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विश्व कैंसर दिवस: शीला ने दो साल में कैंसर को दी मात
Fri, 03 Feb 2023 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 03 Feb 2023 11:21 PM IST
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भिवानी। गांव लोहानी निवासी शीला ने समय पर इलाज करवाकर दो साल में कैंसर को मात दे दी। आत्मविश्वास और परिजनों द्वारा बढ़ाए गए मनोबल से शीला देवी ने हार नहीं मानी।
शीला देवी गांव में ही आशा वर्कर हैं, जबकि उनके दो बेटे निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं। उनके पति की वर्ष 2011 में बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। कैंसर पर जीत हासिल करने के बाद शीला परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही हैं। शीला देवी ने बताया कि उन्हें 2019 से ब्रेस्ट में गांठ थी, जिसकी वजह से उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहती थी। जनवरी 2021 में वह नागरिक अस्पताल में जनरल सर्जन डॉ. रमेश लांबा से जांच करवाने के लिए गई तो उन्हें ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई। कैंसर की वजह से वे भयभीत हो गई थीं। मगर फरवरी 2021 में ही डॉ. रमेश लांबा ने उनका ऑपरेशन कर गांठ को निकाल दिया, जिसके बाद वह स्वस्थ हैं। आशा वर्कर शीला देवी ने बताया कि वे अब सुखद जीवन व्यतीत कर रही हैं। संवाद
पुरुष गले और महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से ज्यादा पीड़ित
कैंसर की बीमारी जिले के लिए लगातार ही घातक होती जा रही है। इसकी चपेट में हर साल 35 से 40 महिला एवं पुरुष आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर पुरुष गले के कैंसर और महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। चिकित्सकों ने बताया कि पुरुषों में कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों का सेवन है। वहीं, महिलाओं में कैंसर जन्मजात बताया जा रहा है। इसके अलावा अपौष्टिक आहार की वजह से कैंसर जैसी बीमारियों हो रही हैं।
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अस्पताल में निशुल्क जांच सुविधा
नागरिक अस्पताल में कैंसर की जांच की निशुल्क सुविधा है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार मरीज अस्पताल के ब्लड बैंक में जाकर इसकी जांच करवा सकते हैं। कैंसर की जांच के लिए एफएनएसी जांच की जाती है। एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइकोलॉजी) बारीक सुई से गांठ की भीतरी तह को कुरेदकर वहां हुई कोशिकाओं को उसी सुई से खींचकर निकाला जाता है और माइक्रोस्कोप से उसकी जांच की जाती है। बेहद छोटी या अस्पष्ट गांठों के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या सीटी स्कैन गाइडेड एनएनएसी की जाती है।
कीमोथैरेपी के लिए जाना पड़ता है पीजीआई रोहतक
कैंसर के उपचार के लिए जिले के मरीजों को पीजीआईएमएस रोहतक जाता पड़ता है। कैंसर मरीजों के रोडवेज विभाग ने निशुल्क बस पास बनाए हुए हैं। रोडवेज की ओर से कैंसर मरीजों की कीमोथैरेपी के लिए 150 किलोमीटर तक की दूरी के निशुल्क बस पास बनाए जाते हैं। फिलहाल करीब 300 मरीजों के पास बनाए गए हैं। एक इनके साथ केयर टेकर के रूप में जा सकता है।
विशेषज्ञ सलाह
जिले में कैंसर के मरीजों में अधिकतर पुरुषों को धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों के सेवन की वजह से गले का कैंसर हो रहा है। वहीं महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए धूम्रपान, तंबाकू उत्पादों और अपौष्टिक आहार का सेवन करने से बचें। कैंसर के मरीज के उपचार के लिए कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी और सर्जरी की जाती है, यह मरीज की हालत पर निर्भर होता है। कैंसर का अगर समय पर पता चलता है तो उस पर काबू पाना काफी आसान रहता है।
- डॉ. रमेश लांबा, जनरल सर्जन, नागरिक अस्पताल
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शीला देवी गांव में ही आशा वर्कर हैं, जबकि उनके दो बेटे निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं। उनके पति की वर्ष 2011 में बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। कैंसर पर जीत हासिल करने के बाद शीला परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही हैं। शीला देवी ने बताया कि उन्हें 2019 से ब्रेस्ट में गांठ थी, जिसकी वजह से उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहती थी। जनवरी 2021 में वह नागरिक अस्पताल में जनरल सर्जन डॉ. रमेश लांबा से जांच करवाने के लिए गई तो उन्हें ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई। कैंसर की वजह से वे भयभीत हो गई थीं। मगर फरवरी 2021 में ही डॉ. रमेश लांबा ने उनका ऑपरेशन कर गांठ को निकाल दिया, जिसके बाद वह स्वस्थ हैं। आशा वर्कर शीला देवी ने बताया कि वे अब सुखद जीवन व्यतीत कर रही हैं। संवाद
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पुरुष गले और महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से ज्यादा पीड़ित
कैंसर की बीमारी जिले के लिए लगातार ही घातक होती जा रही है। इसकी चपेट में हर साल 35 से 40 महिला एवं पुरुष आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर पुरुष गले के कैंसर और महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। चिकित्सकों ने बताया कि पुरुषों में कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों का सेवन है। वहीं, महिलाओं में कैंसर जन्मजात बताया जा रहा है। इसके अलावा अपौष्टिक आहार की वजह से कैंसर जैसी बीमारियों हो रही हैं।
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अस्पताल में निशुल्क जांच सुविधा
नागरिक अस्पताल में कैंसर की जांच की निशुल्क सुविधा है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार मरीज अस्पताल के ब्लड बैंक में जाकर इसकी जांच करवा सकते हैं। कैंसर की जांच के लिए एफएनएसी जांच की जाती है। एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइकोलॉजी) बारीक सुई से गांठ की भीतरी तह को कुरेदकर वहां हुई कोशिकाओं को उसी सुई से खींचकर निकाला जाता है और माइक्रोस्कोप से उसकी जांच की जाती है। बेहद छोटी या अस्पष्ट गांठों के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या सीटी स्कैन गाइडेड एनएनएसी की जाती है।
कीमोथैरेपी के लिए जाना पड़ता है पीजीआई रोहतक
कैंसर के उपचार के लिए जिले के मरीजों को पीजीआईएमएस रोहतक जाता पड़ता है। कैंसर मरीजों के रोडवेज विभाग ने निशुल्क बस पास बनाए हुए हैं। रोडवेज की ओर से कैंसर मरीजों की कीमोथैरेपी के लिए 150 किलोमीटर तक की दूरी के निशुल्क बस पास बनाए जाते हैं। फिलहाल करीब 300 मरीजों के पास बनाए गए हैं। एक इनके साथ केयर टेकर के रूप में जा सकता है।
विशेषज्ञ सलाह
जिले में कैंसर के मरीजों में अधिकतर पुरुषों को धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों के सेवन की वजह से गले का कैंसर हो रहा है। वहीं महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए धूम्रपान, तंबाकू उत्पादों और अपौष्टिक आहार का सेवन करने से बचें। कैंसर के मरीज के उपचार के लिए कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी और सर्जरी की जाती है, यह मरीज की हालत पर निर्भर होता है। कैंसर का अगर समय पर पता चलता है तो उस पर काबू पाना काफी आसान रहता है।
- डॉ. रमेश लांबा, जनरल सर्जन, नागरिक अस्पताल