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Bhiwani News: एनएचएम के सहारे रही ओपीडी व आपातकालीन विभाग, ऑपरेशन, अल्ट्रासाउंड और पोस्टमार्टम बंद
Fri, 26 Jul 2024 02:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 26 Jul 2024 02:59 AM IST
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नागरिक अस्पताल में पर्ची बनवाने वालों की लगी भीड़।
भिवानी। जिला नागरिक अस्पताल सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वीरवार को सरकारी चिकित्सकों की हड़ताल का असर देखा गया। एनएचएम के कर्मचारियों ने ओपीडी, आपातकालीन विभाग, लेबर रूम से लेकर पीएचसी-सीएचसी में जिम्मा संभाला। वहीं जिला मुख्यालय के अस्पताल में ऑपरेशन, अल्ट्रासाउंड और पोस्टमार्टम बंद रहे।
दो घंटे तक सिविल सर्जन ने भी ओपीडी में बैठकर मरीज जांचे। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी। वार्डों में दाखिल मरीज अपने ही हाल पर रहे। वहीं ऑनलाइन ओपीडी पर्ची का काम भी बंद रहा। कर्मचारियों ने मैनुअल ओपीडी पर्ची काटी। अन्य दिनों के मुकाबले जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की भी कम भीड़ जुटी।
राजकीय चिकित्सक अपनी चार लंबित मांगों को लेकर वीरवार को हड़ताल पर चले गए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने राजकीय चिकित्सकों की हड़ताल के विकल्प के तौर पर ओपीडी से लेकर आपात विभाग और पोस्टमार्टम तक की सेवाओं में वैकल्पिक व्यवस्था कराई गई बावजूद इसके भी स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई। सिविल सर्जन डाॅ. रघुवीर शांडिल्य ने अस्पताल का वीरवार सुबह निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जांचीं। उन्होंने राजकीय चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से एनएचएम के तहत लगे चिकित्सकों व आयुर्वेदिक चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ की व्यवस्था कराई थी। जिले में करीब 20 से अधिक चिकित्सक हड़ताल पर रहे। ऐसे में जरूरी सेवाओं पर भी इनका असर पड़ा। नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हुए, जबकि सामान्य दिनों में रोजाना 55 से 60 मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते थे। वहीं दस से 15 ऑपरेशन भी जिला मुख्यालय के अस्पताल में होते थे।
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कर्मचारियों ने मैनुअल काटी ओपीडी पर्ची
जिला नागरिक अस्पताल में नियमित चिकित्सकों की ओपीडी की ऑनलाइन पर्ची काटी जाती है। लेकिन चिकित्सक हड़ताल पर चले जाने से ऑनलाइन ओपीडी पर्ची का काम भी बंद हो गया। करीब दो घंटे तक ओपीडी पर्ची काउंटर पर काम प्रभावित रहा। इसके बाद कर्मचारियों ने एनएचएम के तहत लगे चिकित्सकों की ओपीडी के लिए ऑफलाइन पर्ची काटना शुरू किया। इस दौरान ओपीडी पर्ची कटवाने के लिए भी मरीजों की लाइनें लगी रहीं।
वार्डाें में भी चिकित्सकों ने नहीं किया निरीक्षण
हडताल के दौरान चिकित्सकों ने वार्डों में दाखिल मरीजों का चेकअप नहीं किया। इस दौरान वार्डों में दाखिल मरीज वहां तैनात स्टाफ नर्स के भरोसे ही रहे। चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से जिन मरीजों की अस्पताल से छुट्टी होनी थी वह भी नहीं हो पाई। जबकि मरीजों का चेकअप कर उनकी दवाइयों में भी फेरबदल किया जाना था वह भी नहीं हो पाया। मरीजों को रूटीन में ही वहां तैनात स्टाफ ने दवाइयां दीं।
चिकित्सकों की हड़ताल की वैकल्पिक व्यवस्था पहले से ही कर दी गई थी, जिसकी वजह से सभी चिकित्सकों की ओपीडी खुली रही है। हमने लेबर रूम से लेकर पोस्टमार्टम कक्ष और पीएचसी सीएचसी स्तर पर भी चिकित्सकों की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों की मांगों को जायज माना है, उनकी मांगे भी जल्द पूरी होने की संभावना है।
- डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
मेरी आंखों में काफी समय से परेशानी चल रही है। वीरवार को मैं सामान्य अस्पताल में आंख बनवाने के लिए आया था। अस्पताल आने पर मुझे पता चला कि आज चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण मेरी आंखें नहीं बन पाई और मुझे बिना आंख दिखाए ही वापस लौटना पड़ा।
- जगदीश, लोहारू निवासी।
मैंने अपने बेटे की खून की जांच करवाई थी। असकी रिपोर्ट लेकर चिकित्सक को दिखाकर इलाज करवाना था। लेकिन अस्पताल आने पर मुझे पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण मैं अपने बेटे का इलाज नहीं करवा पाया। हमें बिना इलाज करवाए ही वापस जाना पड़ा।
- विरेंद्र, कलिंगा निवासी।
मैं वीरवार को सामान्य अस्पताल में अपने पापा का इलाज करवाने के लिए आया था। हमें अस्पताल में आने पर पता चला की चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण मेरे पिता का इलाज नहीं हो सका। इसके कारण हमें परेशानी का सामना करना पड़ा।
- सुमित शर्मा, देवसर निवासी।
मुझे पैर में तकलीफ है। इसके इलाज के लिए मैं वीरवार को सामान्य अस्पताल में आई थी। अस्पताल आने पर मुझे पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण बिना इलाज करवाए ही वापिस जाना पड़ा। इससे मुझे परेशानी का सामना करना पड़ा।
- धनपति, भिवानी निवासी ।
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दो घंटे तक सिविल सर्जन ने भी ओपीडी में बैठकर मरीज जांचे। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी। वार्डों में दाखिल मरीज अपने ही हाल पर रहे। वहीं ऑनलाइन ओपीडी पर्ची का काम भी बंद रहा। कर्मचारियों ने मैनुअल ओपीडी पर्ची काटी। अन्य दिनों के मुकाबले जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की भी कम भीड़ जुटी।
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राजकीय चिकित्सक अपनी चार लंबित मांगों को लेकर वीरवार को हड़ताल पर चले गए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने राजकीय चिकित्सकों की हड़ताल के विकल्प के तौर पर ओपीडी से लेकर आपात विभाग और पोस्टमार्टम तक की सेवाओं में वैकल्पिक व्यवस्था कराई गई बावजूद इसके भी स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई। सिविल सर्जन डाॅ. रघुवीर शांडिल्य ने अस्पताल का वीरवार सुबह निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जांचीं। उन्होंने राजकीय चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से एनएचएम के तहत लगे चिकित्सकों व आयुर्वेदिक चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ की व्यवस्था कराई थी। जिले में करीब 20 से अधिक चिकित्सक हड़ताल पर रहे। ऐसे में जरूरी सेवाओं पर भी इनका असर पड़ा। नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हुए, जबकि सामान्य दिनों में रोजाना 55 से 60 मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते थे। वहीं दस से 15 ऑपरेशन भी जिला मुख्यालय के अस्पताल में होते थे।
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कर्मचारियों ने मैनुअल काटी ओपीडी पर्ची
जिला नागरिक अस्पताल में नियमित चिकित्सकों की ओपीडी की ऑनलाइन पर्ची काटी जाती है। लेकिन चिकित्सक हड़ताल पर चले जाने से ऑनलाइन ओपीडी पर्ची का काम भी बंद हो गया। करीब दो घंटे तक ओपीडी पर्ची काउंटर पर काम प्रभावित रहा। इसके बाद कर्मचारियों ने एनएचएम के तहत लगे चिकित्सकों की ओपीडी के लिए ऑफलाइन पर्ची काटना शुरू किया। इस दौरान ओपीडी पर्ची कटवाने के लिए भी मरीजों की लाइनें लगी रहीं।
वार्डाें में भी चिकित्सकों ने नहीं किया निरीक्षण
हडताल के दौरान चिकित्सकों ने वार्डों में दाखिल मरीजों का चेकअप नहीं किया। इस दौरान वार्डों में दाखिल मरीज वहां तैनात स्टाफ नर्स के भरोसे ही रहे। चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से जिन मरीजों की अस्पताल से छुट्टी होनी थी वह भी नहीं हो पाई। जबकि मरीजों का चेकअप कर उनकी दवाइयों में भी फेरबदल किया जाना था वह भी नहीं हो पाया। मरीजों को रूटीन में ही वहां तैनात स्टाफ ने दवाइयां दीं।
चिकित्सकों की हड़ताल की वैकल्पिक व्यवस्था पहले से ही कर दी गई थी, जिसकी वजह से सभी चिकित्सकों की ओपीडी खुली रही है। हमने लेबर रूम से लेकर पोस्टमार्टम कक्ष और पीएचसी सीएचसी स्तर पर भी चिकित्सकों की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों की मांगों को जायज माना है, उनकी मांगे भी जल्द पूरी होने की संभावना है।
- डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
मेरी आंखों में काफी समय से परेशानी चल रही है। वीरवार को मैं सामान्य अस्पताल में आंख बनवाने के लिए आया था। अस्पताल आने पर मुझे पता चला कि आज चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण मेरी आंखें नहीं बन पाई और मुझे बिना आंख दिखाए ही वापस लौटना पड़ा।
- जगदीश, लोहारू निवासी।
मैंने अपने बेटे की खून की जांच करवाई थी। असकी रिपोर्ट लेकर चिकित्सक को दिखाकर इलाज करवाना था। लेकिन अस्पताल आने पर मुझे पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण मैं अपने बेटे का इलाज नहीं करवा पाया। हमें बिना इलाज करवाए ही वापस जाना पड़ा।
- विरेंद्र, कलिंगा निवासी।
मैं वीरवार को सामान्य अस्पताल में अपने पापा का इलाज करवाने के लिए आया था। हमें अस्पताल में आने पर पता चला की चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण मेरे पिता का इलाज नहीं हो सका। इसके कारण हमें परेशानी का सामना करना पड़ा।
- सुमित शर्मा, देवसर निवासी।
मुझे पैर में तकलीफ है। इसके इलाज के लिए मैं वीरवार को सामान्य अस्पताल में आई थी। अस्पताल आने पर मुझे पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर है। इसके कारण बिना इलाज करवाए ही वापिस जाना पड़ा। इससे मुझे परेशानी का सामना करना पड़ा।
- धनपति, भिवानी निवासी ।