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पैरामेडिकल स्कूल के निदेशक और महिला प्रिंसिपल पर जेजे एक्ट के तहत केस
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भिवानी। शहर के एक पैरा मेडिकल स्कूल में पढ़ाई करने वाली एक दिव्यांग (मूकबधीर) नाबालिग लड़की को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के मामले में सिटी पुलिस ने संस्थान के निदेशक व प्रिंसिपल के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। इससे पहले पैरामेडिकल संस्थान के निदेशक पर जिला बाल संरक्षण समिति के विधि एवं परिवेक्षा अधिकारी मनोज कुमार के साथ मारपीट करने और जांच रिपोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश पर सिविल लाइन पुलिस थाने में केस दर्ज हो चुका है।
सिटी पुलिस थाने में दर्ज की गई एफआईआर में एक विधवा महिला ने बताया कि उसकी नाबालिग बेटी शहर एक पैरामेडिकल स्कूल में पढ़ाई करती है। जिउसे स्कूल के अंदर अन्य बच्चों से अलग बैठाया जाता है और उसकी बेटी को संस्थान निदेशक और प्राचार्य पिछले काफी समय से मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते आ रहे हैं। उसके साथ भी संस्थान निदेशक ने बदतमीजी की और कई बार धमकी दे चुका है। इस मामले की शिकायत महिला ने सीएम विंडो और जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के समक्ष की थी। दोनों ही शिकायतों पर जिला उपायुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में विधि एवं परिवेक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने बच्ची की काउंसलिंग कराई। बच्ची की दो बार अलग-अलग कराई गई काउंसलिंग में उसने बोल और सुन नहीं सकने की वजह से स्पेशल एजुकेटर के समक्ष इशारों में अपने साथ हुई प्रताड़ना को बयान किया था। इसके बाद जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट में दिव्यांग नाबालिग लड़की को संस्थान के निदेशक और प्राचार्या द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बातें सामने आईं। इसी आधार पर संस्थान निदेशक और प्राचार्य के खिलाफ जुवनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सिटी पुलिस थाने में केस दर्ज किया है।
दिव्यांग लड़की को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की शिकायत एक महिला ने दी है। इस मामले की पहले विभागीय जांच भी कराई जा चुकी है, इस जांच में भी निदेशक राजेश कुमार व स्कूल प्रिंसिपल शारदा को दोषी पाया गया है। दोनों के खिलाफ जुवनाइल इल जस्टिस एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी है।
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- रवींद्र कुमार, एसएचओ सिटी पुलिस थाना।
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सिटी पुलिस थाने में दर्ज की गई एफआईआर में एक विधवा महिला ने बताया कि उसकी नाबालिग बेटी शहर एक पैरामेडिकल स्कूल में पढ़ाई करती है। जिउसे स्कूल के अंदर अन्य बच्चों से अलग बैठाया जाता है और उसकी बेटी को संस्थान निदेशक और प्राचार्य पिछले काफी समय से मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते आ रहे हैं। उसके साथ भी संस्थान निदेशक ने बदतमीजी की और कई बार धमकी दे चुका है। इस मामले की शिकायत महिला ने सीएम विंडो और जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के समक्ष की थी। दोनों ही शिकायतों पर जिला उपायुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में विधि एवं परिवेक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने बच्ची की काउंसलिंग कराई। बच्ची की दो बार अलग-अलग कराई गई काउंसलिंग में उसने बोल और सुन नहीं सकने की वजह से स्पेशल एजुकेटर के समक्ष इशारों में अपने साथ हुई प्रताड़ना को बयान किया था। इसके बाद जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट में दिव्यांग नाबालिग लड़की को संस्थान के निदेशक और प्राचार्या द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बातें सामने आईं। इसी आधार पर संस्थान निदेशक और प्राचार्य के खिलाफ जुवनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सिटी पुलिस थाने में केस दर्ज किया है।
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दिव्यांग लड़की को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की शिकायत एक महिला ने दी है। इस मामले की पहले विभागीय जांच भी कराई जा चुकी है, इस जांच में भी निदेशक राजेश कुमार व स्कूल प्रिंसिपल शारदा को दोषी पाया गया है। दोनों के खिलाफ जुवनाइल इल जस्टिस एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी है।
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- रवींद्र कुमार, एसएचओ सिटी पुलिस थाना।