सुविधा: अब मिट्टी की सेहत का चंद मिनटों में पता लगाएगी 80 लाख की आईसीटी मशीन
मिट्टी-पानी परीक्षण लैब में जल्द एडवांस सुविधा शुरू होगी। रोजाना 400 मिट्टी सैंपल की जांच होगी। रासायनिक खाद व कीटनाशकों के प्रयोग से लगातार भूमि में सूक्ष्म पोषक तत्व घट रहे हैं।
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अब किसानों के खेत की मिट्टी की सेहत का पता चंद मिनटों में लग जाएगा। इसके लिए भिवानी में कृषि विभाग की मिट्टी-पानी परीक्षण लैब में जल्द एडवांस सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभाग ने करीब 80 लाख रुपयों की कीमत से आईसीटी मशीन मंगवाई है।
अब तक मिट्टी जांच परीक्षण लैब में ईसीपीएचसी (इलेक्ट्रिक कंडेक्टिविटी और पीएच मानक जांच) का ही परीक्षण के उपरांत पता चल पाता था, लेकिन आईसीटी (इंट्रा मोलिकर चार्ज ट्रांसफर) मशीन से मिट्टी के अंदर माइक्रो न्यूटेंट यानी सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी आसानी से पता चल जाएगा। इतना ही नहीं लैब में इस अत्याधुनिक मशीन के माध्यम से रोजाना मिट्टी के 400 सैंपल की जांच भी संभव हो पाएगी। फिलहाल रोजाना यहां मिट्टी के 50 से 70 सैंपल ही जांच हो पाती है।
भिवानी जिला मुख्यालय की नई अनाज मंडी स्थित मिट्टी-पानी निरीक्षण लैब में किसान अपने खेत की मिट्टी जांच करवाते हैं। इससे किसानों को यह पता लग जाता है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और उनके खेत की मिट्टी किस फसल की उपज लेने के लिए उपयुक्त है।
मुख्यालय की लैब में फिलहाल ईसीपीएच जांच की ही सुविधा है, जिसके जरिये मिट्टी में केवल इलेक्ट्रिक कंडेक्टिविटी और पीएच मानक ही जांच के दायरे में आ पाते हैं, जबकि मिट्टी के अंदर काफी ऐसे माइक्रो न्यूटेंट होते हैं, जिनका पता लगाना बहुत जरूरी होता है। अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित आईसीटी मशीन माइक्रो न्यूटेंट का पता आसानी से लगा लेती है।
आमतौर पर जिले की मिट्टी नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जीवक कार्बन, जिंक, आयरन, कोपर जैसे तत्वों की मात्रा कितनी है, इसका पता लगाने के लिए किसान अपने खेत की मिट्टी को लैब के अंदर तकनीकी जांच के लिए लेकर आते हैं।
अंधाधुंध रासायनिक खादों व कीटनाशकों ने बिगाड़ दी मिट्टी की सेहत
भिवानी जिले के किसानों द्वारा खेत के अंदर अधिक फसल उत्पादन लेने की होड़ मची है। यही वजह है कि किसान बिना सोचे समझे अंधाधुंध रासायनिक खादों के साथ कीटनाशकों का भी प्रयोग कर रहे हैं, जिससे लगातार मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। मिट्टी के अंदर पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं। वहीं मित्र कीट भी विलुप्त हो रहे हैं, जिसका सीधा असर भूमि की उपजाऊ शक्ति पर पड़ता है।
मिट्टी में लगातार फसल लेने के चक्कर में किसान उसकी सेहत का ध्यान नहीं रखते तो एक दौर ऐसा भी आता है, जब मिट्टी उपज देने के बजाय बंजर हो जाती है। ऐसी भूमि का असर भूमिगत जलस्तर पर भी पड़ रहा है। मिट्टी की लवणीय व क्षारीय मात्रा का संतुलन भी बिगड़ रहा है।
फसल चक्र पर भी पड़ा बुरा असर
मिट्टी जांच के नतीजों से यह भी सामने आया है कि जिले में गेहूं, धान, गन्ना, कपास, चना, बाजारा, सरसों की फसल लेने के लिए किसान आमतौर पर फसल चक्र पर निर्भर करते हैं। मगर मिट्टी की सेहत ने फसल चक्र के समीकरण भी बिगाड़ दिए हैं। कई किसानों के खेत की मिट्टी तो केवल साल में एक ही फसल लेने लायक बची है। उसे कुछ समय के लिए खाली छोड़ना भी मजबूरी बन गई है, जिसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर भी पड़ रहा है।
400 सैंपल की होगी जांच
भूमि-पानी परीक्षण लैब में किसानों के खेत की मिट्टी जांच के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त आईसीटी मशीन स्थापित की जाएगी। इससे रोजाना 400 से अधिक मिट्टी सैंपल की जांच संभव होगी और मिट्टी के अंदर माइक्रो न्यूटेंट का भी पता चल पाएगा। किसानों का भूमि एवं जल स्वास्थ्य कार्ड भी बनाया जा रहा है, जिसमें उसके खेत की मिट्टी की सेहत और भूमिगत जलस्तर का पूरा खाका लैब में भी मौजूद रहता है। - राजू मेहरा, जूनियर सांइटिफिक असिस्टेंट, मिट्टी-पानी परीक्षण लैब भिवानी।