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Bhiwani News: जर्जर स्कूल भवन में पढ़ रहे मासूम, कभी भी गिर सकती है छत
Wed, 19 Aug 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 19 Aug 2026 01:12 AM IST
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ढाणा जोगी के राजकीय प्राथमिक पाठशाला के भवन की जर्जर हालात में छत।
- फोटो : 1
ढिगावा मंडी। तहसील लोहारू के गांव ढाणा जोगी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला का एक कमरा और बरामदा पूरी तरह जर्जर हो चुका है। स्कूल की छतों में गहरी दरारें आ गई हैं। सरिये जंग खा रहे हैं और दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना आम बात हो गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि जर्जर भवन कभी भी गिर सकता है जिससे बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन की बदहाली को लेकर उच्च अधिकारियों और सरकार को कई बार लिखित शिकायतें और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि जर्जर छत गिरने से किसी बच्चे, शिक्षक या कर्मचारी के साथ हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल भवन की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए और जर्जर छत व दीवारों की अविलंब मरम्मत कराई जाए। यदि भवन की मरम्मत संभव नहीं है तो नया भवन बनाया जाए। नरेश, उमेद, जयपाल, सुरेश और सुरेन्द्र ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
स्कूल भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए।
जर्जर छत और दीवारों की अविलंब मरम्मत कराई जाए।
मरम्मत संभव नहीं होने पर नए भवन का निर्माण कराया जाए।
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।
वर्जन
हमने पिछले साल भी विभाग को लिखित में इसकी मरम्मत के लिए भेजा था। इस बार भी एसएमसी और स्कूल की तरफ से प्रस्ताव पास कर शिक्षा विभाग को भेज दिया गया है।
राजेश सांगवान, हेड टीचर राजकीय प्राथमिक पाठशाला।
वर्जन
रिपेयरिंग की प्रक्रिया हमारी तरफ से तीन-चार महीने पहले पूरी करके भेजी जा चुकी है। टेंडर हेड ऑफिस से होना बाकी है। संभावना है कि अगले महीने तक टेंडर जारी होकर मरम्मत कार्य शुरू हो जाएगा। -रणजीत सिंह, कनिष्ठ अभियंता शिक्षा विभाग।
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ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन की बदहाली को लेकर उच्च अधिकारियों और सरकार को कई बार लिखित शिकायतें और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि जर्जर छत गिरने से किसी बच्चे, शिक्षक या कर्मचारी के साथ हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रशासन की होगी।
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ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल भवन की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए और जर्जर छत व दीवारों की अविलंब मरम्मत कराई जाए। यदि भवन की मरम्मत संभव नहीं है तो नया भवन बनाया जाए। नरेश, उमेद, जयपाल, सुरेश और सुरेन्द्र ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
स्कूल भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए।
जर्जर छत और दीवारों की अविलंब मरम्मत कराई जाए।
मरम्मत संभव नहीं होने पर नए भवन का निर्माण कराया जाए।
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।
वर्जन
हमने पिछले साल भी विभाग को लिखित में इसकी मरम्मत के लिए भेजा था। इस बार भी एसएमसी और स्कूल की तरफ से प्रस्ताव पास कर शिक्षा विभाग को भेज दिया गया है।
राजेश सांगवान, हेड टीचर राजकीय प्राथमिक पाठशाला।
वर्जन
रिपेयरिंग की प्रक्रिया हमारी तरफ से तीन-चार महीने पहले पूरी करके भेजी जा चुकी है। टेंडर हेड ऑफिस से होना बाकी है। संभावना है कि अगले महीने तक टेंडर जारी होकर मरम्मत कार्य शुरू हो जाएगा। -रणजीत सिंह, कनिष्ठ अभियंता शिक्षा विभाग।