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खरकड़ी सोहान में 17 साल बाद शुरू होगा खनन कार्य
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खरखड़ी सोहान की पहाड़ी। संवाद
- फोटो : Bhiwani
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तोशाम (भिवानी)। करीब 17 साल बाद खरखड़ी सोहान की पहाड़ियों में लगभग 5.32 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन कार्य शुरू होने जा रहा है। पहाड़ी में दस साल के लिए खनन का ठेका महादेव माइंस कंपनी ने 31 करोड़ 26 लाख रुपये में लिया है। खान एवं भूविज्ञान विभाग ने बुधवार को ई-नीलामी की। पहाड़ी का पत्थर नीला होने के कारण भवन निर्माण सामग्री के लिए अच्छी डिमांड रहेगी।
वर्ष 2005 तक निगाना, धारण व खरकड़ी सोहान की पहाड़ियों में खनन कार्य किया जाता था। पहाड़ियों में दुल्हेड़ी, निगाना, धारण, रिवासा, ढाणीमाहु, बजीणा, खरकड़ी आदि दर्जन भर गांवों के लोग खनन कार्य करते थे। दो दर्जन से ज्यादा क्रशर इकाइयां यहां चल रही थीं। निगाना व धारण की दोनों पहाड़ियां अरावली शृंखला के तहत आती हैं। वर्ष 1990 में खनन विभाग द्वारा जापान सरकार के सहयोग से अरावली शृंखला की पहाड़ियों को हरा भरा बनाने के लिए पोधरोपण परियोजना चलाई थी, जिसमें इन पहाड़ियों में हरित पट्टी को विकसित करने के लिए पौधरोपण किया गया था। 14 अप्रैल 2005 में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने जहां पौधरोपण हुआ था, वहां सभी पहाड़ियों को खनन कार्य के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
मिलेगा रोजगार
करीब 17 साल बाद खनन कार्य शुरू होने से लोगों को रोजगार मिलने की आस बंध गई है। 17 साल पहले जब खनन कार्य होता था उस समय आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग कार्य से सीधे रूप से जुड़े हुए थे।
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वर्ष 2005 तक निगाना, धारण व खरकड़ी सोहान की पहाड़ियों में खनन कार्य किया जाता था। पहाड़ियों में दुल्हेड़ी, निगाना, धारण, रिवासा, ढाणीमाहु, बजीणा, खरकड़ी आदि दर्जन भर गांवों के लोग खनन कार्य करते थे। दो दर्जन से ज्यादा क्रशर इकाइयां यहां चल रही थीं। निगाना व धारण की दोनों पहाड़ियां अरावली शृंखला के तहत आती हैं। वर्ष 1990 में खनन विभाग द्वारा जापान सरकार के सहयोग से अरावली शृंखला की पहाड़ियों को हरा भरा बनाने के लिए पोधरोपण परियोजना चलाई थी, जिसमें इन पहाड़ियों में हरित पट्टी को विकसित करने के लिए पौधरोपण किया गया था। 14 अप्रैल 2005 में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने जहां पौधरोपण हुआ था, वहां सभी पहाड़ियों को खनन कार्य के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
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मिलेगा रोजगार
करीब 17 साल बाद खनन कार्य शुरू होने से लोगों को रोजगार मिलने की आस बंध गई है। 17 साल पहले जब खनन कार्य होता था उस समय आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग कार्य से सीधे रूप से जुड़े हुए थे।
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