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नगरपालिका चुनावी सरगर्मी: आरक्षित वार्डों की अधिसूचना जारी होने के बाद सक्रिय हुए भावी पार्षद उम्मीदवार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Dec 2023 11:45 PM IST
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Municipal election activity: Prospective councilor candidates became active after the release of notification of reserved wards.
बवानीखेड़ा। कस्बे में पार्षदों की सीटों का आवंटन होते ही भावी पार्षद उम्मीदवार मैदान में नजर आने लगे हैं। अबकि बार 6 अनुसूचित जाति पार्षदों सहित 6 महिला पार्षद नगर पालिका हाउस पहुंचेगी। वहीं इस बार मतदाताओं द्वारा सीधे चेयरमैन चुने जाने के कारण हाउस में पार्षदों का पहले वाला दबदबा नजर नहीं आएगा।
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कस्बा बवानीखेड़ा निवासी मंजीत ने कहा कि बवानीखेड़ा को पंचायत से नगर पालिका बने बेशक आधी शताब्दी से ज्यादा का समय हो चुका है लेकिन आज भी कस्बे को मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। लोगों को आस है कभी तो बवानीखेड़ा की सूरत बदलेगी और यह कागजों से निकल कर आधुनिक सुविधाओं वाला शहर बनेगा।
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लाला रामकरण दास बने थे नगर पालिका के पहले अध्यक्ष

साल 1972 में तहसील के गठन के लगभग डेढ़ साल बाद नगर पालिका बवानीखेड़ा अस्तित्व में आई। इससे शुरुआत में नोटिफाइड कमेटी एरिया के रूप में चिह्नित कर लाला रामकरण दास को पहला अध्यक्ष नोमिनेट किया गया था। तब नगर पालिका में सात पार्षद होते थे। शुरुआती दौर में पार्षदों को सरकार द्वारा मनोनीत किया जाता था। बाद में बवानीखेड़ा को पूर्ण नगर पालिका का दर्जा दे दिया गया। आज नगर पालिका को स्थापित हुए 50 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। इन बीते 50 सालों में नगर पालिका ने बहुत लोगों को प्रधानी करते देखा है। साल 1974 से अब तक सबसे ज्यादा 4 बार अनुसूचित जाति और 2 बार वैश्य समाज नगर पालिका की कुर्सी पर काबिज हुआ है। वहीं एक-एक बार ब्राह्मण, राजपूत और पंजाबी समाज को प्रधानी करने का मौका मिला है।
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मार्च 2000 में वापस पंचायत बन गई थी नगर पालिका

सन 2000 की 2 मार्च को तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में नगर पालिका बवानीखेड़ा के साथ हरियाणा की 28 नगर पालिकाओं को भंग कर दिया था। तब कहा गया था कि इन नगर पालिकाओं की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। इनके पास कर्मचारियों को वेतन देने के भी पैसे नहीं हैं। लेकिन डेढ़ वर्ष बाद अक्तूबर 2001 में सरकार ने दोबारा नगर पालिका बवानीखेड़ा को पुनर्गठित कर दिया था। तब से लेकर अब तक क्षेत्र में विकास की रफ्तार धीमी ही रही है। पार्षदों की गुटबाजी, खरीद-फरोख्त, अविश्वास प्रस्ताव, क्षेत्रवादी भेदभाव, भ्रष्टाचार जैसे अनेक मुद्दे बहुत बार सुर्खियों में आए हैं। पिछले कार्यकाल में नगर पालिका चेयरपर्सन कांता किरण खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव हो या महिला पार्षद मीना चौपड़ा द्वारा विकास कार्यों के लिए तहसील कार्यालय के बाहर कई दिनों तक धरना दिया जाना और कार्यवाहक नपा प्रधान ओमपति यादव द्वारा नगर पालिका पर लगाए गए व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं। तब नगर पालिका प्रधान ने सूबे के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री, हलका विधायक, उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त को चिट्ठी लिखकर एसडीएम भिवानी से नगर पालिका में जांच करवाई थी।

खेल स्टेडियम और बड़े पार्क की जगह निर्धरित, सिरे नहीं चढ़े मसौदे
बवानीखेड़ा निवासी मुकेश ने बताया कि कस्बे में दो बड़े खेल स्टेडियम चिह्नित हैं और एक बड़े पार्क के लिए जगह निर्धारित है। लेकिन समय के साथ यह प्रोजेक्ट अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गए और ठंडे बस्ते में चले गए। कस्बे का दादी गौरी खेल स्टेडियम जहां कभी 29 लाख रुपये खर्च कर चहारदीवारी बनाई गई थी वह आज लगभग गायब हो चुकी है। वहीं महर्षि वाल्मीकि स्टेडियम में कोई कार्य नहीं हुआ इसके अलावा कस्बे का हर्बल पार्क लोगों की जुबान से गायब हो चुका है। रेलवे स्टेशन वाली ढाणी जहां कस्बे के चार वार्ड हैं, वहां ज्यादातर गलियां कच्ची हैं और गंदे पानी की निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को वहां बसे 40 से 50 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी हालात वैसे के वैसे बने हुए हैं। कस्बे में आवारा पशुओं की तादाद सबसे ज्यादा है, जिनके लिए आजतक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। नगरपालिका के ज्यादातर बड़े प्रोजेक्ट अवैध कब्जों के शिकार हो गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड अनुसार कस्बे में लगभग 230 एकड़ सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे है ।

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इस बार हम सब युवा साथी जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों से दूर रहकर कस्बे के भावी पार्षद और चेयरमैन उम्मीदवारों के सामने बेहतरीन खेल सुविधाओं और कस्बे में स्टेडियम निर्माण और सीवरेज व्यवस्था की दशा सुधारने, आवारा पशुओं की समस्या और पीने के पानी की किल्लत से निजात दिलाने की मांगों को प्रमुखता से रखेंगे। पिछले लंबे समय से इन समस्याओं का किसी ने कोई समाधान नहीं किया है। हम प्रयास करेंगे कि सभी युवा चुनाव में भागीदारी करें और कस्बे के विकास के लिए प्रयास करें। इसके अलावा हमारा प्रयास ऐसे जनप्रतिनिधि को नगर पालिका में भेजने का होगा जो सरकार द्वारा वित्तपोषित गोशालाओं में कार्यरत भ्रष्ट मैनेजमेंट को गोशालाओं से बाहर कर सकें। यह लोगों से गायों के नाम पर चंदा बटोरते हैं परंतु गायों को गोशाला में नहीं रखते। इसके कारण आवारा पशुओं की समस्या खड़ी हो गई है।
-मंजीत राठौड़, बवानीखेड़ा निवासी, अध्यक्ष बवानीखेड़ा युवा एकता मंच।
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कस्बे में कोई भी खेल स्टेडियम, बड़ा पार्क नहीं हैं। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सड़कों पर ट्रैफिक के बीच सुबह शाम सैर करने जाते हैं। जहां सड़क दुर्घटना होने और प्रदूषण से बीमार होने का खतरा रहता है। मैं बचपन से देखता आ रहा हूं आज तक बस वादों के अलावा जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है। कस्बे में कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। मैं चाहता हूं कि नगर पालिका चुनाव में स्वास्थ्य, खेल और मूलभूत सुविधाओं की बात करने वाले उम्मीदवार को लोगों ने वोट करना चाहिए। आज बवानीखेड़ा आसपास के कस्बों से जो नगर पालिका भी नहीं है, उनसे पिछड़ गया है। कस्बे में आज सीवरेज व्यवस्था का बुरा हाल है। हर गली मोहल्ले में सीवर ओवरफ्लो होकर बह रहे हैं।

-डॉ. राकेश कुमार, पीएचडी मेडिकल, बवानीखेड़ा निवासी ।
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