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आरटीआई में खुलासा : नप के पास तीन साल में आए 40 करोड़, कितनी गलियां बनीं रिकॉर्ड नहीं
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भिवानी। नगर परिषद के पास पिछले तीन साल में विभिन्न योजनाओं के तहत 40 करोड़ की राशि आई। इसमें से ज्यादातर गलियों के निर्माण पर ही खर्च हुआ। मगर तीन साल में कितनी गलियों का निर्माण हुआ, इसका रिकार्ड नगर परिषद के पास नहीं है। यह जवाब खुद नगर परिषद ने आरटीआई के जवाब में दिया है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने आरटीआई के माध्यम से नगर परिषद से यह जानकारी मांगी थी। इसके बाद संगठन प्रदेशाध्यक्ष ने गलियों के निर्माण में मोटे गोलमाल की आशंका जताई है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने भिवानी नगर परिषद से 27 जनवरी को आरटीआई के माध्यम से शहर के सभी 31 वार्डों के अंदर नई गलियों के निर्माण से जुड़े बजट और निर्माण पर खर्च हुए बजट की जानकारी मांगी थी। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि उन्होंने जानकारी मांगी थी कि एक अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2019 तक शहर के 31 वार्डों में कितनी गलियों का निर्माण हुआ और इन पर कितना बजट खर्च हुआ। सरकार और विभिन्न मदों में नगर परिषद के पास कितना बजट आया और कितना खर्च हुआ। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि निर्धारित अवधि में नगर परिषद ने आरटीआई का कोई जवाब नहीं दिया। इस पर प्रथम अपील सात मार्च को उपायुक्त के समक्ष की गई। मगर उपायुक्त ने भी आरटीआई की प्रथम अपील पर सुनवाई तो की, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया। इसके बाद बृजपाल सिंह परमार ने दो जून को मामले की अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष की। राज्य सूचना आयोग कोई संज्ञान लेता इससे पहले ही आठ जून को नगर परिषद ने आरटीआई का जवाब दिया, लेकिन गलियों के निर्माण में बजट खर्च का कोई ब्योरा नहीं दिया। जवाब में कहा गया कि गलियों के निर्माण में कोई संकलित रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि नगर परिषद ने करीब तीन साल के दौरान करीब 40 करोड़ का बजट खर्च किया है जबकि इस बजट से शहर के सभी वार्डों में कितनी गलियां बनी, इसका कोई ब्योरा नगर परिषद ने संकलित तौर पर अपने पास उपलब्ध नहीं होने का जवाब दिया।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने भिवानी नगर परिषद से 27 जनवरी को आरटीआई के माध्यम से शहर के सभी 31 वार्डों के अंदर नई गलियों के निर्माण से जुड़े बजट और निर्माण पर खर्च हुए बजट की जानकारी मांगी थी। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि उन्होंने जानकारी मांगी थी कि एक अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2019 तक शहर के 31 वार्डों में कितनी गलियों का निर्माण हुआ और इन पर कितना बजट खर्च हुआ। सरकार और विभिन्न मदों में नगर परिषद के पास कितना बजट आया और कितना खर्च हुआ। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि निर्धारित अवधि में नगर परिषद ने आरटीआई का कोई जवाब नहीं दिया। इस पर प्रथम अपील सात मार्च को उपायुक्त के समक्ष की गई। मगर उपायुक्त ने भी आरटीआई की प्रथम अपील पर सुनवाई तो की, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया। इसके बाद बृजपाल सिंह परमार ने दो जून को मामले की अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष की। राज्य सूचना आयोग कोई संज्ञान लेता इससे पहले ही आठ जून को नगर परिषद ने आरटीआई का जवाब दिया, लेकिन गलियों के निर्माण में बजट खर्च का कोई ब्योरा नहीं दिया। जवाब में कहा गया कि गलियों के निर्माण में कोई संकलित रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि नगर परिषद ने करीब तीन साल के दौरान करीब 40 करोड़ का बजट खर्च किया है जबकि इस बजट से शहर के सभी वार्डों में कितनी गलियां बनी, इसका कोई ब्योरा नगर परिषद ने संकलित तौर पर अपने पास उपलब्ध नहीं होने का जवाब दिया।
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