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लोहारू के ऐतिहासिक किले का होगा जीर्णोद्धार : सांसद

Fri, 19 Sep 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 19 Sep 2025 01:11 AM IST
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Loharu's historic fort will be renovated: MP
लोहारू का ऐतिहासिक किला। 
भिवानी। प्रदेश सरकार ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोद्धार कर उनको पर्यटन केंद्र के रूप से विकसित कर रही है। इससे प्रदेशों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसी कड़ी में लोहारू के ऐतिहासिक किले का भी जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण किया जाएगा, जिस पर प्रथम चरण में करीब चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी। ये जानकारी भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चौ. धर्मबीर सिंह ने वीरवार को लघु सचिवालय स्थित वीसी रूम में दी।
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इस दौरान सांसद ने लोहारू किले के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास भी किया। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सहकारिता, पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने नारनौल से प्रदेश के करीब 20 ऐतिहासिक स्थलों के नवीनीकरण कार्य का शिलान्यास किया।
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लोहारू का है ऐतिहासिक महत्व
इतिहास के झरोखे से देखें तो लोहारू रियासत की स्थापना सन् 1805 में हुई थी। शेखावटी के संस्थापक राव शेखावटी के वंशज ठाकुर नरहर दास ने सन् 1588 में लोहारू को बसाया था। यहां दो महत्वपूर्ण लड़ाइयां लड़ी गई। पहली लड़ाई सन् 1671 में ठाकुर मदन सिंह व हिसार के मुगल गवर्नर अलफू खान के बीच भू-राजस्व को देने से मना करने के कारण तथा दूसरी खेतड़ी के राजा भोपाल सिंह द्वारा लोहारू पर खेतड़ी के अधिकार को लेकर ठाकुर किरत सिंह के साथ हुई। इस लड़ाई में राजा भोपाल सिंह लोहारू के किले के बाहर मारा गया और उसी स्थान पर उनके सम्मान में एक छतरी का निर्माण किया गया।
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क्षेत्र के लोगों को नवाब के इस व्यवहार पर एतराज था। उन्होंने नवाब के विरुद्ध विद्रोह कर दिया तथा देश के अन्य भागों के क्रांतिकारियों को अपना सहयोग दिया। लोहारू का संघर्षमय इतिहास जंग, जोर और जुल्म की गाथाओं से भरा पड़ा है। लोगों ने स्वतंत्रता के आन्दोलनों में तो बढ़-चढ़ कर भाग लिया। लोहारू के किसानों का शस्त्र विद्रोह राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम का हिस्सा था। अंग्रेजों के शासन से 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया था लेकिन लोहारू को यह स्वतंत्रता 23 फरवरी 1948 को मिली, जब नवाबी शासन का अंत हुआ और लोहारू रियासत का भारत गणराज्य में विलय हुआ।

सन् 1971 तक लोहारू किले की कमान लोहारू के नवाब के पास थी। बाद में स्वर्गीय नवाब अमीनुद्दीन अहमद खान ने इसे हरियाणा सरकार को सौंप दिया। 22 दिसंबर 1972 को जिला भिवानी की स्थापना की गई। 6 नवंबर 1976 को लोहारू उप-मण्डल की स्थापना की गई। लोहारू का किला यहां की ऐतिहासिकता का प्रमाण है, जो अनायास ही यहां से गुजरने वालों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
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