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न बाजरे का पता न मूंग खरीद की कोई जानकारी, असमंजस में अधिकारी, दुविधा में किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 12:39 AM IST
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Neither the address of millet nor any information about the purchase of moong, officials in confusion, farmers in dilemma
अनाज मंडी में पहुंची कपास। संवाद - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। बाजरे की सरकारी खरीद का अभी अधिकारियों को कुछ पता नहीं है और न ही मूंग खरीद की कोई जानकारी। जिले में एक लाख 61 हजार किसान अपनी फसलों का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, लेकिन किसानों के पास भी सरकारी खरीद के शेड्यूल की कोई भनक तक नहीं है। अधिकारी खुद असमंजस में हैं, जबकि किसान भी फसल निकालने के बाद इस सुविधा में फंसा है कि फसल मंडी लेकर जाए या फिर घर।
पोर्टल पर गलत फसल दर्शाया जाना भी अनेक किसानों के लिए मुसीबत बना हैं, वे भी अपनी फसल की जानकारी दुरुस्त कराने के लिए इधरउधर भटक रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद वेरिफिकेशन में गलत फसल दर्शाने की भी अब दोबारा से राजस्व विभाग वेरिफिकेशन कराएगा। फिलहाल मंडी में किसानों को बाजरा की फसल के साढ़े 1400 रुपये प्रति क्विंटल प्राइवेट भाव मिल रहे हैं, जबकि मंडी पहुंची कपास 7200 रुपये प्रति क्विंटल प्राइवेट बिक रही है।
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हरियाणा सरकार ने पहले एक अक्तूबर से बाजरा व मूंग की सरकारी खरीद शुरू कराने का दावा किया था, लेकिन बाद में 11 अक्तूबर से सरकारी खरीद शुरू कराने की संभावना जताई गई। लेकिन अभी तक संबंधित खरीद एजेंसियों, मंडी प्रबंधन व नोडल एजेंसी के अलावा जिला प्रशासन को भी सरकारी खरीद की कोई जानकारी तक नहीं है। अधिकारी इसी असमंजस में हैं कि ऊपर से कोई निर्देश मिलें तो आगे जानकारी किसानों को दी जा सके, किसान भी इस बात से परेशान हैं कि न तो रजिस्ट्रेशन कराने के बाद उनके फोन पर कोई शेड्यूल आया है और न फसल बिक्री के संबंध में अधिकारी कुछ बता पा रहे हैं। फिलहाल किसान अपनी फसलों को निकाल चुके हैं। इस फसल को मंडी लेकर जाए या फिर घर, इस दुविधा में भी किसान फंसा है, क्योंकि कई किसानों के पास भंडारण के लिए कोई जगह नहीं हैं, अगर ज्यादा दिन तक फसल रखता भी है तो खराब होने का खतरा रहता है। मंडी में प्राइवेट बेचने पर उसे औने-पौने दाम मिल रहे हैं। जिन किसानों की फसल पोर्टल पर गलत दर्शायी हुई हैं। अब उनकी भी दोबारा राजस्व विभाग वेरिफिकेशन कराएगा।
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मंडी में पहुंची 1500 क्विंटल कपास
भिवानी जिला मुख्यालय की मंडी में करीब 1500 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। कपास की रोजाना ही प्राइवेट बोली कराई जा रही है। फिलहाल कपास का मंडी में 7200 रुपये प्रति क्विंटल भाव चल रहा है। सरकार की तरफ से कपास की कोई खरीद नहीं है। मिलर ही कपास खरीद रहे हैं, जबकि मंडी में पहुंचा बाजारा 1200 रुपये से साढ़े 1400 रुपये प्रति क्विंटल प्राइवेट भाव बिक रहा है। जबकि सरकार की तरफ से बाजरा का एमएसपी 2250 रुपये निर्धारित किया हुआ है। भावांतर योजना में भी किसानों को मात्र 600 रुपये प्रति क्विंटल देने का एलान हुआ है। मगर इसके लिए शर्तें पूरा करना भी जरूरी है। किसान दुविधा में हैं, प्राइवेट बाजरा बेचते हैं तो उन्हें भावांतर का लाभ लेने के लिए भी सरकार के नियमों की कसौटी पर खरा उतरना पड़ेगा।
बाजरा की नौ व मूंग की चार मंडियों में होनी है खरीद
बाजरा के लिए जिले में भिवानी, जूई, लोहारू, सिवानी, बहल, तोशाम, कैरू, भैरा व ईशरवाल की नौ मंडियां निर्धारित हैं, जबकि मूंग के लिए सिर्फ चार मंडियां तय हुई हैं। इसमें जिला मुख्यालय की मंडी व लोहारू, बहल व सिवानी मंडी शामिल हैं। हैफेड ने पिछले साल 88162 मीट्रिक टन व एचडब्ल्यूसी ने 43790 एमटी बाजरा खरीदा था। हैफेड ने 342 एमटी व एचडब्ल्यूसी ने 773 मीट्रिक टन मूंग खरीद की थी।
किसानों से रिपोर्ट मांगी गई
हमारे पास कई किसानों की शिकायतें आई हैं, जिनकी फसल गलत दर्शायी गई हैं, उन किसानों की फसलों की रिपोर्ट मांगी गई है। जिन किसानों की फसल गलत दर्शायी हुई हैं वे किसान राजस्व विभाग के समक्ष लिखित शिकायत दे सकते हैं, उनका जल्द समाधान कराया जाएगा।
-राजकुमार, जिला राजस्व अधिकारी भिवानी।
अभी तक मार्केटिंग बोर्ड के समक्ष बाजरा व मूंग खरीद का कोई शेड्यूल नहीं आया है। मंडी में बाजरा व कपास की प्राइवेट खरीद चल रही है। खरीद को लेकर सभी इंतजाम किए जा चुके हैं, खरीद एजेंसियों को किसानों की फसल खरीद करनी है।

-ज्योति धनखड़, कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड भिवानी।
रजिस्ट्रेशन से वंचित रहने वाले किसानों के लिए एक से तीन अक्तूबर तक पोर्टल खोला गया था। अब तक जिले में एक लाख 61 हजार से अधिक किसान अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। खरीद शेड्यूल के संबंध में हमारे विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है।
-डॉ. आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक भिवानी।
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