एक लाख का आंकड़ा पार कर चुके हैं। जिसकी वजह से पेयजल आपूर्ति में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। जिला प्रशासन के साथ मिलकर अनाधिकृत पेयजल कनेक्शनों के संबंध में जल्द ही विभाग कार्रवाई के लिए कदम उठाएगा।
-प्रवीण जांगड़ा, एसडीओ, शहरी पेयजल शाखा, पब्लिक हेल्थ विभाग भिवानी।