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रंग लाई बेचैन की साहित्यिक साधना, तय किया लक्ष्मीचंद अवॉर्ड तक का सफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 12:21 AM IST
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Literary practice of the restless, decided the journey till Laxmichand Award
भिवानी। हरियाणवी साहित्यकार, चिंतक एवं कवि वीएम बेचैन की साहित्यिक साधना आखिरकार रंग लाई है। दुनिया के नामचीन अंग्रेजी कवियों की कविताओं को हरियाणवी में अनुवाद करके इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाने वाले बैचेन को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा हरियाणवी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए पंडित लख्मीचंद साहित्य सम्मान के लिए चयनित किया है। जिसके तहत ढाई लाख रुपये की राशि प्रशस्ति पत्र सरकार द्वारा दिया जाएगा। अब तक वीएम बेचैन दर्जनों साहित्यिक संस्थाओं से न केवल सम्मान प्राप्त कर चुके है बल्कि 2013 में उन्हें हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सर्वश्रेष्ठ कृति (सर्वश्रेष्ठ लेखक) सम्मान भी प्राप्त कर चुके है।
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ये सम्मान छोटी काशी भिवानी के साथ चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के लिए भी गौरव की बात है। बीएम बैचेन का कहना है कि यह सम्मान उन्होंने सरकार की कला संस्कृति एवं साहित्य के प्रति संवेदनात्मक पारदर्शिता एवं अपने मजदूर पिता की बेबसी और हालात से मिली रूह को चीर देने वाली पीड़ाओं को समर्पित कर दिया है। वीएम बेचैन पिता द्वारा महज आठवीं तक पढ़ाने के बाद अपने बूते पर मेहनत मजदूरी करके साहित्यिक गतिविधियों के बूते पर अपने आपको शिक्षित किया और एमए तक की पढ़ाई की। वे आगे पढ़कर हरियाणवी पर पीएचडी करना चाहते थे मगर वक्त और हालात उनके इस सपने को निगल गए। धूमिल सपने से रूआंसी आंखों से वीएम बेचैन ने बताया कि दुनिया अच्छे लोगों से भरी पड़ी है बशर्ते आपको उन तक पहुंचना पड़ेगा। जीवन के संघर्ष में उन्हें भी कदम कदम पर बहुत से संवेदनशील और अच्छे लोग मिले है जिन्होंने उनकी न केवल मदद की है बल्कि मानसिक हौसला अफजाई भी की है। वीएम बेचैन समय समय पर बोली को भाषा का दर्जा दिलाने की मांग भी उठाते रहे है। इसके लिए कभी ऑनलाइन सोशल मीडिया पर हरियाणवी रेडियो जक्शन चलाया तो कभी अपनी साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से देश प्रदेश के कवियों लेखकों को एकजुट कर मां बोली के लिए मुहिम चलाई। वर्तमान में वीएम बेचैन भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में युवा कल्याण विभाग में बतौर सांस्कृतिक पर्यवेक्षक कार्यरत है।
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