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लंपी वायरस : बिना हथियार कैसे लड़े वायरस से जंग
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भिवानी। भिवानी के पॉलीक्लीनिक की जिलास्तरीय लैब में न माइक्रोबायोलॉजिस्ट है, न पैथोलोजिस्ट और न ही रेडियोग्राफर। ऐसे में यहां रखीं एक्स-रे मशीन पिछले करीब 10 साल से प्रयोग नहीं होने के कारण खराब हो गई। लगभग 10 साल पहले आई अल्ट्रासाउंड मशीन का आज तक रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है। इसके अलावा ब्लड एनालाइजर भी धूल फांक रहा है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के 62 में से 15 पद रिक्त है। यह अकेले भिवानी के हालात नहीं बल्कि प्रदेश के अधिकतर जिलों के हालात है। ऐसे में संसाधनों के अभाव में लंपी जैसे वायरस से जंग में पशुपालन विभाग पिछड़ता नजर आ रहा है।
पशुओं का कोरोना बनी लंपी वायरस से जंग में पशुपालन विभाग के चिकित्सक भी निहत्थे से नजर आ रहे हैं। लंपी स्किन वायरस के लिए कोई विशेष वैक्सीन नहीं होने के कारण अब भेड़-बकरियों वाली पोक्स वैक्सीन लगाई जा रही है। पिछले करीब 15 दिन से लंपी स्किन वायरस प्रदेशभर में पशुपालकों और पशुपालन विभाग के लिए आफत बना है। अब तक सैकड़ों पशु खासकर गाय दम तोड़ चुकी है। ऐसे में अब पशुपालक चिंतित है।
प्रत्येक जिले में एक जिलास्तरीय लैब है। इन लैबों में मशीन व संसाधन तो है मगर उनका प्रयोग करने वाले नहीं है। न एक्स रे मशीन चलाने के लिए रेडियोग्राफर है और न अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए एक्सपर्ट। लैब टैक्निशियन तक नहीं है। ऐसे में अधिकतर जगह तो एक्स रे मशीन समेत अनेक मशीन खराब हो गई है। अधिकतर जगह रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड मशीनें भी धूल फांक रही है। अव्यवस्था का आलम यह है कि अधिकतर अस्पतालों में तो डीप फ्रिज तक नहीं है, खासकर ब्लॉकस्तरीय अस्पतालों की तो हालत खराब है।
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एक तिहाई चिकित्सकों के पद रिक्त, कैसे चले काम
पशु पालन विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। प्रदेश में करीब एक तिहाई पद रिक्त है। प्रदेश में चिकित्सकों के 1144 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 380 पद रिक्त हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पशु चिकित्सकों की कितनी कमी है। अब लगभग हर जिले में एक से डेढ़ लाख तक पशुओं को वैक्सीन की जानी है। पशु चिकित्सकों पर जल्द से जल्द वैक्सीन का दबाव है। ऐसे में दिनभर पशु चिकित्सक पशुओं की जांच और वैक्सीनेशन में जुटे हैं। पशु चिकित्सकों का स्पेशल कैडर नहीं होना भी परेशानी है।
वैक्सीन में 10 से 15 मिनट तो इलाज में लग रहे 30 मिनट
एक पशु चिकित्सक को पशु की वैक्सीन करने में औसतन कम से कम 10 से 15 मिनट लग रहे है जबकि एक पशु के इलाज में 30 मिनट तक लगते हैं। ऐसे में यदि एक सर्जन के पास 60 से 70 पशु आ गए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितना समय लगेगा। जबकि अब ओपीडी बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
दवा खरीदने के लिए आपातकालीन बजट, पशु पालक खरीद रहे दवाइयां
पशु पालन विभाग ने लंपी स्कीन वायरस को देखते हुए सभी उप निदेशकों को पांच-पांच लाख रुपये की इमरजेंसी ग्रांट दी है। यह ग्रांट लंपी वायरस के कहर को देखते हुए दवाओं की खरीद के लिए है। मगर अधिकतर जिलों में उप निदेशकों को स्पष्ट सूचना ही नहीं है कि इस ग्रांट का क्या करना है। काफी को जानकारी नहीं कि दवाइयां कैसे खरीदनी है। ऐसे में ग्रांट ऐसे ही विभाग के पास रखी है, वहीं पशु पालक दवाइयां खरीदने को मजबूर है। जिस कारण उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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एक करोड़ पशुओं के स्वास्थ्य का जिम्मा हम 750 पशु चिकित्सकों के कंधे पर हैं। यह एक प्राकृतिक आपदा है, जिसके विरुद्ध हम पशु चिकित्सक हर मोर्चे पर डट कर लड़ रहे हैं। हमारी सरकार से मांग है कि गाय के इलाज के लिए जल्द से जल्द पशु चिकित्सकों के 380 रिक्त पदों को भरा जाए। विभाग में 1800 पशु औषधालयों पर भी पशु चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए जाए और विभाग में अलग से एक्सपर्ट कैडर बनाया जाए ताकि भविष्य में विभाग हर चुनौती से लड़ने के लिए तैयार रहे।
- डॉ. विकास जागलान, राज्य महासचिव, एसोसिएशन ऑफ वेटरनरी सर्जन, हरियाणा।
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हमारे यहां एक्स-रे मशीन प्रयोग नहीं होने के कारण खराब हो गई है। नई मशीन का प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। जल्द ही सारी व्यवस्थाएं ठीक की जाएंगी।
- डॉ. सुखदेव सिंह, उप निदेशक, पशुपालन विभाग।
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पशुओं का कोरोना बनी लंपी वायरस से जंग में पशुपालन विभाग के चिकित्सक भी निहत्थे से नजर आ रहे हैं। लंपी स्किन वायरस के लिए कोई विशेष वैक्सीन नहीं होने के कारण अब भेड़-बकरियों वाली पोक्स वैक्सीन लगाई जा रही है। पिछले करीब 15 दिन से लंपी स्किन वायरस प्रदेशभर में पशुपालकों और पशुपालन विभाग के लिए आफत बना है। अब तक सैकड़ों पशु खासकर गाय दम तोड़ चुकी है। ऐसे में अब पशुपालक चिंतित है।
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प्रत्येक जिले में एक जिलास्तरीय लैब है। इन लैबों में मशीन व संसाधन तो है मगर उनका प्रयोग करने वाले नहीं है। न एक्स रे मशीन चलाने के लिए रेडियोग्राफर है और न अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए एक्सपर्ट। लैब टैक्निशियन तक नहीं है। ऐसे में अधिकतर जगह तो एक्स रे मशीन समेत अनेक मशीन खराब हो गई है। अधिकतर जगह रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड मशीनें भी धूल फांक रही है। अव्यवस्था का आलम यह है कि अधिकतर अस्पतालों में तो डीप फ्रिज तक नहीं है, खासकर ब्लॉकस्तरीय अस्पतालों की तो हालत खराब है।
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एक तिहाई चिकित्सकों के पद रिक्त, कैसे चले काम
पशु पालन विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। प्रदेश में करीब एक तिहाई पद रिक्त है। प्रदेश में चिकित्सकों के 1144 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 380 पद रिक्त हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पशु चिकित्सकों की कितनी कमी है। अब लगभग हर जिले में एक से डेढ़ लाख तक पशुओं को वैक्सीन की जानी है। पशु चिकित्सकों पर जल्द से जल्द वैक्सीन का दबाव है। ऐसे में दिनभर पशु चिकित्सक पशुओं की जांच और वैक्सीनेशन में जुटे हैं। पशु चिकित्सकों का स्पेशल कैडर नहीं होना भी परेशानी है।
वैक्सीन में 10 से 15 मिनट तो इलाज में लग रहे 30 मिनट
एक पशु चिकित्सक को पशु की वैक्सीन करने में औसतन कम से कम 10 से 15 मिनट लग रहे है जबकि एक पशु के इलाज में 30 मिनट तक लगते हैं। ऐसे में यदि एक सर्जन के पास 60 से 70 पशु आ गए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितना समय लगेगा। जबकि अब ओपीडी बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
दवा खरीदने के लिए आपातकालीन बजट, पशु पालक खरीद रहे दवाइयां
पशु पालन विभाग ने लंपी स्कीन वायरस को देखते हुए सभी उप निदेशकों को पांच-पांच लाख रुपये की इमरजेंसी ग्रांट दी है। यह ग्रांट लंपी वायरस के कहर को देखते हुए दवाओं की खरीद के लिए है। मगर अधिकतर जिलों में उप निदेशकों को स्पष्ट सूचना ही नहीं है कि इस ग्रांट का क्या करना है। काफी को जानकारी नहीं कि दवाइयां कैसे खरीदनी है। ऐसे में ग्रांट ऐसे ही विभाग के पास रखी है, वहीं पशु पालक दवाइयां खरीदने को मजबूर है। जिस कारण उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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एक करोड़ पशुओं के स्वास्थ्य का जिम्मा हम 750 पशु चिकित्सकों के कंधे पर हैं। यह एक प्राकृतिक आपदा है, जिसके विरुद्ध हम पशु चिकित्सक हर मोर्चे पर डट कर लड़ रहे हैं। हमारी सरकार से मांग है कि गाय के इलाज के लिए जल्द से जल्द पशु चिकित्सकों के 380 रिक्त पदों को भरा जाए। विभाग में 1800 पशु औषधालयों पर भी पशु चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए जाए और विभाग में अलग से एक्सपर्ट कैडर बनाया जाए ताकि भविष्य में विभाग हर चुनौती से लड़ने के लिए तैयार रहे।
- डॉ. विकास जागलान, राज्य महासचिव, एसोसिएशन ऑफ वेटरनरी सर्जन, हरियाणा।
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हमारे यहां एक्स-रे मशीन प्रयोग नहीं होने के कारण खराब हो गई है। नई मशीन का प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। जल्द ही सारी व्यवस्थाएं ठीक की जाएंगी।
- डॉ. सुखदेव सिंह, उप निदेशक, पशुपालन विभाग।