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Bhiwani News: अब मिट्टी की सेहत जांच से कृषि विभाग पता करेगा किस पोषक तत्व की है जरूरत
Thu, 07 Dec 2023 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 07 Dec 2023 11:58 PM IST
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लैब में मिट्टी की जांच करता कर्मचारी ।
भिवानी। अब मिट्टी की सेहत जांच से कृषि विभाग यह पता करने में जुटा है कि किस पोषक तत्व की जरूरत है। अधिकतर किसानों को यह तक पता नहीं है कि उनकी भूमि में कौन सा पोषक तत्व कम है, मगर फिर भी फसल बिजाई से पहले और बाद में किसान यूरिया व डीएसपी की अंधाधुंध छिड़काव में जुटे हैं। इसका भूमि की सेहत पर भी उलटा असर होता है।
भिवानी जिले में अब तक दो लाख मिट्टी सैंपलों की जांच हो चुकी है, जबकि एक लाख 55 हजार किसानों के सोयल हेल्थ कार्ड बन चुके हैं। आधार कार्ड की तर्ज पर बने सोयल हेल्थ कार्ड से किसान की भूमि को यूनिक नंबर भी दिया जा रहा है। इससे सोयल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर एक क्लिक से उस भूमि का पूरा डाटा स्क्रीन के सामने आ जाता है। फिलहाल यह पोर्टल अब चार माह से बंद पड़ा है।
मिट्टी जांच की मदद से पता चलता है कि भूमि में प्राथमिक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों में किस पोषक तत्व की अधिकता या कमी है। मिट्टी की जांच में भूमि के अम्लीय और क्षारीय गुणों की जांच लैब में होती है। भिवानी की मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला में 2022-23 में अब तक करीब दो लाख मिट्टी सैंपल जांच के दायरे में आ चुके हैं। इनमें से एक लाख 55 हजार किसानों की मिट्टी जांच के बाद उनके सोयल हेल्थ कार्ड भी बनाए गए हैं। इनका डाटा भी सोयल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर दर्ज किया गया है। यह डाटा भूमि की सेहत का हेल्थ कार्ड है। इसमें किसान को यह सटीक जानकारी मिलती है कि उसकी भूमि में किस पोषक तत्व की जरूरत है और कौन सा पोषक तत्व अधिक है।
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भिवानी जिले के तोशाम, सिवानी, लोहारू और बहल क्षेत्र में सबसे अधिक मिट्टी जांच के सैंपल की जांच हुई है, इसकी वजह यहां की भूमि में किसान बिना जाने ही यूरिया और डीएपी का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की सेहत सुधरने के बजाय उलटा बिगड़ रही है। कृषि विभाग अब सोयल हेल्थ कार्ड के जरिये न केवल किसानों को मिट्टी जांच के प्रति सजग कर रहा है, बल्कि मिट्टी में पोषक तत्वों की जांच कर उसकी खुराक पूर्ति के लिए भी आगाह कर रहा है।
किसान सहायकों की मदद से मिट्टी के सैंपल किए एकत्रित
कृषि विभाग ने ग्राम स्तर पर किसान सहायकों की नियुक्ति की है। ये ग्राम सहायक गांव के ही युवा हैं, जो आसपास के किसानों के खेतों की मिट्टी के सैंपल एकत्रित कर उसे जांच के लिए लैब तक पहुंचा रहे हैं। प्रति सैंपल किसान सहायक को 30 रुपये का मेहनताना भी दिया जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि किसान को उसकी मिट्टी की जांच के बाद उस में किस पोषक तत्व की पूर्ति करनी है और किस पोषक तत्व को नहीं डालना है। इसका सही अंदाजा लगाने के बाद जागरूक किया जा सकेगा। इससे किसान अपनी फसल बिजाई के बाद उसमें उसी तत्व की पूर्ति का प्रयास करेगा, ज्यादा खाद का प्रयोग भी नहीं करेगा। इससे उसका पैसा और समय दोनों बचेंगे वहीं उसे फसल उत्पादन में भी परेशानी नहीं होगी।
अधिकांश किसानों को यह पता ही नहीं होता कि उनकी भूमि में किस पोषक तत्व की कमी है। फसल का उत्पादन प्रभावित होने पर वे यूरिया और डीएपी का अंधाधुंध प्रयोग करने लगते हैं। कृषि विभाग खुद मिट्टी की निशुल्क जांच करा रहा है। इससे किसानों को यह पता चल सके कि उनके खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है। मिट्टी में जिन तत्वों की जांच की जाती है, उनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम और बोरॉन प्रमुख हैं। इस साल अब तक दो लाख से अधिक मिट्टी सैंपल जांच हो चुकी है।
-डॉ. राजू मेहरा जताई, कनिष्ठ विज्ञान सहायक मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला भिवानी।
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भिवानी जिले में अब तक दो लाख मिट्टी सैंपलों की जांच हो चुकी है, जबकि एक लाख 55 हजार किसानों के सोयल हेल्थ कार्ड बन चुके हैं। आधार कार्ड की तर्ज पर बने सोयल हेल्थ कार्ड से किसान की भूमि को यूनिक नंबर भी दिया जा रहा है। इससे सोयल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर एक क्लिक से उस भूमि का पूरा डाटा स्क्रीन के सामने आ जाता है। फिलहाल यह पोर्टल अब चार माह से बंद पड़ा है।
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मिट्टी जांच की मदद से पता चलता है कि भूमि में प्राथमिक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों में किस पोषक तत्व की अधिकता या कमी है। मिट्टी की जांच में भूमि के अम्लीय और क्षारीय गुणों की जांच लैब में होती है। भिवानी की मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला में 2022-23 में अब तक करीब दो लाख मिट्टी सैंपल जांच के दायरे में आ चुके हैं। इनमें से एक लाख 55 हजार किसानों की मिट्टी जांच के बाद उनके सोयल हेल्थ कार्ड भी बनाए गए हैं। इनका डाटा भी सोयल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर दर्ज किया गया है। यह डाटा भूमि की सेहत का हेल्थ कार्ड है। इसमें किसान को यह सटीक जानकारी मिलती है कि उसकी भूमि में किस पोषक तत्व की जरूरत है और कौन सा पोषक तत्व अधिक है।
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भिवानी जिले के तोशाम, सिवानी, लोहारू और बहल क्षेत्र में सबसे अधिक मिट्टी जांच के सैंपल की जांच हुई है, इसकी वजह यहां की भूमि में किसान बिना जाने ही यूरिया और डीएपी का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की सेहत सुधरने के बजाय उलटा बिगड़ रही है। कृषि विभाग अब सोयल हेल्थ कार्ड के जरिये न केवल किसानों को मिट्टी जांच के प्रति सजग कर रहा है, बल्कि मिट्टी में पोषक तत्वों की जांच कर उसकी खुराक पूर्ति के लिए भी आगाह कर रहा है।
किसान सहायकों की मदद से मिट्टी के सैंपल किए एकत्रित
कृषि विभाग ने ग्राम स्तर पर किसान सहायकों की नियुक्ति की है। ये ग्राम सहायक गांव के ही युवा हैं, जो आसपास के किसानों के खेतों की मिट्टी के सैंपल एकत्रित कर उसे जांच के लिए लैब तक पहुंचा रहे हैं। प्रति सैंपल किसान सहायक को 30 रुपये का मेहनताना भी दिया जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि किसान को उसकी मिट्टी की जांच के बाद उस में किस पोषक तत्व की पूर्ति करनी है और किस पोषक तत्व को नहीं डालना है। इसका सही अंदाजा लगाने के बाद जागरूक किया जा सकेगा। इससे किसान अपनी फसल बिजाई के बाद उसमें उसी तत्व की पूर्ति का प्रयास करेगा, ज्यादा खाद का प्रयोग भी नहीं करेगा। इससे उसका पैसा और समय दोनों बचेंगे वहीं उसे फसल उत्पादन में भी परेशानी नहीं होगी।
अधिकांश किसानों को यह पता ही नहीं होता कि उनकी भूमि में किस पोषक तत्व की कमी है। फसल का उत्पादन प्रभावित होने पर वे यूरिया और डीएपी का अंधाधुंध प्रयोग करने लगते हैं। कृषि विभाग खुद मिट्टी की निशुल्क जांच करा रहा है। इससे किसानों को यह पता चल सके कि उनके खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है। मिट्टी में जिन तत्वों की जांच की जाती है, उनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम और बोरॉन प्रमुख हैं। इस साल अब तक दो लाख से अधिक मिट्टी सैंपल जांच हो चुकी है।
-डॉ. राजू मेहरा जताई, कनिष्ठ विज्ञान सहायक मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला भिवानी।