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Haryana Board 12th result: ऑब्जेक्टिव प्रश्नों ने खोली परीक्षार्थियों की किस्मत, अच्छे अंकों ने बना दी पर्सेंटेज

Thu, 16 Jun 2022 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 16 Jun 2022 12:12 AM IST
सार

इस बार अधिकतर परीक्षार्थियों ने 30 से अधिक अंक हासिल किए हैं। कुछ के तो 35 से 38 अंक भी है। जिससे परीक्षार्थी न केवल पास हो रहे हैं बल्कि उनकी पर्सेंटेज भी अच्छी बन रही है।

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Objective questions opened the luck of the examinees, did not get good marks only
ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल। - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

कोरोना काल से पहले हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का परिणाम 60 से 65 फीसदी के बीच ही रहता था। 2019 में परिणाम जरूर 74 फीसदी तक पहुंचा। मगर कोरोना काल और उसके बाद अब प्रश्न पत्रों के पैटर्न में आए बदलाव ने विद्यार्थियों की किस्मत ही खोल दी है। पहले महज 15-16 अंक के बहुविकल्प प्रश्न होते थे। अब बोर्ड प्रशासन 40 अंक के बहुविकल्पी प्रश्न दे रहा है, जिनमें अधिकतर परीक्षार्थी अच्छे अंक हासिल कर रहे हैं।
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बोर्ड के सूत्र बताते हैं कि इस बार अधिकतर परीक्षार्थियों ने 30 से अधिक अंक हासिल किए हैं। कुछ के तो 35 से 38 अंक भी है। जिससे परीक्षार्थी न केवल पास हो रहे हैं बल्कि उनकी पर्सेंटेज भी अच्छी बन रही है। इसके विपरीत अगर सब्जेक्टिव की बात करें तो परिणाम निराशाजनक हैं। 30 से 35 फीसदी परीक्षार्थी ही 25 या इससे अधिक अंक हासिल कर पाए हैं। जो फेल हुए हैं उनमें से काफी बच्चे सब्जेक्टिव में फेल हुए हैं। 
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नाम के मॉडल संस्कृति स्कूल, परिणाम में फिसड्डी

प्रदेश में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रदेश सरकार ने ब्लॉक स्तर पर मॉडल संस्कृति स्कूल खोले हैं। जहां बेहतरीन विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से शिक्षा का स्तर ऊंचा करने की योजना है। यहां सभी सुविधाएं देने, ऑनलाइन पढ़ाई का बेहतर विकल्प देने की बात कही जा रही है। साथ ही इन्हें अब सीबीएसई से भी जोड़ने की बात चल रही है। अब परिणाम की बात करें तो ये फिसड्डी साबित हुए। निजी स्कूल का पास प्रतिशत 89.72 रहा। राजकीय विद्यालयों के 85.46 फीसदी परीक्षार्थी पास हुए हैं। मॉडल संस्कृति स्कूलों की बात करें तो इनके 83 फीसदी ही परीक्षार्थी पास हुए हैं।
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बच्चे अब पढ़ाई पर लगा रहे ध्यान तो शिक्षा का स्तर भी उठ रहा ऊंचा : प्रो. जगबीर सिंह

प्रदेश में अब शिक्षा का माहौल बन रहा है और सभी बच्चे अच्छी नौकरी के लिए शिक्षा के क्षेत्र में स्पर्धा कर रहे हैं। चाहे ग्रामीण बच्चे हो या शहरी, सभी को अब लगने लगा है कि शिक्षा से ही वे आगे बढ़ सकते हैं, अपने और अपनों के सपने पूरे कर सकते हैं। इसलिए हर किसी का ध्यान अब पढ़ाई पर है। बच्चे पढ़ाई पर ध्यान लगा रहे हैं तो शिक्षा का स्तर भी ऊंचा उठ रहा है और परिणाम भी बेहतर मिल रहे हैं। यह कहना है हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. जगबीर सिंह का। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों अब शिक्षा का स्तर लगातार ऊंचा उठ रहा है। 

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन से परिणाम को लेकर सीधी बातचीत

सवाल : बोर्ड का परिणाम लगातार सुधर रहा है। इस बार ऐतिहासिक परिणाम रहा। इसके क्या कारण रहे?
जवाब : अब बच्चे मेहनत कर रहे हैं। बच्चों में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इसके अलावा बोर्ड की ओर से कोरोना महामारी के कारण 30 फीसदी सिलेबस कम किया गया था। 70 फीसदी सिलेबस में भी बहुविकल्प और सब्जेक्टिव प्रश्न रहे, जिससे परिणाम सुधरा है।
सवाल : बहुविकल्प प्रश्नों का परिणाम सुधारने में कितना योगदान है?
जवाब : परिणाम सुधारने में बहुविकल्प प्रश्नों का 100 फीसदी योगदान है। 40 अंक के बहुविकल्प प्रश्न दिए गए। जिसमें सभी परीक्षार्थियों का परिणाम बेहतर है। जिससे ओवरऑल परिणाम भी बेहतर हुआ।
सवाल : लड़कियों ने इस बार भी बाजी मारी, इसका क्या कारण मानें?
जवाब : आज माहौल बदल रहा है और सभी अभिभावक अपनी बेटियों को भी आगे बढ़ने का पूरा मौका दे रहे हैं। मेरी स्वयं की दो बेटियां है और उन्हें हर तरह का सहयोग है। इसके अलावा इंटरनेट से बेटियों ने पढ़ाई कर बेहतर परिणाम दिए हैं। बेटे इंटरनेट से थोड़ा भटक गए, जिस कारण उनका परिणाम कम रहा।
सवाल : इस बार ग्रामीण क्षेत्रों का परिणाम ज्यादा बेहतर है। इसका क्या कारण मानें?
जवाब : अब ग्रामीण स्तर के लोग भी अपना जीवन स्तर सुधारने के लिए शिक्षा पर जोर दे रहे हैं। सरकार मेरिट के आधार पर नौकरियां दे रही है तो ग्रामीण बच्चे नौकरी के लिए पढ़ाई पर फोकस कर रहे हैं।

सवाल : सरकारी स्कूलों में परिणाम अभी भी निजी की तुलना अच्छे नहीं मिल रहे, क्यों?
जवाब : सरकारी स्कूलों का परिणाम भी सुधरा है। सरकारी स्कूलों में अधिकतर गरीब तबके के बच्चे होते है, जिन्हें इंटरनेट की पूरी सुविधा नहीं मिल पाती। इस बार सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को टैब दिए हैं, उम्मीद है कि इसके बेहतर परिणाम होंगे।
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