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किरण चौधरी को छोड़ कोई भी महिला नहीं जीत सकी जनता का विश्वास
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111 फोटो ग्रामीणों को संबोधित करते हुए तोशाम से कांग्रेंस प्रत्याशी किरण चौधरी।
- फोटो : Bhiwani
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जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस नेत्री किरण चौधरी को छोड़ कोई भी अन्य महिला उम्मीदवार जनता का विश्वास नहीं जीत पाई और यहीं कारण है कि पिछले 52 साल के इतिहास में भिवानी, बवनीखेड़ा और लोहारू से कोई भी महिला विधायक नहीं बनी हैै। किस्मत अनेक ने आजमाई और अच्छे-खासे वोट भी हासिल किए मगर विधायक बनने का ताज उनके सिर नहीं सजा। पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के गढ़ माने जाने वाले तोशाम में ही किरण चौधरी ने तकदीर बदली और 2005 के उप चुनाव में पहली दफा जीत हासिल की। इसके बाद 2009 और 2014 के चुनाव में भी जीत हासिल की।
किरण चौधरी के नाम है रिकार्ड जीत : तोशाम में लगातार 39 साल तक पुरुष विधायकों का राज रहा। 2005 में पूर्व कृषि मंत्री चौ. सुरेंद्र सिंह के आकस्मिक निधन के बाद उप चुनाव हुए और उनकी पत्नी किरण चौधरी पहली बार चुनाव लड़ी। पहले ही चुनाव में वोटों का नया रिकार्ड बनाया। उन्होंने पहले ही चुनाव में 99.37 फीसदी वोट लेकर एक नया इतिहास रचा। किरण चौधरी ने 2005 में मंगल सिंह खरेटा को 125560, 2009 में कर्नल गजराज सिंह 46107 और 2014 में कमला रानी को 19741 वोटों से हराया।
दया भुरटाना, कमला रानी, निर्मला सर्राफ ने भी दिखाया दम, जीत छिटकी : विभिन्न राजनीतिक दलों से चुनावी मैदान में उतरी दया भुरटाना, कमला रानी, निर्मला सर्राफ ने भी दम दिखाया मगर उप विजेता रही। जीत दर्ज नहीं कर पाई। 2014 चुनाव में बवानीखेड़ा से इनेलो सीट पर चुनाव लड़ रही दया भुरटाना अंतिम राउंड से पहले तक बढ़त बनाए हुए थी मगर अंतिम राउंड में पासा पलटा और बिशंबर वाल्मीकि ने करीब ढाई हजार वोटों से जीत हासिल की। दया भुरटाना को 44764 वोट मिले। इसी तरह भिवानी सीट पर भी निवर्तमान विधायक के सामने इनेलो की निर्मला सर्राफ थी। निर्मला सर्राफ ने 21423 वोट हासिल किए और वह उप विजेता रही। इस चुनाव में सभापा की नीलम अग्रवाल भी चुनाव लड़ी थी। 2014 चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की बेटी सुमित्रा देवी लोहारू विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी की सीट पर चुनाव लड़ी मगर हार गई।
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तोशाम में पहली बार दोनों महिला उम्मीदवारों में हुई टक्कर : तोशाम में पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार दो महिला उम्मीदवारों में टक्कर हुई। कांग्रेस से किरण चौधरी थी तो इनेलो से कमला रानी। दोनों में कउी टक्कर हुई। इस चुनाव में किरण चौधरी ने 58218 वोट हासिल किए तो कमला रानी को 38477 वोट मिले। कमला रानी उप विजेता रही।
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किरण चौधरी के नाम है रिकार्ड जीत : तोशाम में लगातार 39 साल तक पुरुष विधायकों का राज रहा। 2005 में पूर्व कृषि मंत्री चौ. सुरेंद्र सिंह के आकस्मिक निधन के बाद उप चुनाव हुए और उनकी पत्नी किरण चौधरी पहली बार चुनाव लड़ी। पहले ही चुनाव में वोटों का नया रिकार्ड बनाया। उन्होंने पहले ही चुनाव में 99.37 फीसदी वोट लेकर एक नया इतिहास रचा। किरण चौधरी ने 2005 में मंगल सिंह खरेटा को 125560, 2009 में कर्नल गजराज सिंह 46107 और 2014 में कमला रानी को 19741 वोटों से हराया।
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दया भुरटाना, कमला रानी, निर्मला सर्राफ ने भी दिखाया दम, जीत छिटकी : विभिन्न राजनीतिक दलों से चुनावी मैदान में उतरी दया भुरटाना, कमला रानी, निर्मला सर्राफ ने भी दम दिखाया मगर उप विजेता रही। जीत दर्ज नहीं कर पाई। 2014 चुनाव में बवानीखेड़ा से इनेलो सीट पर चुनाव लड़ रही दया भुरटाना अंतिम राउंड से पहले तक बढ़त बनाए हुए थी मगर अंतिम राउंड में पासा पलटा और बिशंबर वाल्मीकि ने करीब ढाई हजार वोटों से जीत हासिल की। दया भुरटाना को 44764 वोट मिले। इसी तरह भिवानी सीट पर भी निवर्तमान विधायक के सामने इनेलो की निर्मला सर्राफ थी। निर्मला सर्राफ ने 21423 वोट हासिल किए और वह उप विजेता रही। इस चुनाव में सभापा की नीलम अग्रवाल भी चुनाव लड़ी थी। 2014 चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की बेटी सुमित्रा देवी लोहारू विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी की सीट पर चुनाव लड़ी मगर हार गई।
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तोशाम में पहली बार दोनों महिला उम्मीदवारों में हुई टक्कर : तोशाम में पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार दो महिला उम्मीदवारों में टक्कर हुई। कांग्रेस से किरण चौधरी थी तो इनेलो से कमला रानी। दोनों में कउी टक्कर हुई। इस चुनाव में किरण चौधरी ने 58218 वोट हासिल किए तो कमला रानी को 38477 वोट मिले। कमला रानी उप विजेता रही।