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सांस के रोगियों के लिए आफत बना प्रदूषण, एक्यूआई 395 पार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2022 11:33 PM IST
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Pollution became a disaster for respiratory patients
भिवानी। वातावरण में लगातार ही प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। लगातार दूसरे दिन भी एक्यूआई 400 के करीब रहा। ऐसे में लोगों को प्रदूषण से कोई राहत नहीं मिली। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में सांस के रोगियों के साथ ही आंखों में जलन के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस स्मॉग के कारण बुजुर्गों और दमा रोगियों को काफी परेशानी हुई। ओपीडी में दवा लेने पहुंचे रामकिशन, रमेश, लक्ष्मी देवी और राजबाला ने बताया कि पिछले चार दिनों से उनकी आंखों में जलन की दिक्कत हो रही है। जिसके उपचार के लिए अस्पताल में आए है।
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शुक्रवार अल सुबह से ही शहर की हवा जहरीली होनी शुरू हो गई थी। शुक्रवार सुबह चार बजे एक्यूआई 434, सुबह पांच बजे 434, छह बजे 432, सात बजे तक 430, सुबह आठ बजे 431, सुबह नौ से 11 बजे बजे 430, दोपहर 12 बजे 428, दोपहर एक बजे 422, दोपहर दो बजे 419, दोपहर तीन बजे 416, दोपहर चार बजे 412, दोपहर पांच बजे 401, शाम छह बजे 395 दर्ज हुआ।
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इन कारणों से बनता है स्मॉग
वैसे तो वातावरण में हर समय धूल व धुएं के कण मौजूद रहते हैं, मगर कुछ गतिविधियों से वातावरण में इनकी मात्रा बढ़ जाती है। अगर वातावरण में नमी की मात्रा ज्यादा है और तापमान भी कम है तो उस स्थिति में धूल व धुएं के कण नमी के साथ मिलकर बड़े आकार के व भारी हो जाते हैं और वातावरण से बाहर नहीं जा पाते। फिर यह स्मॉग (धुएं की चादर) के रूप में नजर आते हैं।
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पिछले 10 दिन के एक्यूआई की जानकारी:
दिनांक एक्यूआई
04 नवंबर 395
03 नवंबर 439
02 नवंबर 232
01 नवंबर 297
31 अक्तूबर 299
30 अक्तूबर 307
29 अक्तूबर 335
28 अक्तूबर 302
27 अक्तूबर 273
26 अक्तूबर 228
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच बेहतर, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच सामान्य, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है। वहीं, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह
बढ़ता प्रदूषण सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है। ऐसे मरीजों को घर में रहना चाहिए। साथ ही दवाइयों का सेवन टाइम पर करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह आसानी से प्रदूषण की चपेट में आ सकते हैं। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और शाम के समय घरों से कम बाहर निकलें।
- डॉ. यतिन गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, नागरिक अस्पताल।
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