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दुश्मनों के छक्के छुड़ा हुए थे कुर्बान
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 26 Jul 2016 12:25 AM IST
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kargil
- फोटो : फाइल फोटो
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कारगिल युद्ध के ऑपरेशन विजय को 16 वर्ष हो गए है। भिवानी जिले के 12 जवानों ने कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए देश के लिए कुर्बान हो गए थे। मातृभूमि पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले ये वीर बलिदानी बेशक आज हमारे बीच नहीं है मगर इनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में बसी है। ये सभी साहस और युद्ध कौशल की मिसाल है। पूरा देश आज इन पर गर्व कर रहा हैं।
पांच भाइयों ने लड़ा कारगिल युद्ध, अब भी देश सेवा का जज्बा
राजस्थान के झुंझुनू जिले के गांव वनगोठड़ी के पांच भाइयों ने एक साथ कारगिल युद्ध लड़ा। फिलहाल भिवानी शहर की जगत कॉलोनी मेें आबाद शहीद कंवरपाल के भाई पवन ने बताया कि बेशक पांचों भाई अलग-अलग यूनिट में थे, पर मकसद सभी का एक था। युद्ध में एक भाई कंवरपाल दुश्मनों से लड़ते-लड़ते शहीद हुआ। आर्मी के जवान रहे पवन कुमार ने बताया कि कारगिल युद्ध में पांच भाई प्रताप सिंह,लक्ष्मण, रामअवतार, कंवरपाल और उसने स्वयं भाग लिया। प्रतापसिंह और लक्ष्मण सेवानिवृत्त हो चुके हैं। भाई कंवर पाल की शहादत पर गर्व है। कंवर पाल सेकेंड राज राइफल में थे। एक यूनिट एक अटैक करती है, मगर कंवर पाल की यूनिट ने दो अटैक किए। यूनिट के जवानों ने भूखे-प्यासे होने के बावजूद युद्ध लड़ा और दुश्मनों को मात दी।
भिवानी के इन वीर सैनिकों ने पाई थी शहादत
जिले के जोगेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, राजवीर सिंह, राम कुमार, राज कुमार, सिद्धराम, कुलदीप सिंह, संजय सिंह, लाल सिंह, सुरेंद्र सिंह ने शहादत प्राप्त की। अनेक वीर ऐसे भी रहे जिन्होंने दुश्मनों को खदेड़ते हुए तिरंगा लहराया। कुछ घायल भी हुए।
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पोती सुनाती है दादू की वीरता की कहानी
बहल (भिवानी)। हरियाणाके जिन वीर सैनिकों ने इस युुद्ध में अपना बलिदान दिया था, उनमें भिवानी जिले के देवावास गांव के रामकुमार लांबा भी शामिल थे। रामकुमार का परिवार उनके वीरगति को प्राप्त होने के बाद बहल में गैस एजेंसी एलॉट होने के बाद से ही बहल में रहता है। उनके शहीद होने के बाद 12 वर्ष बाद पैदा हुई पोती हंसुजा जब दीवार पर लगी फोटो के बारे में पूछती है तो परिवारजन उसे से गर्व से शहीद रामकुमार की गौरवगाथा सुनाते है।
परिवार में शहीद की पत्नी कमला देवी, पुत्र देवेंद्र, नगेंद्र तथा पुत्री सोनू के अलावा पुत्रवधू चंद्रकला के मुताबिक, उनको आज भी उनके आसपास होने का आभास है। 17 साल बाद भी उनको नहीं लगता है कि वे हमसे बिछड़े हैं। तुतलाकर बोलने वाली पोत्री हंसुजा भी अपने दादा की तस्वीर की ओर इशारा कर उनको शहीद दादू के नाम से पुकारती है। शहीद की पत्नी कमला देवी, पुत्र देवेंद्र, नगेंद्र तथा पुत्री सोनू के अलावा पुत्रवधू चंद्रकला तथा पौत्री हंसुजा है। देवेंद्र जहां गैस एजेंसी का काम देखता है वहीं छोटा बेटा नगेंद्र लॉ ग्रेजुएट है। पुत्री सोनू बीटेक करने के बाद बिधनोई में ब्याही है।
चार दुश्मनों को मार शहीद हुए रामकुमार
18 ग्रेनेडियर्स द्वारा पाक समर्थित घुसपैठियों को निकालने के लिए एक योजना के मुताबिक 2 और 3 जून की रात को द्रास सैक्टर में तोलोलिंग क्षेत्र में 15000 फीट की ऊंचाई पर मोर्चाबंदी की गई थी। भारतीय सैनिकों को आते देख घुसपैठियों ने गोलीबारी की। लेकिन, रामकुमार ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए उस संगर के निकट पहुंच गए जहां से यूनिवर्सल मशीनगन दागी जा रही थी। वे जैसे ही लक्ष्य के निकट पहुंचे तो उन पर गोलियां दागी गई जो उनके कंधे तथा कमर पर लगी। घायल अवस्था में ही रेंगकर संगर के निकट जा पहुंचे। हाथ में लिया हैंड ग्रेनेड फेंककर मौत के पल-पल करीब जा रहे रामकुमार ने एक दुश्मन को मार गिराया, वहीं दो को घायल कर दिया। बाद में जैसे ही दुश्मन उनके करीब आए तो दो और दुश्मनों को ढेर कर दिया। लेकिन, बाद में गहरे जमों को सह नहीं पाए और वीरगति को प्राप्त हो गए।
सरकार ने उनको उनकी बहादुरी पर 11 मार्च 2000 को वीर चक्र से समानित किया। इससे पहले श्रीलंका की लड़ाई आपरेशन पवन में उनको विशेष सेवा मेडल से अलंकृत किया गया था। पंचायत ने गांव के बहादुर सैनिक के समान के लिए मैन बस स्टैंड पर 35 बाई 35 फुट का स्मारक बनाने के लिए जगह दी जिस पर शहीद के परिवार द्वारा उनका स्मारक स्थल बनाया गया है।
केंद्र सरकार से नाराज हैं शहीद के परिजन
गांव भागवी निवासी कारगिल शहीद जगदीश तक्षक के परिजनों ने केंद्र सरकार की सभी श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान न किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। शहीद के परिजनों ने भारतीय रेल सेवा में भी सभी प्रकार की ट्रेनों में सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग सरकार से उठाई है। इस समय कारगिल शहीदों के परिजनों को केवल स्लीपर गाड़ियों में 75 फीसदी ही आरक्षण मिल रहा है।
चरखी दादरी के गांव भागवी निवासी कारगिल शहीद जगदीश तक्षक दो फरवरी 1995 में खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। वह फुटबाल का खिलाड़ी था। जगदीश तक्षक जाट रेजीमेंट में भर्ती हुआ था जबकि कारगिल ऑपरेशन के दौरान वह 34 आरआर रेजीमेंट में जम्मू कश्मीर के बारामूला में गनीबाबा क्षेत्र में तैनात था। इस दौरान शत्रु से लोहा लेते वह 26 फरवरी 2000 को शहीद हो गया था।
शहादत के ढाई मास बाद बेटा जन्मा
शहीद जगदीश की शहादत के ढाई मास बाद शहीद की पत्नी बबीता ने पुत्र जंगवीर को जन्म दिया था। पुत्र जंगवीर कक्षा 11 वीं में पढ़ रहा है। शहीद की पत्नी बबीता देवी ने केंद्र सरकार से आर्मी अस्पतालों में कारगिल शहीदों के आश्रितों का प्राथमिकता के आधार पर उपचार करवाने, रेलवे में सभी श्रेणी की यात्रा में सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने के अलावा केंद्र सरकार की सभी श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण दिए जाने की मांग उठाई है। शहीद की मां खजानी देवी, पिता रणधीर ङ्क्षसह, भाई रमेश तक्षक को शहीद जगदीश तक्षक की शहादत पर गर्व है।
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पांच भाइयों ने लड़ा कारगिल युद्ध, अब भी देश सेवा का जज्बा
राजस्थान के झुंझुनू जिले के गांव वनगोठड़ी के पांच भाइयों ने एक साथ कारगिल युद्ध लड़ा। फिलहाल भिवानी शहर की जगत कॉलोनी मेें आबाद शहीद कंवरपाल के भाई पवन ने बताया कि बेशक पांचों भाई अलग-अलग यूनिट में थे, पर मकसद सभी का एक था। युद्ध में एक भाई कंवरपाल दुश्मनों से लड़ते-लड़ते शहीद हुआ। आर्मी के जवान रहे पवन कुमार ने बताया कि कारगिल युद्ध में पांच भाई प्रताप सिंह,लक्ष्मण, रामअवतार, कंवरपाल और उसने स्वयं भाग लिया। प्रतापसिंह और लक्ष्मण सेवानिवृत्त हो चुके हैं। भाई कंवर पाल की शहादत पर गर्व है। कंवर पाल सेकेंड राज राइफल में थे। एक यूनिट एक अटैक करती है, मगर कंवर पाल की यूनिट ने दो अटैक किए। यूनिट के जवानों ने भूखे-प्यासे होने के बावजूद युद्ध लड़ा और दुश्मनों को मात दी।
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भिवानी के इन वीर सैनिकों ने पाई थी शहादत
जिले के जोगेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, राजवीर सिंह, राम कुमार, राज कुमार, सिद्धराम, कुलदीप सिंह, संजय सिंह, लाल सिंह, सुरेंद्र सिंह ने शहादत प्राप्त की। अनेक वीर ऐसे भी रहे जिन्होंने दुश्मनों को खदेड़ते हुए तिरंगा लहराया। कुछ घायल भी हुए।
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पोती सुनाती है दादू की वीरता की कहानी
बहल (भिवानी)। हरियाणाके जिन वीर सैनिकों ने इस युुद्ध में अपना बलिदान दिया था, उनमें भिवानी जिले के देवावास गांव के रामकुमार लांबा भी शामिल थे। रामकुमार का परिवार उनके वीरगति को प्राप्त होने के बाद बहल में गैस एजेंसी एलॉट होने के बाद से ही बहल में रहता है। उनके शहीद होने के बाद 12 वर्ष बाद पैदा हुई पोती हंसुजा जब दीवार पर लगी फोटो के बारे में पूछती है तो परिवारजन उसे से गर्व से शहीद रामकुमार की गौरवगाथा सुनाते है।
परिवार में शहीद की पत्नी कमला देवी, पुत्र देवेंद्र, नगेंद्र तथा पुत्री सोनू के अलावा पुत्रवधू चंद्रकला के मुताबिक, उनको आज भी उनके आसपास होने का आभास है। 17 साल बाद भी उनको नहीं लगता है कि वे हमसे बिछड़े हैं। तुतलाकर बोलने वाली पोत्री हंसुजा भी अपने दादा की तस्वीर की ओर इशारा कर उनको शहीद दादू के नाम से पुकारती है। शहीद की पत्नी कमला देवी, पुत्र देवेंद्र, नगेंद्र तथा पुत्री सोनू के अलावा पुत्रवधू चंद्रकला तथा पौत्री हंसुजा है। देवेंद्र जहां गैस एजेंसी का काम देखता है वहीं छोटा बेटा नगेंद्र लॉ ग्रेजुएट है। पुत्री सोनू बीटेक करने के बाद बिधनोई में ब्याही है।
चार दुश्मनों को मार शहीद हुए रामकुमार
18 ग्रेनेडियर्स द्वारा पाक समर्थित घुसपैठियों को निकालने के लिए एक योजना के मुताबिक 2 और 3 जून की रात को द्रास सैक्टर में तोलोलिंग क्षेत्र में 15000 फीट की ऊंचाई पर मोर्चाबंदी की गई थी। भारतीय सैनिकों को आते देख घुसपैठियों ने गोलीबारी की। लेकिन, रामकुमार ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए उस संगर के निकट पहुंच गए जहां से यूनिवर्सल मशीनगन दागी जा रही थी। वे जैसे ही लक्ष्य के निकट पहुंचे तो उन पर गोलियां दागी गई जो उनके कंधे तथा कमर पर लगी। घायल अवस्था में ही रेंगकर संगर के निकट जा पहुंचे। हाथ में लिया हैंड ग्रेनेड फेंककर मौत के पल-पल करीब जा रहे रामकुमार ने एक दुश्मन को मार गिराया, वहीं दो को घायल कर दिया। बाद में जैसे ही दुश्मन उनके करीब आए तो दो और दुश्मनों को ढेर कर दिया। लेकिन, बाद में गहरे जमों को सह नहीं पाए और वीरगति को प्राप्त हो गए।
सरकार ने उनको उनकी बहादुरी पर 11 मार्च 2000 को वीर चक्र से समानित किया। इससे पहले श्रीलंका की लड़ाई आपरेशन पवन में उनको विशेष सेवा मेडल से अलंकृत किया गया था। पंचायत ने गांव के बहादुर सैनिक के समान के लिए मैन बस स्टैंड पर 35 बाई 35 फुट का स्मारक बनाने के लिए जगह दी जिस पर शहीद के परिवार द्वारा उनका स्मारक स्थल बनाया गया है।
केंद्र सरकार से नाराज हैं शहीद के परिजन
गांव भागवी निवासी कारगिल शहीद जगदीश तक्षक के परिजनों ने केंद्र सरकार की सभी श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान न किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। शहीद के परिजनों ने भारतीय रेल सेवा में भी सभी प्रकार की ट्रेनों में सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग सरकार से उठाई है। इस समय कारगिल शहीदों के परिजनों को केवल स्लीपर गाड़ियों में 75 फीसदी ही आरक्षण मिल रहा है।
चरखी दादरी के गांव भागवी निवासी कारगिल शहीद जगदीश तक्षक दो फरवरी 1995 में खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। वह फुटबाल का खिलाड़ी था। जगदीश तक्षक जाट रेजीमेंट में भर्ती हुआ था जबकि कारगिल ऑपरेशन के दौरान वह 34 आरआर रेजीमेंट में जम्मू कश्मीर के बारामूला में गनीबाबा क्षेत्र में तैनात था। इस दौरान शत्रु से लोहा लेते वह 26 फरवरी 2000 को शहीद हो गया था।
शहादत के ढाई मास बाद बेटा जन्मा
शहीद जगदीश की शहादत के ढाई मास बाद शहीद की पत्नी बबीता ने पुत्र जंगवीर को जन्म दिया था। पुत्र जंगवीर कक्षा 11 वीं में पढ़ रहा है। शहीद की पत्नी बबीता देवी ने केंद्र सरकार से आर्मी अस्पतालों में कारगिल शहीदों के आश्रितों का प्राथमिकता के आधार पर उपचार करवाने, रेलवे में सभी श्रेणी की यात्रा में सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने के अलावा केंद्र सरकार की सभी श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण दिए जाने की मांग उठाई है। शहीद की मां खजानी देवी, पिता रणधीर ङ्क्षसह, भाई रमेश तक्षक को शहीद जगदीश तक्षक की शहादत पर गर्व है।