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खबर का असर: अब शहर से पकड़े जाएंगे पहले चरण में दो हजार बंदर, नगर परिषद ने ठेकेदारों से मांगी कोटेशन
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घरों के ऊपर घूमते बंदर। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। नगर परिषद अब पहले चरण में शहरभर से करीब दो हजार बंदरों को पकड़वाएगा। इसके लिए नगर परिषद ने बंदर पकड़ने वाले ठेकेदारों से कोटेशन मांगी है। इसके बाद दिसंबर के अंतिम माह से बंदर पकड़ने का काम भी शहर में शुरू हो जाएगा। अमर उजाला ने गत आठ दिसंबर के अंक में बंदरों का उत्पात बढ़ा घरों से निकलना हुआ दुश्वार शीर्षक के साथ प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर मुद्दा उठाया था। इसके बाद नगर परिषद ने शहरभर से बंदर पकड़ने की दिशा में कदम उठाया है। शहर में बंदरों के उत्पात से शहरवासी भयभीत हैं। पार्कों में भी बंदरों का उत्पात छोटे बच्चों व महिलाओं के लिए खतरा बना है।
शहरी दायरे की करीब साढ़े चार लाख की आबादी के मुकाबले शहर में करीब पांच से छह हजार बंदर हैं। ये बंदर घरों की छतों और गली मोहल्लों के साथ पार्कों में भी विचरण कर रहे हैं। आसपास कोई भी इंसान नजर आता है तो उसकी तरफ काटने को दौड़ पड़ते हैं। हर माह बंदरों के काटने से भी 20 से अधिक लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। करीब दो साल पहले नगर परिषद ने शहर से बंदर पकड़ने का अभियान चलाया था। लेकिन ये अभियान शुरूआत में ठीक चला, मगर इसे अचानक ही बंद करा दिया गया। इसके बाद शहर में लगातार बंदरों की आबादी भी बढ़ती गई और उनका उत्पात भी शहरवासियों के लिए मुसीबत बना। अब आलम यह है कि लोग भी बंदरों के भय से अपने घरों की छतों पर जाने से डर रहे हैं। नगर परिषद ने शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए बंदर पकड़ने का ठेका देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत बंदर पकड़ने वाले ठेकेदारों से प्रति बंदर पकड़ने की कोटेशन मांगी गई है। इसके बाद निर्धारित रेट तय होते ही शहर में बंदर पकड़ने का काम भी शुरू हो जाएगा।
पार्क में बंदर सेक रहे हैं धूप, झूलों पर भी कब्जा
सर्दी के मौसम में दिनभर शहर के पार्कों में बंदर धूप सेक रहे हैं और बच्चों के लिए लगाए गए झूलों पर भी बंदरों का कब्जा है। शहर के नेहरू पार्क में ओपन जिम और झूलों पर दिनभर बंदर ही उटखेलियां करते दिखाई देते हैं, जबकि बच्चे झूलों के पास जाने से भी बंदरों की वजह से डर रहे हैं। कुछ लोग खाने पीने की चीजें भी पार्कों में फेंक देते हैं, जिसकी वजह से भी बंदर पार्कों में दिनभर इधर उधर घूमते हैं, जो यहां बैठे लोगों को भी काटने को दौड़ते हैं।
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शहर को बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद ने बंदर पकड़ने के लिए ठेकेदारों से कोटेशन मांगी है। इसके बाद एक रेट तय कर ठेकेदार को शहर भर से पहले चरण में दो हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया जाएगा। ये काम दिसंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाएगा।
-भवानी प्रताप, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद भिवानी।
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शहरी दायरे की करीब साढ़े चार लाख की आबादी के मुकाबले शहर में करीब पांच से छह हजार बंदर हैं। ये बंदर घरों की छतों और गली मोहल्लों के साथ पार्कों में भी विचरण कर रहे हैं। आसपास कोई भी इंसान नजर आता है तो उसकी तरफ काटने को दौड़ पड़ते हैं। हर माह बंदरों के काटने से भी 20 से अधिक लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। करीब दो साल पहले नगर परिषद ने शहर से बंदर पकड़ने का अभियान चलाया था। लेकिन ये अभियान शुरूआत में ठीक चला, मगर इसे अचानक ही बंद करा दिया गया। इसके बाद शहर में लगातार बंदरों की आबादी भी बढ़ती गई और उनका उत्पात भी शहरवासियों के लिए मुसीबत बना। अब आलम यह है कि लोग भी बंदरों के भय से अपने घरों की छतों पर जाने से डर रहे हैं। नगर परिषद ने शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए बंदर पकड़ने का ठेका देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत बंदर पकड़ने वाले ठेकेदारों से प्रति बंदर पकड़ने की कोटेशन मांगी गई है। इसके बाद निर्धारित रेट तय होते ही शहर में बंदर पकड़ने का काम भी शुरू हो जाएगा।
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पार्क में बंदर सेक रहे हैं धूप, झूलों पर भी कब्जा
सर्दी के मौसम में दिनभर शहर के पार्कों में बंदर धूप सेक रहे हैं और बच्चों के लिए लगाए गए झूलों पर भी बंदरों का कब्जा है। शहर के नेहरू पार्क में ओपन जिम और झूलों पर दिनभर बंदर ही उटखेलियां करते दिखाई देते हैं, जबकि बच्चे झूलों के पास जाने से भी बंदरों की वजह से डर रहे हैं। कुछ लोग खाने पीने की चीजें भी पार्कों में फेंक देते हैं, जिसकी वजह से भी बंदर पार्कों में दिनभर इधर उधर घूमते हैं, जो यहां बैठे लोगों को भी काटने को दौड़ते हैं।
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शहर को बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद ने बंदर पकड़ने के लिए ठेकेदारों से कोटेशन मांगी है। इसके बाद एक रेट तय कर ठेकेदार को शहर भर से पहले चरण में दो हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया जाएगा। ये काम दिसंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाएगा।
-भवानी प्रताप, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद भिवानी।