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घरों में घुस रहे जहरीले जीव-जंतु, दहशत में सेक्टरवासी
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सेक्टर-13 स्थित एक मकान में निकले सांप को पकड़े हुए गोरक्षा दल का सदस्य। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। तीन दशक से अधिक अरसा बीत जाने के बावजूद भी शहर का पॉश इलाका सेक्टर 13 व 23 अपनी मूलभूत समस्याओं से नहीं उबर पाया है। बरसाती जलभराव से सेक्टर की ग्रीन बेल्ट और खाली प्लॉट तालाब बने हैं। वहीं सेक्टर की कोठियों के बीच ही झाड़ खड़े हैं, जिनके अंदर पैदा होने वाले जहरीले जीव जंतु अब लोगों के घरों के अंदर पहुंच रहे हैं, जिससे सेक्टरवासी भी दहशत में हैं। शनिवार को एक मकान में सांप घुसने से हंगामा हो गया। परिवार के सभी सदस्य डर गए और चिल्लाने लगे। गोरक्षा दल के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर सांप को पकड़ा।
सेक्टर 13 व 23 में करीब 36 हजार से अधिक मकान बने हैं, वहीं अब भी 57 प्लॉट खाली हैं, जिनमें घनी झाड़ियां उगी हैं। ये झाड़ियां सांप जैसे जहरीले जीव जंतुओं का बसेरा बन गई हैं। हमारी टीम ने सेक्टर के हालात देखे तो यहां न तो सीवर सिस्टम काम कर रहा है और न ही बारिश के पानी की निकासी के कोई पुख्ता प्रबंध हैं, जबकि प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल का निवास स्थान भी सेक्टर-13 में ही है। खाली प्लॉटों में अब पानी भर चुका है तो यहां रहने वाले जहरीले जीवजंतु अब लोगों के घरों का रुख कर रहे हैं।
भिवानी का सेक्टर 13 और 23 सन 1982 में अस्तित्व में आया था। उस समय बड़े शहरों की तर्ज पर सेक्टर के लिए भूमि अधिग्रहण की गई थी। 1988 तक यहां प्लॉटों की आवंटित कर दी गई। इस समय सेक्टर 13 में 3580 मकान और कोठियां बनी हुई हैं, जबकि सेक्टर 13 के वीकर सेक्शन में 1210 मकान बने हैं। 42 प्लॉट अभी भी खाली पड़े हैं। इसी तरह शहर के सेक्टर 23 में 1007 मकान बने हैं। इस सेक्टर में 17 प्लॉट अभी भी खाली पड़े हैं।
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पंपिंग हाउस की मोटर भी पड़ी बंद
सेक्टर में बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाए गए चैनल गंदगी से अटे पड़े हैं। कई जगह तो चैनल अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। ऐसे में दोनों सेक्टरों के अंदर बारिश के अधिकांश पानी की निकासी का सिस्टम ही बिगड़ा हुआ है। सीवर के गंदे पानी को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए बने पंपिंग हाउस के अंदर मोटरें भी खराब पड़ी हैं।
गो रक्षा दल की टीम कर रही जहरीले जीवों का रेस्क्यू
गो रक्षा दल जिला अध्यक्ष संजय परमार ने बताया कि इस समय बारिश के मौसम दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में सांप, घबेरे जैसे जहरीले जीव निकल रहे हैं। इनको जिंदा पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ने का काम उनकी टीम कर रही है। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 9315002020 जारी किया हुआ है। जिस पर कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत टीम पहुंचकर घरों के अंदर से जहरीले जीवों को रेस्क्यू करती है।
सेक्टर 13 व 23 में गंदे पानी की निकासी पर रोजाना एक लाख 45 हजार रुपये का बजट खर्च हो रहा है, जबकि एसटीपी पर प्रत्येक माह एक लाख 15 हजार रुपये का बिल बनता है। यह जानकारी मैने आरटीआई में ली है। पंपिंग स्टेशन की मोटरें खराब हैं, जिसका मुद्दा भी कई बार कष्ट निवारण समिति की बैठक में उठा चुका हूं। सेक्टर में बारिश के दिनों में जहरीले जीव जंतु घरों में पहुंच रहे हैं।
-रामकिशन शर्मा, प्रधान, रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-13, भिवानी।
सेक्टरों से बरसाती पानी की निकासी के उचित प्रबंध किए गए हैं। इसके अलावा पंपिंग स्टेशन में नई मोटरों का इंतजाम कराया गया है। सेक्टर के अधिकतर खाली प्लाटों में पानी जमा है, उनके मालिकों को भी नोटिस दिए हैं।
-धर्मबीर बूरा, एसडीओ, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण
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सेक्टर 13 व 23 में करीब 36 हजार से अधिक मकान बने हैं, वहीं अब भी 57 प्लॉट खाली हैं, जिनमें घनी झाड़ियां उगी हैं। ये झाड़ियां सांप जैसे जहरीले जीव जंतुओं का बसेरा बन गई हैं। हमारी टीम ने सेक्टर के हालात देखे तो यहां न तो सीवर सिस्टम काम कर रहा है और न ही बारिश के पानी की निकासी के कोई पुख्ता प्रबंध हैं, जबकि प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल का निवास स्थान भी सेक्टर-13 में ही है। खाली प्लॉटों में अब पानी भर चुका है तो यहां रहने वाले जहरीले जीवजंतु अब लोगों के घरों का रुख कर रहे हैं।
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भिवानी का सेक्टर 13 और 23 सन 1982 में अस्तित्व में आया था। उस समय बड़े शहरों की तर्ज पर सेक्टर के लिए भूमि अधिग्रहण की गई थी। 1988 तक यहां प्लॉटों की आवंटित कर दी गई। इस समय सेक्टर 13 में 3580 मकान और कोठियां बनी हुई हैं, जबकि सेक्टर 13 के वीकर सेक्शन में 1210 मकान बने हैं। 42 प्लॉट अभी भी खाली पड़े हैं। इसी तरह शहर के सेक्टर 23 में 1007 मकान बने हैं। इस सेक्टर में 17 प्लॉट अभी भी खाली पड़े हैं।
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पंपिंग हाउस की मोटर भी पड़ी बंद
सेक्टर में बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाए गए चैनल गंदगी से अटे पड़े हैं। कई जगह तो चैनल अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। ऐसे में दोनों सेक्टरों के अंदर बारिश के अधिकांश पानी की निकासी का सिस्टम ही बिगड़ा हुआ है। सीवर के गंदे पानी को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए बने पंपिंग हाउस के अंदर मोटरें भी खराब पड़ी हैं।
गो रक्षा दल की टीम कर रही जहरीले जीवों का रेस्क्यू
गो रक्षा दल जिला अध्यक्ष संजय परमार ने बताया कि इस समय बारिश के मौसम दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में सांप, घबेरे जैसे जहरीले जीव निकल रहे हैं। इनको जिंदा पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ने का काम उनकी टीम कर रही है। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 9315002020 जारी किया हुआ है। जिस पर कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत टीम पहुंचकर घरों के अंदर से जहरीले जीवों को रेस्क्यू करती है।
सेक्टर 13 व 23 में गंदे पानी की निकासी पर रोजाना एक लाख 45 हजार रुपये का बजट खर्च हो रहा है, जबकि एसटीपी पर प्रत्येक माह एक लाख 15 हजार रुपये का बिल बनता है। यह जानकारी मैने आरटीआई में ली है। पंपिंग स्टेशन की मोटरें खराब हैं, जिसका मुद्दा भी कई बार कष्ट निवारण समिति की बैठक में उठा चुका हूं। सेक्टर में बारिश के दिनों में जहरीले जीव जंतु घरों में पहुंच रहे हैं।
-रामकिशन शर्मा, प्रधान, रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-13, भिवानी।
सेक्टरों से बरसाती पानी की निकासी के उचित प्रबंध किए गए हैं। इसके अलावा पंपिंग स्टेशन में नई मोटरों का इंतजाम कराया गया है। सेक्टर के अधिकतर खाली प्लाटों में पानी जमा है, उनके मालिकों को भी नोटिस दिए हैं।
-धर्मबीर बूरा, एसडीओ, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण

ये है बदहाली की परछाई.... सेक्टर 13 के सामुदायिक केंद्र के साथ खाली जगह पर बरसाती जलभराव से तालाब बन च?- फोटो : Bhiwani