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चिकित्सक नहीं लिखेगा बाहर से एक्सरे और टेस्ट, निजी एंबुलेंस की भी अस्पताल में नो एंट्री
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भिवानी। चौ. बंसीलाल जिला नागरिक अस्पताल में मरीज को रेफर करने से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक में चल रहे दलालों और चिकित्सकों के बीच कमीशनखोरी के खेल में स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को शिकायत करने के बाद एनएचएम के निदेशक को जांच की जिम्मेवारी सौंपी थी। इस मामले में जांच के बाद प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने आदेश जारी किए हैं कि कोई भी चिकित्सक अब बाहरी लैब से टेस्ट और एक्सरे किसी मरीज के नहीं लिखेगा और किसी भी बाहरी व्यक्ति व लैब संचालक को चिकित्सक अपने पास नहीं बैठने देगा। प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने यह भी आदेश जारी किया है कि कोई भी इमरजेंसी से मरीज रेफर किए जाने पर केवल सरकारी एंबुलेंस ही भेजी जाएगी। कोई भी निजी एंबुलेंस चालक सरकारी अस्पताल परिसर में दाखिल नहीं होगा। आदेश में यह भी कहा कि अक्सर प्राइवेट एंबुलेंस चालक अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमते हैं, जिससे अस्पताल व विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि उन्होंने बंसीलाल नागरिक अस्पताल में मरीज को रेफर किए जाने से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक बाहर से सामान मंगवाने में दलालों और चिकित्सकों की कमीशनखोरी की शिकायत दस अगस्त 2019 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को दी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 सितंबर को एनएचएम के निदेशक को मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 22 जनवरी को जांच कमेटी के सामने बृजपाल सिंह परमार ने व्यक्तिगत रूप से जांच शामिल होकर मामले से जुड़े तथ्य रखे। इसके बाद फिर आठ मई को जांच कमेटी के समक्ष दोबारा से जांच में शामिल होकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया। जांच कमेटी के बाद बंसीलाल नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने 14 मई को दो अलग-अलग आदेश जारी कर दिए। एक आदेश में चिकित्सकों पर बाहरी लैब से टेस्ट और एक्सरे नहीं कराए जाने और बाहरी लैब से जुड़े लोगों को अस्पताल परिसर में दाखिल नहीं होने देने के आदेश दिए हैं। इसी के साथ दूसरे आदेश में रेफर मरीज को केवल सरकारी एंबुलेंस में ही भेजने के सख्त हिदायतें दी हैं और प्राइवेट एंबुलेंस चालकों को अस्पताल में प्रवेश नहीं देने के आदेश दिए हैं।
ये चल रहा था खेल
बृजपाल सिंह परमार ने अपनी शिकायत में बताया था कि नागरिक अस्पताल में लंबे अर्से से चिकित्सकों की दलालों के साथ सांठगांठ चल रही थी। एक मरीज के ऑपरेशन में 2600 रुपये की प्लेट को आठ हजार रुपये में उपलब्ध कराया गया था। ये सामान सिर्फ एक ही निर्धारित दुकान से खरीदने की मरीज को सख्त हिदायतें दी गई थीं। इसमें चिकित्सक का मोटा कमीशन होता था। ये दुकानदार ही अकेला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर के अंदर मरीज के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान उपलब्ध कराता रहा। जिसके काफी सबूत थी जांच के दौरान कमेटी के समक्ष रखे गए थे।
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सभी चिकित्सकों, कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि जो टेस्ट की सुविधा अस्पताल में उपलब्ध है, वे यहीं करवाए। अगर मरीज को रेफर किया जाता है तो भी सरकारी एंबुलेंस से ही किया जाए। अस्पताल परिसर या आसपास किसी भी प्राइवेट एंबुलेंस को खड़ी किए जाने की अनुमति नहीं है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. मंजू कादयान, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि उन्होंने बंसीलाल नागरिक अस्पताल में मरीज को रेफर किए जाने से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक बाहर से सामान मंगवाने में दलालों और चिकित्सकों की कमीशनखोरी की शिकायत दस अगस्त 2019 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को दी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 सितंबर को एनएचएम के निदेशक को मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 22 जनवरी को जांच कमेटी के सामने बृजपाल सिंह परमार ने व्यक्तिगत रूप से जांच शामिल होकर मामले से जुड़े तथ्य रखे। इसके बाद फिर आठ मई को जांच कमेटी के समक्ष दोबारा से जांच में शामिल होकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया। जांच कमेटी के बाद बंसीलाल नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने 14 मई को दो अलग-अलग आदेश जारी कर दिए। एक आदेश में चिकित्सकों पर बाहरी लैब से टेस्ट और एक्सरे नहीं कराए जाने और बाहरी लैब से जुड़े लोगों को अस्पताल परिसर में दाखिल नहीं होने देने के आदेश दिए हैं। इसी के साथ दूसरे आदेश में रेफर मरीज को केवल सरकारी एंबुलेंस में ही भेजने के सख्त हिदायतें दी हैं और प्राइवेट एंबुलेंस चालकों को अस्पताल में प्रवेश नहीं देने के आदेश दिए हैं।
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ये चल रहा था खेल
बृजपाल सिंह परमार ने अपनी शिकायत में बताया था कि नागरिक अस्पताल में लंबे अर्से से चिकित्सकों की दलालों के साथ सांठगांठ चल रही थी। एक मरीज के ऑपरेशन में 2600 रुपये की प्लेट को आठ हजार रुपये में उपलब्ध कराया गया था। ये सामान सिर्फ एक ही निर्धारित दुकान से खरीदने की मरीज को सख्त हिदायतें दी गई थीं। इसमें चिकित्सक का मोटा कमीशन होता था। ये दुकानदार ही अकेला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर के अंदर मरीज के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान उपलब्ध कराता रहा। जिसके काफी सबूत थी जांच के दौरान कमेटी के समक्ष रखे गए थे।
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सभी चिकित्सकों, कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि जो टेस्ट की सुविधा अस्पताल में उपलब्ध है, वे यहीं करवाए। अगर मरीज को रेफर किया जाता है तो भी सरकारी एंबुलेंस से ही किया जाए। अस्पताल परिसर या आसपास किसी भी प्राइवेट एंबुलेंस को खड़ी किए जाने की अनुमति नहीं है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. मंजू कादयान, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल