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Bhiwani News: ग्रेप-3 के कारण 14 दिन से खानक के क्रशर बंद, जिले में निर्माण सामग्री का संकट गहराया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 11:29 PM IST
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Khanak crushers shut for 14 days due to Grape-3, deepening construction material crisis in the district
खानक में बंद पड़ा क्रसर।
भिवानी। ग्रेप थ्री के आदेशों के कारण पिछले 14 दिनों से खानक और खरकड़ी सोहान के क्रशर जोन बंद पड़े हैं जिसके चलते पूरे जिले में भवन निर्माण सामग्री का संकट गहरा गया है। क्रशरों पर बचा हुआ सीमित स्टॉक भी अब खत्म होने की कगार पर है। वहीं जिले में चल रही सरकारी परियोजनाओं में राजस्थान के भूरा पत्थर की डस्ट (नाला शेड) इस्तेमाल की जा रही है जिसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार खानक में नीले पत्थर से तैयार होने वाली डस्ट को देशभर में उसकी मजबूती और गुणवत्ता के कारण खासा पसंद किया जाता है। निजी निर्माण में लोग भूरा पत्थर की जगह खानक की डस्ट का ही उपयोग करना पसंद करते हैं। मगर ग्रेप तीन की पाबंदी के बाद यह आपूर्ति ठप पड़ गई है।
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खानक और खरकड़ी सोहान क्षेत्र के करीब 175 क्रशर 11 नवंबर से बंद हैं। जिला प्रशासन ने इन्हें बंद कराने के लिए बिजली निगम से तीन फेज बिजली आपूर्ति को सिंगल फेज में बदलवा दिया ताकि कोई क्रशर पाबंदी के दौरान चालू न हो सके। जिले में हजारों निजी भवन निर्माण कार्य चल रहे हैं जिन पर अब डस्ट और रोड़ी की कमी गंभीर रूप ले चुकी है।
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इसी बीच सरकारी विकास परियोजनाओं में भी भूरा पत्थर की डस्ट का उपयोग बढ़ गया है जिसकी गुणवत्ता निम्न मानी जाती है। कई परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं और कुछ सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।



महंगाई के दौर में घर बनाना और महंगा हो गया है। ग्रेप तीन की पाबंदियों के बाद भवन निर्माण सामग्री के दामों में उछाल आ गया है। खानक की डस्ट 900 से 1000 रुपये प्रति टन तक बिक रही है जबकि दुकानों पर प्रति फीट के हिसाब से रेट वसूले जा रहे हैं। आम आदमी को सामग्री में राहत नहीं मिल पा रही वहीं सरकारी परियोजनाओं में राजस्थान के भूरे पत्थर की डस्ट का उपयोग किया जा रहा है जो मजबूत भी कम है और सस्ती भी। - सुरेश कुमार सैनी, सामाजिक कार्यकर्ता


ग्रेप तीन के आदेशों के बीच निजी भवन निर्माण से लेकर सरकारी परियोजनाओं के काम निरंतर चल रहे हैं जबकि इस श्रेणी में धूल-मिट्टी उड़ाने वाला कोई कार्य नहीं किया जा सकता। क्रशर जोन बंद होने से निर्माण सामग्री का संकट गहरा गया है। आम आदमी अपने भवन का निर्माण पूरा कराने में ज्यादा खर्च वहन कर रहा है। हर वर्ष ग्रेप की पाबंदी लगते ही सामग्री के मनमाने दाम वसूले जाते हैं इसलिए प्रशासन की निगरानी और कड़ी होनी चाहिए। सरकारी कार्यों में उपयोग हो रही सामग्री की नियमित जांच भी जरूरी है। - विनोद प्रजापति, वार्ड पार्षद


दिनोद रोड पर नगर परिषद द्वारा करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन ठेकेदार यहां भी राजस्थान की भूरा पत्थर की डस्ट का उपयोग कर रहा है। जिला उपायुक्त को शिकायत मिलने के बाद एडीसी ने इस कार्य के सैंपल भरवाकर जांच के लिए भेज दिए हैं। रिपोर्ट आना बाकी है। अन्य कई सरकारी कार्यों में भी ठेकेदार निम्न गुणवत्ता की सामग्री उपयोग कर रहे हैं, जिन पर प्रशासन की निगरानी बेहद कमजोर है। - अनिल कुमार, पार्षद प्रतिनिधि

जिले में 316 तक पहुंचा एक्यूआई, बारिश के बाद ही राहत के आसार
भिवानी में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार को भी एक्यूआई 316 दर्ज किया गया। पिछले 13 दिनों में 12 दिन एक्यूआई 300 से ऊपर रहा जिससे जिले की हवा बेहद दूषित हो चुकी है। कूड़ा जलाने और खेतों में पराली जलाने के कुछ मामलों में एफआईआर और जुर्माना भी हुआ है मगर राहत अभी दूर है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद ही प्रदूषण स्तर में कमी आने की संभावना है।



जिले में वायु प्रदूषण सूचकांक (एक्यूआई) पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। मुख्य जगहों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। सरकारी परियोजनाओं के निर्माण काम में भी हिदायतों की पालना की सख्त हिदायतें दी हुई हैं। क्रशर जोन भी ग्रेप तीन के आदेशों के चलते बंद कराया गया है। - डॉ. सुनील श्योराण, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भिवानी
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