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Bhiwani News: नेता ने किया राजनीति में कमाल, पैतृक गांव पड़ा बदहाल, ग्रामीणों को विकास का मलाल
Sun, 17 Mar 2024 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 17 Mar 2024 11:58 PM IST
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गांव तालू की मुख्य गली में जमा गंदा पानी।
भिवानी। गांव में पैदा हुए नेता ने राजनीति में कमाल कर दिया, लेकिन अब भी गांव बदहाल है। ग्रामीणों को भी विकास योजनाएं नहीं मिलने का मलाल है। दरअसल हिसार लोकसभा क्षेत्र में आने वाला भिवानी जिले का गांव तालू भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी चौ. धर्मबीर सिंह का पैतृक गांव है। चौ. धर्मबीर लगातार दो योजनाओं से सांसद बनते आ रहे हैं अब तीसरी बार भी हैट्रिक की तैयारी में है। ऐसे हालातों में गांव तालू विकास से अभी भी अछूता ही रहा है।
ग्राम पंचायत की मानें तो पूरे कार्यकाल में हिसार के तत्कालीन सांसद बृजेंद्र कभी कभार ही गांव में आए होंगे, ठीक से तारीख व महीना भी याद नहीं है। विकास की बात करें तो आदर्श गांव का दर्जा एक दशक पहले पा चुके इस गांव में अब भी बदहाली और जलभराव स्पष्ट झलक रहा है। गांव में न तो गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था है न खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम। ग्राम पंचायत ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के समक्ष भी यहां आने पर ये मांगे उठाई। केवल आश्वासन के अलावा गांव को कुछ नहीं मिला।
गांव तालू में इस समय सुनीता महिला सरपंच हैं। सरपंच प्रतिनिधि सुरेश कुमार नंबरदार ने बताया कि हुड्डा सरकार में गांव को आदर्श गांव घोषित किया था। गांव में कोई बड़ी विकास योजना पर काम नहीं हुआ है। जबकि लंबे अर्से से गांव में खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम और आबादी के इलाके और जोहड़ों से गंदे पानी की निकासी की मांग रही है। पूरे गांव का गंदा पानी एक जोहड़ में इकट्ठा हो रहा है। जिसका दायरा भी बहुत छोटा है। ये गंदा पानी अपना दायरा पार कर सड़क और आबादी का रुख कर रहा है। अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने गांव से गंदे पानी की निकासी के लिए योजना बनाई, मगर यह मामला भी अब आचार संहिता के फेर में उलझकर रह गया।
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एक ही पार्टी के दो तत्कालीन सांसदों से जुड़ा रहा गांव तालू विकास के मामले में पिछड़ा है। ये गांव अच्छी खासी आबादी और राजनीतिक शाख रखने के बावजूद भी विकास के पथ पर आगे नहीं बढ़ पाया है। सरपंच प्रतिनिधि सुरेश कुमार नंबरदार ने बताया कि गांव की बड़ी मांगों का मसौदा हर राजनीतिक मंच पर हमने उठाया है। लेकिन इन मांगों पर कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
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ग्राम पंचायत की मानें तो पूरे कार्यकाल में हिसार के तत्कालीन सांसद बृजेंद्र कभी कभार ही गांव में आए होंगे, ठीक से तारीख व महीना भी याद नहीं है। विकास की बात करें तो आदर्श गांव का दर्जा एक दशक पहले पा चुके इस गांव में अब भी बदहाली और जलभराव स्पष्ट झलक रहा है। गांव में न तो गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था है न खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम। ग्राम पंचायत ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के समक्ष भी यहां आने पर ये मांगे उठाई। केवल आश्वासन के अलावा गांव को कुछ नहीं मिला।
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गांव तालू में इस समय सुनीता महिला सरपंच हैं। सरपंच प्रतिनिधि सुरेश कुमार नंबरदार ने बताया कि हुड्डा सरकार में गांव को आदर्श गांव घोषित किया था। गांव में कोई बड़ी विकास योजना पर काम नहीं हुआ है। जबकि लंबे अर्से से गांव में खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम और आबादी के इलाके और जोहड़ों से गंदे पानी की निकासी की मांग रही है। पूरे गांव का गंदा पानी एक जोहड़ में इकट्ठा हो रहा है। जिसका दायरा भी बहुत छोटा है। ये गंदा पानी अपना दायरा पार कर सड़क और आबादी का रुख कर रहा है। अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने गांव से गंदे पानी की निकासी के लिए योजना बनाई, मगर यह मामला भी अब आचार संहिता के फेर में उलझकर रह गया।
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एक ही पार्टी के दो तत्कालीन सांसदों से जुड़ा रहा गांव तालू विकास के मामले में पिछड़ा है। ये गांव अच्छी खासी आबादी और राजनीतिक शाख रखने के बावजूद भी विकास के पथ पर आगे नहीं बढ़ पाया है। सरपंच प्रतिनिधि सुरेश कुमार नंबरदार ने बताया कि गांव की बड़ी मांगों का मसौदा हर राजनीतिक मंच पर हमने उठाया है। लेकिन इन मांगों पर कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।