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प्रशिक्षण पर आए मेडिकल के 50 विद्यार्थियों को भेजा घर
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कोरोना वायरस के खतरे के चलते स्वास्थ्य विभाग अपने भावी चिकित्सकों की जान का जोखिम नहीं उठा रहा। विभाग ने अस्पताल में प्रशिक्षण पर आए एमबीबीएस, बीएएमएस स्टूडेंट्स को लॉकडाउन तक घर पर भेज दिया है। हालात सामान्य होने तक वो अपने घरों में ही रहेंगे। भावी चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर विभाग ने यह कदम उठाया है।
देश भर में कोरोना वायरस की महामारी फैली हुई है। जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पूरी तक अलर्ट है। स्वास्थ्य विभाग ने आइसोलेशन वार्ड, फ्लू ओपीडी में अलग से चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें वो कोरोना और फ्लू के मरीजों का चेकअप कर रहे है। जिला सामान्य अस्पताल में एमबीबीएस और बीएएमएस के स्टूडेंट्स का प्रशिक्षण भी चल रहा है। जिसमें मेडिकल स्टूडेंट्स को अनुभवी व अस्पताल में ड्यूटी दे रहे चिकित्सकों के साथ रहकर मरीजों का चेकअप और चिकित्सक के कार्यों सीखने होते है। कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रशिक्षण पर आए विद्यार्थियों को घर भेजने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को सभी विद्यार्थियों को लॉकडाउन तक घर भेज दिया है। भिवानी अस्पताल में करीब 50 एमबीबीएस और बीएएमएस विद्यार्थी प्रशिक्षण के लिए आते हैं। सभी को कहा है कि वे घर में ही रहे। इस दौरान भी अगर उनकी जरूरत हुई तो कॉल कर बुलाया जाएगा।
ये है वजह
प्रशिक्षण पर आए मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए पीपीटी कीट तो विभाग ने उपलब्ध करवा दी है मगर स्टूडेंट्स को काम का अनुभव कम है, जिसके कारण कोरोना वायरस के चलते थोड़ी से लापरवाही स्टूडेंट्स की सेहत के लिए खतरा हो सकता है। कोरोना वायरस में स्वास्थ्य विभाग ने अनुभवी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। मेडिकल स्टूडेंटस को ऐसी आपदा के समय में काम करने का अनुभव नहीं है इसलिए विभाग ने उन्हें घर पर भेज दिया है। लॉकडाउन तक यही व्यवस्था रहेगी।
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चिकित्सकों पर भी बढ़ेगा वर्कलॉड
एमबीबीएस और बीएएमएस के स्टूडेंट्स जनवरी 2020 से जिला सामान्य अस्पताल में इंटरशीप कर रहे है। दोनों क्लास से करीब 50 स्टूडेंट्स की अस्पताल में ड्यूटी लगाई गई है। जोकि अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी में चिकित्सकों के साथ काम करते है। प्रशिक्षित स्टूडेंट्स ड्यूटी चिकित्सक की मदद करते थे। अस्पताल में 1300 से 1500 मरीजों की ओपीडी रहती है। कोरोना वायरस के चलते ओपीडी में दो-तीन चिकित्सकों की ही ड्यूटी लगाई है। क्योंकि अधिकतर डॉक्टर कोविट-19 टीम में काम कर रहे है। लॉकडाउन में भी रोजाना 250 से 300 मरीजों की ओपीडी रहती है। अब दो-तीन चिकित्सकों के कंधों पर ही ओपीडी का भार है। प्रशिक्षित स्टूडेंट्स चिकित्सक की मदद करते थे। वही इमरजेंसी में भी माइनर ओटी और चेकअप के दौरान उनका साथ रहता था। अब चिकित्सकों पर काम का भार पड़ेगा।
कोरोना वायरस के चलते प्रशिक्षित चिकित्सकों को घर भेजा गया है। विभाग ने स्टूडेंट्स के स्वास्थ्य की ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। लॉकडाउन तक यह व्यवस्था की गई है अगर बीच में आवश्यक हुई तो उन्हें वापस अस्पताल में बुलाया लिया जाएगा। कोरोना वायरस के प्रति स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल
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देश भर में कोरोना वायरस की महामारी फैली हुई है। जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पूरी तक अलर्ट है। स्वास्थ्य विभाग ने आइसोलेशन वार्ड, फ्लू ओपीडी में अलग से चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें वो कोरोना और फ्लू के मरीजों का चेकअप कर रहे है। जिला सामान्य अस्पताल में एमबीबीएस और बीएएमएस के स्टूडेंट्स का प्रशिक्षण भी चल रहा है। जिसमें मेडिकल स्टूडेंट्स को अनुभवी व अस्पताल में ड्यूटी दे रहे चिकित्सकों के साथ रहकर मरीजों का चेकअप और चिकित्सक के कार्यों सीखने होते है। कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रशिक्षण पर आए विद्यार्थियों को घर भेजने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को सभी विद्यार्थियों को लॉकडाउन तक घर भेज दिया है। भिवानी अस्पताल में करीब 50 एमबीबीएस और बीएएमएस विद्यार्थी प्रशिक्षण के लिए आते हैं। सभी को कहा है कि वे घर में ही रहे। इस दौरान भी अगर उनकी जरूरत हुई तो कॉल कर बुलाया जाएगा।
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ये है वजह
प्रशिक्षण पर आए मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए पीपीटी कीट तो विभाग ने उपलब्ध करवा दी है मगर स्टूडेंट्स को काम का अनुभव कम है, जिसके कारण कोरोना वायरस के चलते थोड़ी से लापरवाही स्टूडेंट्स की सेहत के लिए खतरा हो सकता है। कोरोना वायरस में स्वास्थ्य विभाग ने अनुभवी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। मेडिकल स्टूडेंटस को ऐसी आपदा के समय में काम करने का अनुभव नहीं है इसलिए विभाग ने उन्हें घर पर भेज दिया है। लॉकडाउन तक यही व्यवस्था रहेगी।
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चिकित्सकों पर भी बढ़ेगा वर्कलॉड
एमबीबीएस और बीएएमएस के स्टूडेंट्स जनवरी 2020 से जिला सामान्य अस्पताल में इंटरशीप कर रहे है। दोनों क्लास से करीब 50 स्टूडेंट्स की अस्पताल में ड्यूटी लगाई गई है। जोकि अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी में चिकित्सकों के साथ काम करते है। प्रशिक्षित स्टूडेंट्स ड्यूटी चिकित्सक की मदद करते थे। अस्पताल में 1300 से 1500 मरीजों की ओपीडी रहती है। कोरोना वायरस के चलते ओपीडी में दो-तीन चिकित्सकों की ही ड्यूटी लगाई है। क्योंकि अधिकतर डॉक्टर कोविट-19 टीम में काम कर रहे है। लॉकडाउन में भी रोजाना 250 से 300 मरीजों की ओपीडी रहती है। अब दो-तीन चिकित्सकों के कंधों पर ही ओपीडी का भार है। प्रशिक्षित स्टूडेंट्स चिकित्सक की मदद करते थे। वही इमरजेंसी में भी माइनर ओटी और चेकअप के दौरान उनका साथ रहता था। अब चिकित्सकों पर काम का भार पड़ेगा।
कोरोना वायरस के चलते प्रशिक्षित चिकित्सकों को घर भेजा गया है। विभाग ने स्टूडेंट्स के स्वास्थ्य की ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। लॉकडाउन तक यह व्यवस्था की गई है अगर बीच में आवश्यक हुई तो उन्हें वापस अस्पताल में बुलाया लिया जाएगा। कोरोना वायरस के प्रति स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल