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Bhiwani News: अब मंडियों में बाजरा आवक की रफ्तार देख हांफने लगीं खरीद एजेंसियां
Tue, 03 Oct 2023 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 03 Oct 2023 11:16 PM IST
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भिवानी। अब मंडियों में बाजरा आवक की रफ्तार देखकर खरीद एजेंसियां भी हांफने लगी हैं। अभी तक बाजरा का आधा खरीद सीजन भी नहीं बीता है कि पिछले साल की खरीद का आंकड़ा मंडियों ने छू लिया है।
पिछले साल भिवानी और चरखी दादरी की 13 मंडियों में छह लाख बाजरा के कट्टों की खरीद हुई थी, यानी तीन लाख क्विंटल। जबकि प्रदेशभर में करीब 40 लाख क्विंटल बाजरा खरीद हुआ था। अब तक भिवानी और चरखी दादरी की मंडियों में पांच लाख 25 हजार क्विंटल बाजरा की आवक हो चुकी है। इसी रफ्तार से आवक को देखकर इस बार 12 लाख कट्टों की खरीद की संभावना भी जताई जा रही है। इसी से आशंकित खरीद एजेंसियों के अधिकारी नए गोदामों की तलाश में भी जुटे हैं ताकि खरीद हो चुके बाजरे का भंडारण सुनिश्चित किया जा सके।
भिवानी जिले में करीब ढाई लाख एकड़ से अधिक भूमि में बाजरा की बिजाई हुई थी। हालांकि मौसम की बेरुखी और लौटते मानसून में बारिश की कमी के बावजूद किसानों को बाजरे में अच्छी खासी पैदावार मिली। यही वजह रही कि मंडियों में अब बंपर आवक बनी है। भिवानी जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र की 11 मंडियों में बाजरा की सरकारी खरीद हो रही है। इससे पहले भी करीब 50 हजार क्विंटल बाजरा तो किसान प्राइवेट तौर पर बेच चुके हैं। बावजूद इसके करीब सात हजार से अधिक किसान अब तक सरकारी खरीद एजेंसियों को दे चुके हैं।
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भिवानी और चरखी दादरी को मिलाकर हैफेड के माध्यम से अब तक पांच लाख 25 हजार कट्टों की खरीद हो चुकी है। जबकि इन दोनों ही जिलों में सरकारी एजेंसियों ने करीब छह लाख कट्टों की बाजरा खरीद की थी। पिछले साल की खरीद का आंकड़ा तो अभी से छू लिया है जबकि अभी बाजरा की सरकारी खरीद का ठीक से सीजन भी शुरू नहीं हुआ है। सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारी भी खुद मान रहे हैं कि बाजरा की आवक पिछले सीजन से इस बार दोगुनी हो सकती है। इसी संभावना के चलते खरीद एजेंसियों के अधिकारी अपने संसाधनों को बढ़ाने और जुटाने में लगे हैं। संवाद
इस बार जूट के बारदाने में हो रही है बाजरा की भराई
भिवानी जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र की मंडियों में इस बार खरीद एजेंसियां जूट का बारदाना इस्तेमाल कर रही हैं। जबकि पिछले सीजन में प्लास्टिक का बारदाना बाजरा खरीद मेंं इस्तेमाल किया गया था। जूट का बारदाना प्लास्टिक बारदाने से कहीं अधिक टिकाऊ है। खरीद एजेंसियों को इस बार पिछले सीजन से दोगुनी आवक की आशंका है। इसलिए नया बारदाना मंगवाने की भी डिमांड भेजी है। जूट का ये बारदाना कोलकाता से यहां लाया जाता है। इस बारदाना के ट्रांसपोर्टेशन में ही 15 दिन से अधिक लग जाते हैं।
हैफेड ने हायर किए हैं प्राइवेट गोदाम
सरकारी खरीद के बाद बाजरे का उठान कराकर हैफेड अपने हायर किए हुए गोदामों में भंडारण कर रही है। जिले के आसपास ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट गोदाम लीज पर लिए गए हैं, जिनके अंदर बाजरे का भंडारण किया जा रहा है। ढुलाई ठेकेदार गोदामों तक बाजरा पहुंचा रहे हैं।
वेयर हाउस के हवाले खरीद की तैयारी
हैफेड ने कॉमर्शियल खरीद का लक्ष्य करीब पूरा कर लिया है। इसके बाद अब वेयर हाउस कारपोरेशन के हवाले बाजरा की सरकारी खरीद एमएसपी पर की जाएगी। वेयर हाउस के खुद के गोदाम हैं, जो खरीद के बाद इसका भंडारण भी सुनिश्चित करेगी। बाजरे का सुरक्षित भंडारण करीब एक साल तक ही अच्छा समझा जाता है। इसके बाद इसकी गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है।
सरकारी राशन में भी चखेंगे बीपीएल परिवार बाजरे का स्वाद
खरीद के बाद बाजरा सरकारी राशन डिपो के माध्यम से बीपीएल परिवारों में वितरित होगा। इसके बाद गरीब परिवार भी बाजरे का स्वाद चख पाएंगे। हालांकि बाजरे की प्राइवेट बिक्री भी सरकार करेंगी। इसका निर्यात विदेशों में भी किए जाने की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल ज्यादातर बाजरा मुर्गी फार्मों में मुर्गियों के फीड में भी इस्तेमाल किया जाता है।
बाजरा की इस बार बंपर आवक है। पिछले सीजन में करीब छह लाख कट्टों की खरीद हुई थी, इस बार इससे दोगुनी खरीद की संभावना है। इसी हिसाब से संसाधन भी जुटाए जा रहे हैं। हैफेड के अलावा वेयर हाउस कॉरपोरेशन द्वारा भी बाजरे की एमएसपी पर खरीद कराई जानी है।
-राजेंद्र सिंह, जिला प्रबंधक हैफेड, भिवानी।
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पिछले साल भिवानी और चरखी दादरी की 13 मंडियों में छह लाख बाजरा के कट्टों की खरीद हुई थी, यानी तीन लाख क्विंटल। जबकि प्रदेशभर में करीब 40 लाख क्विंटल बाजरा खरीद हुआ था। अब तक भिवानी और चरखी दादरी की मंडियों में पांच लाख 25 हजार क्विंटल बाजरा की आवक हो चुकी है। इसी रफ्तार से आवक को देखकर इस बार 12 लाख कट्टों की खरीद की संभावना भी जताई जा रही है। इसी से आशंकित खरीद एजेंसियों के अधिकारी नए गोदामों की तलाश में भी जुटे हैं ताकि खरीद हो चुके बाजरे का भंडारण सुनिश्चित किया जा सके।
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भिवानी जिले में करीब ढाई लाख एकड़ से अधिक भूमि में बाजरा की बिजाई हुई थी। हालांकि मौसम की बेरुखी और लौटते मानसून में बारिश की कमी के बावजूद किसानों को बाजरे में अच्छी खासी पैदावार मिली। यही वजह रही कि मंडियों में अब बंपर आवक बनी है। भिवानी जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र की 11 मंडियों में बाजरा की सरकारी खरीद हो रही है। इससे पहले भी करीब 50 हजार क्विंटल बाजरा तो किसान प्राइवेट तौर पर बेच चुके हैं। बावजूद इसके करीब सात हजार से अधिक किसान अब तक सरकारी खरीद एजेंसियों को दे चुके हैं।
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भिवानी और चरखी दादरी को मिलाकर हैफेड के माध्यम से अब तक पांच लाख 25 हजार कट्टों की खरीद हो चुकी है। जबकि इन दोनों ही जिलों में सरकारी एजेंसियों ने करीब छह लाख कट्टों की बाजरा खरीद की थी। पिछले साल की खरीद का आंकड़ा तो अभी से छू लिया है जबकि अभी बाजरा की सरकारी खरीद का ठीक से सीजन भी शुरू नहीं हुआ है। सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारी भी खुद मान रहे हैं कि बाजरा की आवक पिछले सीजन से इस बार दोगुनी हो सकती है। इसी संभावना के चलते खरीद एजेंसियों के अधिकारी अपने संसाधनों को बढ़ाने और जुटाने में लगे हैं। संवाद
इस बार जूट के बारदाने में हो रही है बाजरा की भराई
भिवानी जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र की मंडियों में इस बार खरीद एजेंसियां जूट का बारदाना इस्तेमाल कर रही हैं। जबकि पिछले सीजन में प्लास्टिक का बारदाना बाजरा खरीद मेंं इस्तेमाल किया गया था। जूट का बारदाना प्लास्टिक बारदाने से कहीं अधिक टिकाऊ है। खरीद एजेंसियों को इस बार पिछले सीजन से दोगुनी आवक की आशंका है। इसलिए नया बारदाना मंगवाने की भी डिमांड भेजी है। जूट का ये बारदाना कोलकाता से यहां लाया जाता है। इस बारदाना के ट्रांसपोर्टेशन में ही 15 दिन से अधिक लग जाते हैं।
हैफेड ने हायर किए हैं प्राइवेट गोदाम
सरकारी खरीद के बाद बाजरे का उठान कराकर हैफेड अपने हायर किए हुए गोदामों में भंडारण कर रही है। जिले के आसपास ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट गोदाम लीज पर लिए गए हैं, जिनके अंदर बाजरे का भंडारण किया जा रहा है। ढुलाई ठेकेदार गोदामों तक बाजरा पहुंचा रहे हैं।
वेयर हाउस के हवाले खरीद की तैयारी
हैफेड ने कॉमर्शियल खरीद का लक्ष्य करीब पूरा कर लिया है। इसके बाद अब वेयर हाउस कारपोरेशन के हवाले बाजरा की सरकारी खरीद एमएसपी पर की जाएगी। वेयर हाउस के खुद के गोदाम हैं, जो खरीद के बाद इसका भंडारण भी सुनिश्चित करेगी। बाजरे का सुरक्षित भंडारण करीब एक साल तक ही अच्छा समझा जाता है। इसके बाद इसकी गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है।
सरकारी राशन में भी चखेंगे बीपीएल परिवार बाजरे का स्वाद
खरीद के बाद बाजरा सरकारी राशन डिपो के माध्यम से बीपीएल परिवारों में वितरित होगा। इसके बाद गरीब परिवार भी बाजरे का स्वाद चख पाएंगे। हालांकि बाजरे की प्राइवेट बिक्री भी सरकार करेंगी। इसका निर्यात विदेशों में भी किए जाने की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल ज्यादातर बाजरा मुर्गी फार्मों में मुर्गियों के फीड में भी इस्तेमाल किया जाता है।
बाजरा की इस बार बंपर आवक है। पिछले सीजन में करीब छह लाख कट्टों की खरीद हुई थी, इस बार इससे दोगुनी खरीद की संभावना है। इसी हिसाब से संसाधन भी जुटाए जा रहे हैं। हैफेड के अलावा वेयर हाउस कॉरपोरेशन द्वारा भी बाजरे की एमएसपी पर खरीद कराई जानी है।
-राजेंद्र सिंह, जिला प्रबंधक हैफेड, भिवानी।