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वर्तमान खेती की पद्घति से सामने आ रही चुनौतियों के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी: डॉ करमचंद
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भिवानी। वर्तमान खेती की पद्धति से सामने आ रही चुनौतियों (पर्यावरण प्रदूषण, घटती उपजाऊ शक्ति, जहरीले खाद्यन्न व खर्चीली होती जा रही खेती) के समाधान हेतु प्राकृतिक विधि से खेती आवश्यक हो गई है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण देकर जागरूक किया जा रहा है। ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र भिवानी में ग्राम प्रधानों, पूर्व सरपंचों व अन्य लोगों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए अमेठी डॉयरेक्टर डॉ करमचंद ने कहीं।
डॉ. कर्मचंद ने बताया कि 13 अगस्त तक हर जिले में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि उपनिदेशक डॉ. आत्माराम गोदारा ने प्राकृतिक खेती के महत्व को समझाया एवं विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। ट्रेनर डॉ. मुकेश कंबोज एवं आत्मा संस्थान के विपिन कुमार ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न तरीकों से सभी को अवगत करवाया। जिले के प्रगतिशील जैविक किसान उमराव लाड ने अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. मुकेश कंबोज ने बिगड़ते भूमि स्वास्थ्य बारे जानकारी दी। विपिन कुमार ने किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने हेतु जमीन में सुक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने वाले जीवा अमृत, बीजाअमृत, घन जीवा अमृत, निकास्त्र, अग्निअस्त्र आदि जैविक उर्वरक बनाने का तरीका सिखाया।
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डॉ. कर्मचंद ने बताया कि 13 अगस्त तक हर जिले में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि उपनिदेशक डॉ. आत्माराम गोदारा ने प्राकृतिक खेती के महत्व को समझाया एवं विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। ट्रेनर डॉ. मुकेश कंबोज एवं आत्मा संस्थान के विपिन कुमार ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न तरीकों से सभी को अवगत करवाया। जिले के प्रगतिशील जैविक किसान उमराव लाड ने अपने अनुभव साझा किए।
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डॉ. मुकेश कंबोज ने बिगड़ते भूमि स्वास्थ्य बारे जानकारी दी। विपिन कुमार ने किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने हेतु जमीन में सुक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने वाले जीवा अमृत, बीजाअमृत, घन जीवा अमृत, निकास्त्र, अग्निअस्त्र आदि जैविक उर्वरक बनाने का तरीका सिखाया।
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