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Bhiwani News: चिकित्सकों की कमी से डगमगा रही स्वास्थ्य सुविधा
Fri, 01 Aug 2025 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:51 AM IST
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पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज।
भिवानी। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य तो पूरा किया। लेकिन विभाग इसका शुभारंभ व चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं कर पाया। जिले में नौ डिप्टी सिविल सर्जन के साथ ही प्रधान चिकित्सा अधिकारी व 33 सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद लंबे अर्से से खाली पड़े हैं। इनमें से दो से तीन पद तो लगभग दो साल से खाली पड़े हैं। इसके अलावा जिले में मेडिकल ऑफिसर के भी 80 पद खाली पड़े हैं।
चिकित्सकों की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचसी व सीएचसी में भी स्वास्थ्य सुविधा डगमगा रही है। दरअसल, जिले में एक नागरिक जिला अस्पताल, एक राजकीय नेत्र अस्पताल, चार सब डिविजनल अस्पताल हैं। इसके अलावा जिले में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। वहीं जिले में 208 मेडिकल ऑफिसर में से 128 मेडिकल ऑफिसर ही सेवाएं दे रहे हैं। मेडिकल ऑफिसर के लगभग 80 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
विशेषज्ञ नहीं होने के कारण सब डिविजनल अस्पतालों में आने वाले मरीजों को भी जिला अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। लेकिन जिला अस्पताल की हालत भी अच्छी नहीं है। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में प्रधान चिकित्सा अधिकारी का पद खाली है। ऐसे में कान, नाक व गला रोग विशेषज्ञ को कार्यवाहक पीएमओ के रूप में नियुक्त किया गया है। इस कारण मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट का भी एक पद खाली पड़ा है। ईसीजी के लिए महिला टेक्निशियन का पद खाली पड़ा है। मरीजों को दवा देने के लिए फार्मासिस्ट के सात पद खाली पड़े हैं।
जिले में चिकित्सकों के पदों को भरने के लिए लगातार मुख्यालय से संपर्क किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि जल्द ही चिकित्सकों की नियुक्ति हो। जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाया जा सके।
-डॉ. रघुवीर शांडिल्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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चिकित्सकों की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचसी व सीएचसी में भी स्वास्थ्य सुविधा डगमगा रही है। दरअसल, जिले में एक नागरिक जिला अस्पताल, एक राजकीय नेत्र अस्पताल, चार सब डिविजनल अस्पताल हैं। इसके अलावा जिले में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। वहीं जिले में 208 मेडिकल ऑफिसर में से 128 मेडिकल ऑफिसर ही सेवाएं दे रहे हैं। मेडिकल ऑफिसर के लगभग 80 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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विशेषज्ञ नहीं होने के कारण सब डिविजनल अस्पतालों में आने वाले मरीजों को भी जिला अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। लेकिन जिला अस्पताल की हालत भी अच्छी नहीं है। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में प्रधान चिकित्सा अधिकारी का पद खाली है। ऐसे में कान, नाक व गला रोग विशेषज्ञ को कार्यवाहक पीएमओ के रूप में नियुक्त किया गया है। इस कारण मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट का भी एक पद खाली पड़ा है। ईसीजी के लिए महिला टेक्निशियन का पद खाली पड़ा है। मरीजों को दवा देने के लिए फार्मासिस्ट के सात पद खाली पड़े हैं।
जिले में चिकित्सकों के पदों को भरने के लिए लगातार मुख्यालय से संपर्क किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि जल्द ही चिकित्सकों की नियुक्ति हो। जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाया जा सके।
-डॉ. रघुवीर शांडिल्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी